• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

J&K: आतंकियों के दहशत फैलाने वाले पोस्टर के जवाब में सरकार ने विज्ञापन छपवाकर कहा, जरा सोचिए

|

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुक्रवार को स्थानीय अखबारों में पूरे पन्ने का एक विज्ञापन देकर लोगों से गुजारिश की है कि वे दुकानें खोलें और राज्य में सामान्य गतिविधियों की शुरुआत होने दें। विज्ञापन में राज्य के लोगों से पूछा गया है कि अगर दुकानें बंद रहेंगी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सामान्य रूप से नहीं चलेंगे तो आखिरकार उससे फायदा किसे मिलेगा? बता दें कि इससे पहले जब स्थानीय लोगों ने दुकानें खोलने की कोशिश की थी तो कुछ दुकानदारों पर आतंकी हमले भी हुए थे, जिसमें एक स्थानीय दुकानदार मारा गया था और कुछ जख्मी भी हुए थे। इसके बाद ऐसी खबरें भी आई थीं कि आतंकी घाटी में पोस्टर लगाकर लोगों को कर्फ्यू जैसा माहौल बनाए रखने की चेतावनी दे रहे हैं। शायद इसी के जवाब में अब सरकार ने लोगों को विज्ञापन के जरिए ये समझाने की कोशिश की है कि उन्हें सोचना चाहिए कि क्या आतंकियों के सामने घुटने टेक देंगे या फिर अपने मन से खौफ को मिटाकर कश्मीर की तरक्की में हाथ बटाएंगे।

क्या हम आतंकियों से डर जाएंगे?

क्या हम आतंकियों से डर जाएंगे?

ग्रेटर कश्मीर में छपे विज्ञापन में राज्य सरकार की ओर से इस बात को जोरदार तरीके से उठाया गया है कि क्या हम आतंकियों के सामने घुटने जा रहे हैं? इस विज्ञापन के जरिए सरकार ने लोगों अपना डर भगाने की अपील की है। विज्ञापन में बताया गया है कि 'सोचिए, पिछले 70 सालों से जम्मू-कश्मीर के लोगों को गुमराह किया गया है। वे एक शातिर मुहिम और प्रोपेगेंडा के पीड़ित हैं, जिसके चलते उन्होंने आतंकवाद का कभी न खत्म होने वाल कुचक्र, हिंसा, तबाही और संपत्तियों की नुकसान देखी है। अलगाववादियों ने अपने बच्चों को पढ़ने, काम करने और कमाई के लिए बाहर भेजा है, जबकि आम जतना और उनके बच्चों को हिंसा, पत्थरबाजी और हड़तालों में धकेल दिया है। वे आतंकियों के खतरे का भय दिखाकर और अफवाह फैलाकर लोगों को गुमराह करते हैं। आज भी आतंकवादी धमकियों और ज्यादतियों का वही हथकंडा अपना रहे हैं। क्या हम इसे बर्दाश्त करेंगे?

यह हमारा घर है, इसके लिए हमें ही सोचना है

यह हमारा घर है, इसके लिए हमें ही सोचना है

विज्ञापन के जरिए सरकार ने राज्य की जनता से सवाल किए हैं कि क्या पुराने हथकंडों, ज्यादतियों को हम आज भी अपने ऊपर हावी होने देंगे? क्या धमकियां और अफवाह काम करेंगी या पुख्ता जानकारियों के साथ लिए जाने वाले फैसले हमारे लिए सबसे अच्छे रहेंगे? क्या कुछ धमकी भरे पोस्टरों से ही हम डर जाएंगे? जिससे कि हम अपना कारोबार न शुरू कर पाएं, हम अपनी जिंदगी की जरूरतों के हिसाब से न कमाएं, अपने बच्चों की शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की चिंता न करें, कश्मीर को विकास से गुलजार न होंने दें। लेकिन, यह हमारा घर है। इसकी हिफाजत और इसकी समृद्धि के बारे में हमें ही सोचना है। फिर डर क्यों?

महबूबा की बेटी ने कसा तंज

हालांकि, सरकार की इस अपील पर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा ने अपनी मां के ट्विटर हैंडल से तंज कसते हुए प्रतिक्रिया जाहिर की है। 'ग्रेटर कश्मीर के फ्रंट पेज पर प्रदेश प्रशासन की नोटिस का अंदाज गुजारिश वाला है। 5 अगस्त से जारी कठोर पाबंदियों के बावजूद कश्मीरी विरोध दर्ज कराने के लिए सिविल कर्फ्यू को लेकर दृढ़ हैं। अगर अधिकारियों को वाकई लोगों का ख्याल है तो उन्हें टेलीकॉम पर लगी पाबंदियां खत्म करनी चाहिए। ' वैसे शुक्रवार को ये खबर भी आई है कि शनिवार से जम्मू-कश्मीर में पोस्ट पेड मोबाइल सेवाएं भी बहाल हो सकती हैं।

अगले कुछ दिनों में रिहा होंगे जम्मू कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्री, धारा 370 हटाए जाने के बाद से नजरबंद

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Jammu and Kashmir government advertised in the newspaper,if we are going to succumb to militants?
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more