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झारखंड चुनाव से पहले अकेले पड़े चंपई सोरेन, CM हेमंत के मास्टर स्ट्रोक से हुए पस्त, 4 वफादारों ने भी छोड़ा साथ

Champai Soren News: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के दिग्गज नेता चंपई सोरेन के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उनके राजनीतिक कदमों के बारे में अटकलों को हवा दी है। चंपई पिछले हफ्ते दिल्ली पहुंचे और वहां से अपने पोस्ट के जरिए JMM नेतृत्व के खिलाफ निराशा व्यक्त की कि उन्हें सीएम के पद से "अनौपचारिक रूप से हटा दिया गया"।

इतना ही नहीं, उन्होंने अपने एक्स (ट्विटर का बदला हुआ नाम) बॉयो से JMM की पहचान भी हटा दी है। चर्चा है कि वो झारखंड विधानसभा चुनाव-2024 से पहले भाजपा में शामिल होने वाले हैं। भाजपा में शामिल होने की अटकलों के बीच चंपई सोरेन ने मंगलवार (20 अगस्त) को खुद को अकेला पाया, जब उनकी पार्टी के चार वफादार सहयोगियों सीएम हेमंत सोरेन के प्रति अपनी निष्ठा और वफादारी दिखाई।

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हेमंत सोरेन के इस दांव के सामने फीके पड़े चंपई सोरेन

जनवरी 2024 में एक जमीन मामले में ईडी द्वारा हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद चंपई सोरेन को उत्तराधिकारी चुना गया था। हालांकि, हेमंत के जमानत पर रिहा होने के बाद, उन्होंने जुलाई में चंपई को पद से हटा दिया। चूंकि इस घटना ने बवाल मचा दिया था, इसलिए चंपई को कथित तौर पर जेएमएम के चार सहयोगियों और पार्टी से निकाले गए अन्य विधायकों का समर्थन प्राप्त था। लेकिन 20 अगस्त की रात हेमंत सोरेन ने ऐसा दांव खेला कि चंपई सोरेन अकेले पड़ गए।

चंपई के करीबी बताए जाने वाले जेएमएम के चार विधायकों ने हेमंत सोरेन से मुलाकात की और बीजेपी में शामिल होने की अटकलों को नकार दिया। ये चार विधायक रामदास सोरेन (घाटशिला), संजीव सरदार (पोटका), मंगल कालिंदी (जुगसलाई) और समीर कुमार मोहंती (बहरागोड़ा) है।

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'शिबू सोरेन हमारे राजनीतिक गुरु हैं और झामुमो मेरा घर है'

हेमंत सोरेन के घर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में विधायक रामदास सोरेन ने कहा, "(झामुमो के संरक्षक और हेमंत के पिता) शिबू सोरेन हमारे राजनीतिक गुरु हैं और झामुमो मेरा घर है। मैं कहीं नहीं जा रहा हूं। हेमंत बाबू ने हमसे मुलाकात की और विधानसभा चुनाव के लिए अपनी तैयारियां तेज करने का निर्देश दिया, क्योंकि अब बहुत कम समय बचा है।"

'अगर चंपई दा पार्टी में हैं तो हम उनके साथ रहेंगे: MLA रामदास सोरेन

झामुमो के पश्चिमी सिंहभूम अध्यक्ष रामदास ने इस बात से इनकार किया कि चंपई सोरेन ने हेमंत के खिलाफ बगावत करने के लिए उनसे संपर्क किया है। रामदास ने कहा, "हम झामुमो में हैं और अगर चंपई दा पार्टी में हैं, तो हम उनके साथ रहेंगे।"

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चंपई सोरेन का दावा-किसी भाजपा नेता से नहीं मिला

मंगलवार को झारखंड वापस लौट रहे चंपई सोरेन ने जोर देकर कहा कि उन्होंने दिल्ली यात्रा के दौरान किसी भी भाजपा नेता से संपर्क नहीं किया। चंपई ने कहा, "मैं यहां निजी काम से आया था और मुझे समझ नहीं आ रहा कि कौन ऐसी अफवाहें फैला रहा है।"

हालांकि पूर्व सीएम का गुट अगले कदम के बारे में चुप्पी साधे रहा, लेकिन 68 वर्षीय राजनेता चंपई सोरेने के करीबी सूत्रों ने कहा कि वह आने वाले दिनों में एक सार्वजनिक बैठक कर सकते हैं।

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चंपई सोरेन का CM पद से हटाए जाने पर छलका दर्द

चंपई सोरेन ने सीएम पद से हटाए जाने के कुछ महीनों बाद 20 अगस्त को सोशल मीडिया पोस्ट एक्स पर अपने दिल की बात साझा की है। चंपई सोरेन ने कहा,'' जोहार साथियों, आज समाचार देखने के बाद, आप सभी के मन में कई सवाल उमड़ रहे होंगे। आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसने कोल्हान के एक छोटे से गांव में रहने वाले एक गरीब किसान के बेटे को इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत में औद्योगिक घरानों के खिलाफ मजदूरों की आवाज उठाने से लेकर झारखंड आंदोलन तक, मैंने हमेशा जन-सरोकार की राजनीति की है। राज्य के आदिवासियों, मूलवासियों, गरीबों, मजदूरों, छात्रों एवं पिछड़े तबके के लोगों को उनका अधिकार दिलवाने का प्रयास करता रहा हूं। किसी भी पद पर रहा अथवा नहीं, लेकिन हर पल जनता के लिए उपलब्ध रहा, उन लोगों के मुद्दे उठाता रहा, जिन्होंने झारखंड राज्य के साथ, अपने बेहतर भविष्य के सपने देखे थे।''

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चंपई सोरेन ने कहा, ''इसी बीच, 31 जनवरी को, एक अभूतपूर्व घटनाक्रम के बाद, इंडिया गठबंधन ने मुझे झारखंड के 12वें मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य की सेवा करने के लिए चुना। अपने कार्यकाल के पहले दिन से लेकर आखिरी दिन (3 जुलाई) तक, मैंने पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ राज्य के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। इस दौरान हमने जनहित में कई फैसले लिए और हमेशा की तरह, हर किसी के लिए सदैव उपलब्ध रहा। बड़े-बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं, छात्रों एवं समाज के हर तबके तथा राज्य के हर व्यक्ति को ध्यान में रखते हुए हमने जो निर्णय लिए, उसका मूल्यांकन राज्य की जनता करेगी।''

चंपई सोरेन ने आगे कहा, ''जब सत्ता मिली, तब बाबा तिलका मांझी, भगवान बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू जैसे वीरों को नमन कर राज्य की सेवा करने का संकल्प लिया था। झारखंड का बच्चा- बच्चा जनता है कि अपने कार्यकाल के दौरान, मैंने कभी भी, किसी के साथ ना गलत किया, ना होने दिया। ''

चंपई सोरेन बोले - क्या लोकतंत्र में इस से अपमानजनक कुछ हो सकता है

चंपई सोरेन ने आगे कहा, ''इसी बीच, हूल दिवस के अगले दिन, मुझे पता चला कि अगले दो दिनों के मेरे सभी कार्यक्रमों को पार्टी नेतृत्व द्वारा स्थगित करवा दिया गया है। इसमें एक सार्वजनिक कार्यक्रम दुमका में था, जबकि दूसरा कार्यक्रम पीजीटी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरण करने का था। पूछने पर पता चला कि गठबंधन द्वारा 3 जुलाई को विधायक दल की एक बैठक बुलाई गई है, तब तक आप सीएम के तौर पर किसी कार्यक्रम में नहीं जा सकते।''

चंपई सोरेन ने कहा, ''क्या लोकतंत्र में इस से अपमानजनक कुछ हो सकता है कि एक मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों को कोई अन्य व्यक्ति रद्द करवा दे? अपमान का यह कड़वा घूंट पीने के बावजूद मैंने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण सुबह है, जबकि दोपहर में विधायक दल की बैठक होगी, तो वहां से होते हुए मैं उसमें शामिल हो जाऊंगा। लेकिन, उधर से साफ इंकार कर दिया गया।''

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चंपई सोरेन बोले- मैं पहली बार, भीतर से टूट गया, समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं

चंपई सोरेन ने कहा, ''पिछले चार दशकों के अपने बेदाग राजनैतिक सफर में, मैं पहली बार, भीतर से टूट गया। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं। दो दिन तक, चुपचाप बैठ कर आत्म-मंथन करता रहा, पूरे घटनाक्रम में अपनी गलती तलाशता रहा। सत्ता का लोभ रत्ती भर भी नहीं था, लेकिन आत्म-सम्मान पर लगी इस चोट को मैं किसे दिखाता? अपनों द्वारा दिए गए दर्द को कहां जाहिर करता?''

चंपई सोरेन ने कहा, ''जब वर्षों से पार्टी के केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक नहीं हो रही है, और एकतरफा आदेश पारित किए जाते हैं, तो फिर किस के पास जाकर अपनी तकलीफ बताता? इस पार्टी में मेरी गिनती वरिष्ठ सदस्यों में होती है, बाकी लोग जूनियर हैं, और मुझ से सीनियर सुप्रीमो जो हैं, वे अब स्वास्थ्य की वजह से राजनीति में सक्रिय नहीं हैं, फिर मेरे पास क्या विकल्प था? अगर वे सक्रिय होते, तो शायद अलग हालात होते।''

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'बैठक के दौरान मुझ से इस्तीफा मांगा गया, मैं हैरान था'

चंपई सोरेन ने कहा, ''कहने को तो विधायक दल की बैठक बुलाने का अधिकार मुख्यमंत्री का होता है, लेकिन मुझे बैठक का एजेंडा तक नहीं बताया गया था। बैठक के दौरान मुझ से इस्तीफा मांगा गया। मैं आश्चर्यचकित था, लेकिन मुझे सत्ता का मोह नहीं था, इसलिए मैंने तुरंत इस्तीफा दे दिया, लेकिन आत्म-सम्मान पर लगी चोट से दिल भावुक था।''

'मैं आंसुओं को संभालने में लगा था, लेकिन उन्हें सिर्फ कुर्सी से मतलब था'

चंपई सोरेन ने कहा, ''पिछले तीन दिनों से हो रहे अपमानजनक व्यवहार से भावुक होकर मैं आंसुओं को संभालने में लगा था, लेकिन उन्हें सिर्फ कुर्सी से मतलब था। मुझे ऐसा लगा, मानो उस पार्टी में मेरा कोई वजूद ही नहीं है, कोई अस्तित्व ही नहीं है, जिस पार्टी के लिए हम ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। इस बीच कई ऐसी अपमानजनक घटनाएं हुईं, जिसका जिक्र फिलहाल नहीं करना चाहता। इतने अपमान एवं तिरस्कार के बाद मैं वैकल्पिक राह तलाशने हेतु मजबूर हो गया।''

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चंपई सोरेन बोले- आज से मेरे जीवन का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है

चंपई सोरेन ने कहा, ''मैंने भारी मन से विधायक दल की उसी बैठक में कहा कि - "आज से मेरे जीवन का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।" इसमें मेरे पास तीन विकल्प थे। पहला, राजनीति से सन्यास लेना, दूसरा, अपना अलग संगठन खड़ा करना और तीसरा, इस राह में अगर कोई साथी मिले, तो उसके साथ आगे का सफर तय करना। उस दिन से लेकर आज तक, तथा आगामी झारखंड विधानसभा चुनावों तक, इस सफर में मेरे लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं।''

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चंपई सोरेन बोले- पार्टी के नुकसान के बारे में हम नहीं सोचते

चंपई सोरेन ने अपने एक अन्य पोस्ट में कहा, ''एक बात और, यह मेरा निजी संघर्ष है इसलिए इसमें पार्टी के किसी सदस्य को शामिल करने अथवा संगठन को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाने का मेरा कोई इरादा नहीं है। जिस पार्टी को हमने अपने खून-पसीने से सींचा है, उसका नुकसान करने के बारे में तो कभी सोच भी नहीं सकते। लेकिन, हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि...।''

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