एक Affair जिसने भारत को दिया टॉप मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट! क्या है विक्रम साराभाई के प्यार की अनसुनी कहानी?
एक ऐसा शख्स था जिसने भारत को अंतरिक्ष तक पहुंचाया, जिसने विज्ञान को सामाजिक बदलाव का माध्यम माना, और जिसने देश के बौद्धिक नक्शे को बदलने वाले कई बड़ी संस्थानों का निर्माण किया। हम बात कर रहे हैं दूरदर्शी वैज्ञानिक और संस्था निर्माता डॉ. विक्रम साराभाई की। लेकिन उनकी इस महान विरासत के पीछे एक ऐसी प्रेम कहानी छिपी है, जहां जुनून ने चुपके से इतिहास का रुख मोड़ दिया।
यह कहानी महज अकादमिक (Academic) महत्वाकांक्षा की नहीं, बल्कि एक ऐसे भावनात्मक रिश्ते की है जिसके केंद्र में IIM अहमदाबाद का जन्म था।

साराभाई और कमला चौधरी की पहली मुलाकात
अहमदाबाद के सबसे प्रभावशाली औद्योगिक घरानों में से एक में जन्मे विक्रम साराभाई की प्रतिभा का लोहा हर किसी ने माना। कैम्ब्रिज से पीएचडी और नोबेल विजेता डॉ. सीवी रमन के साथ काम करने के बाद उन्होंने फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) और इसरो (ISRO) जैसे संस्थान स्थापित किए। 1950 के दशक की शुरुआत में वह कपड़ा उद्योग को आधुनिक बनाने के लिए ATIRA से जुड़े, जहां उनकी मुलाकात कमला चौधरी से हुई।
अमेरिका से मनोविज्ञान में प्रशिक्षित (Trained) कमला, साराभाई की पत्नी मृणालिनी की दोस्त भी थीं। उनकी बौद्धिक शक्ति (Intellectual power) और देश के प्रति समर्पण ने साराभाई को इतना प्रभावित किया कि दोनों का प्रोफेशनल रिश्ता जल्द ही दो दशक तक चलने वाले एक गहरे व्यक्तिगत संबंध में बदल गया।
प्रेम कहानी से जुड़ा IIM का इतिहास
साइकोएनालिस्ट और लेखक सुधीर कक्कड़ की किताब A Book of Memory: Confessions and Reflections में इस बात का खुलासा किया गया है कि IIM अहमदाबाद की स्थापना के पीछे एक प्रेम कहानी थी। NDTV के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुधीर कक्कड़ (जो कमला चौधरी के भतीजे हैं) ने लिखा है कि कमला इस मुश्किल रिश्ते से असहज होकर अहमदाबाद छोड़कर दिल्ली जाना चाहती थीं। लेकिन साराभाई उन्हें शहर में ही रोकना चाहते थे। इसी वजह से साराभाई ने अपनी राजनीतिक पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल किया।
कमला चौधरी को रोकने के लिए बना IIM अहमदाबाद?
जब भारत सरकार और फोर्ड फाउंडेशन देश के बढ़ते उद्योगों के लिए मैनेजर्स को प्रशिक्षित करने के लिए संस्थान स्थापित करने पर विचार कर रहे थे, तो साराभाई ने इस अवसर को भुनाया। कक्कड़ के अनुसार, कमला को अहमदाबाद में रखने की इच्छा ने ही उन्हें शहर में एक मैनेजर्स संस्थान स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
कलकत्ता के बाद देश का दूसरा IIM
अपने प्रभाव, परिवार के कनेक्शन और अकादमिक पहुंच का उपयोग करते हुए उन्होंने फोर्ड फाउंडेशन और सरकार दोनों को आश्वस्त किया कि अहमदाबाद ही IIM के लिए आदर्श स्थान है। इस प्रकार 1961 में IIM अहमदाबाद का जन्म हुआ, जो कलकत्ता के बाद देश का दूसरा IIM था। कमला चौधरी इस संस्थान की पहली संकाय सदस्य बनीं और इसकी संस्कृति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विरोध: बेटी ने खारिज की प्रेम की यह थ्योरी
हालांकि, इतिहास की इस रोमांटिक व्याख्या को सबने स्वीकार नहीं किया है। विक्रम साराभाई की बेटी, प्रसिद्ध कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया कि IIM अहमदाबाद की स्थापना किसी निजी रिश्ते के कारण हुई थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में मल्लिका के हवाले से कहा गया कि उन्होंने अपने पिता और कमला के बीच 'घनिष्ठ संबंध' को स्वीकार किया, लेकिन इस तरह की एक बड़ी संस्थागत उपलब्धि को व्यक्तिगत रिश्ते से जोड़ना पिता के राष्ट्र निर्माण के विजन के साथ बहुत बड़ा अन्याय होगा। मल्लिका ने मनोरोग विशेषज्ञों पर आरोप लगाते हुए इस थ्योरी पर सवाल उठाए। यह कहानी, जिसकी सत्यता को लेकर विवाद है, आज भी इतिहासकारों और पाठकों को आकर्षित करती है।












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