'आतंकियों और पीड़ितों की बराबरी बर्दाश्त नहीं'– जयशंकर का UN में पाकिस्तान पर साधा निशाना
Jayshankar Criticizes Pakistan: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की 80वीं वर्षगांठ पर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकवादी संगठन को बचाने की कोशिशों पर निशाना साधते हुए कहा, 'आतंकवाद के पीड़ितों और अपराधियों को एक बराबर नहीं माना जा सकता।' जयशंकर ने UN सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली को 'अवरुद्ध' बताया और तत्काल सुधार की मांग की।
उनका इशारा पाकिस्तान की ओर था, जो लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को UNSC की निंदा से बचाने की कोशिश कर चुका है। आइए, जानते हैं जयशंकर के बयान, UN की खामियों, और भारत की स्थिति का पूरा ब्योरा...

पहलगाम हमला और पाकिस्तान का बचाव
जयशंकर ने UN में कहा, 'जब सुरक्षा परिषद का सदस्य देश पहलगाम जैसे क्रूर आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन का खुलेआम बचाव करता है, तो बहुपक्षवाद की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।' जुलाई 2025 में TRF ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी। UNSC की एक रिपोर्ट में TRF का जिक्र था, लेकिन पाकिस्तान ने प्रेस बयान से इसका नाम हटाने की कोशिश की। जयशंकर ने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर निशाना साधा, जो वर्तमान में UNSC का अस्थायी सदस्य है।
- UNSC की संरचना: 15 सदस्य (5 स्थायी: चीन, अमेरिका, रूस, UK, फ्रांस; 10 अस्थायी)। पाकिस्तान 2025 में सदस्य, जुलाई में अध्यक्ष रहा।
- आतंकियों को बचाने का आरोप: जयशंकर ने कहा, 'स्वयंभू आतंकियों को प्रतिबंध प्रक्रिया से बचाया जाता है। यह ईमानदारी पर सवाल उठाता है।' इशारा चीन की ओर था, जो LeT और Jaish-e-Mohammed के आतंकियों को UNSC में बचाता रहा है।
UN की खामियां: 'अवरुद्ध और ध्रुवीकृत'
जयशंकर ने UN को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:
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अवरुद्ध कार्यप्रणाली: 'UN की बहसें ध्रुवीकृत हो गई हैं। इसका कामकाज अवरुद्ध है।'
- सुधारों पर अड़चन: 'सार्थक सुधार प्रक्रिया को बाधित किया जाता है।'
- आतंकवाद पर नरमी: आतंकियों को बचाने और पीड़ितों-अपराधियों को बराबर मानने की प्रवृत्ति UN की विश्वसनीयता को कमजोर करती है।
- UN का समर्थन: 'भारत हमेशा UN और बहुपक्षवाद का समर्थक रहा है।'
- शांति स्थापना: भारत UN पीसकीपिंग मिशन्स में बड़ा योगदान देता है।
- सुधार की मांग: UNSC में स्थायी सीट और सुधारों की जरूरत।
उन्होंने कहा, 'शांति और सुरक्षा का वादा दिखावटी हो गया है। सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2030 की धीमी प्रगति वैश्विक दक्षिण के संकट को दिखाती है।'
भारत की प्रतिबद्धता: शांति और सुधार
जयशंकर ने भारत की स्थिति दोहराई:
जयशंकर ने UN की 80वीं वर्षगांठ पर स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। जयशंकर का बयान UN की खामियों और आतंकवाद पर दोहरे रवैये को उजागर करता है। भारत का सुधारों का आह्वान वैश्विक मंच पर गूंज रहा है। क्या UN बदलेगा? समय बताएगा।
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