धनखड़ का इस्तीफा, कौन चलाएगा राज्यसभा? उपराष्ट्रपति का काम कैसे होगा, चुनाव कब होंगे, क्या कहता है संविधान?
Vice President Jagdeep Dhankhar Resignation: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए, संविधान के अनुच्छेद 67(A) के तहत भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उनका यह निर्णय जहां राजनीतिक हलकों में गंभीर चर्चा का विषय बन गया है, वहीं इससे संबंधित संवैधानिक प्रक्रियाएं भी सक्रिय हो गई हैं।
अब सवाल यह है कि जब देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद अचानक खाली हो गया है, तो राज्यसभा के सभापति पद की ज़िम्मेदारी कौन संभालेगा? क्या संविधान ऐसी स्थिति के लिए तैयार है? और सबसे अहम नए उपराष्ट्रपति का चुनाव कब तक होगा? यह पहला मौका नहीं है जब कोई शीर्ष पदाधिकारी निजी या स्वास्थ्य कारणों से पद से हटे हों, लेकिन उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद का इस तरह अचानक रिक्त होना एक असाधारण परिस्थिति है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम समझें
👉 संविधान क्या कहता है,
👉 राज्य सभा की कार्यवाहियां कैसे चलेंगी,
👉 उपराष्ट्रपति के कार्य का कैसे होगा संचालन

भारत के उपराष्ट्रपति के कार्य, दायित्व और संवैधानिक स्थिति (Functions, responsibilities of the Vice President of India)
भारतीय संविधान में उपराष्ट्रपति का पद एक उच्च संवैधानिक पद है, जिसकी शक्तियां और कार्य स्पष्ट रूप से भाग V के अनुच्छेद 63 से 71 तक वर्णित हैं। यद्यपि राष्ट्रपति की तुलना में उपराष्ट्रपति की भूमिका अपेक्षाकृत सीमित है, फिर भी वह अनेक स्थितियों में केंद्र सरकार के शासन-संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
चुनाव और पदग्रहण
भारत का उपराष्ट्रपति लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों द्वारा गुप्त मतदान से चुना जाता है। चुने जाने के बाद वे राष्ट्रपति के समक्ष शपथ लेकर अपना पद ग्रहण करते हैं।
राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य
- भारत के उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं।
- इस भूमिका में वे राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता करते हैं।
- उसकी भूमिका लोकसभा अध्यक्ष के समान होती है, लेकिन वह राज्यसभा का सदस्य नहीं होते।
- सामान्य स्थितियों में उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता, परंतु मत विभाजन की स्थिति में निर्णायक मत (casting vote) दे सकते हैं।
कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका
यदि किसी कारणवश राष्ट्रपति अस्थायी रूप से अनुपस्थित हों, गंभीर रूप से बीमार हों, या पद रिक्त हो जाए तो उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालते हैं, और तब वे सभी निर्णय लेने की शक्तियों से सुसज्जित होते हैं।
🔹 यह कार्यकाल अधिकतम 6 महीने तक चल सकता है जब तक नया राष्ट्रपति निर्वाचित न हो जाए।
➡️ ध्यान दें: जब उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति बनते हैं, तो वह राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं कर सकते। उस स्थिति में, राज्यसभा के उपसभापति सभापति का कार्यभार संभालते हैं।
Who will handle rajya sabha- राज्यसभा का संचालन कौन करेगा?
भारत के उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। इस भूमिका में वे राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता करते हैं। अगर उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही वह पद छोड़ देते हैं, तो संविधान के अनुच्छेद 89(2) और 91 के अनुसार, राज्यसभा के उपसभापति या राष्ट्रपति द्वारा चुना गया कोई अन्य सदस्य राज्यसभा के सभापति की जिम्मेदारी संभालता है जब तक कि नया उपराष्ट्रपति चुनकर नहीं आ जाता।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद, अब राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह अस्थायी रूप से सभापति (Chairman) की भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, ध्यान देने वाली बात ये है कि, वे केवल राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन कर पाएंगे। उन्हें उपराष्ट्रपति को मिली संवैधानिक शक्तियां (जैसे राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में कार्यभार संभालना आदि) इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
अब कौन संभालेगा देश की दूसरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी?
भारत के उपराष्ट्रपति को सीधे तौर पर कोई बड़ा कार्यभार नहीं सौंपा जाता है। उनकी मुख्य जिम्मेदारी राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य करना होता है। इसके अलावा, जब राष्ट्रपति किसी कारणवश अनुपस्थित रहते हैं जैसे बीमारी, विदेश यात्रा, इस्तीफा या निधन तो उपराष्ट्रपति को कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी दी जाती है।
हालांकि वर्तमान समय में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पूरी तरह से सक्रिय हैं और पद पर कार्यरत हैं।
इसलिए उपराष्ट्रपति के इस्तीफे का देश के प्रशासन पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। केवल राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारू रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई है, जिसे राज्यसभा के उपसभापति संभालेंगे।
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कब होंगे चुनाव?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 68 के अनुसार, यदि किसी कारणवश उपराष्ट्रपति का पद कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व रिक्त हो जाता है चाहे वह इस्तीफा हो, मृत्यु हो या अन्य कोई कारण तो ऐसी स्थिति में छह महीने के भीतर उस पद के लिए नए उपराष्ट्रपति का चुनाव कराना अनिवार्य होता है, ताकि संवैधानिक व्यवस्था बनी रहे और शीर्ष संवैधानिक पदों पर नेतृत्व का कोई शून्य न उत्पन्न हो; यह चुनाव संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित और नामित सदस्यों द्वारा गुप्त मतदान प्रणाली के माध्यम से होता है, और नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति अपने कार्यभार ग्रहण की तिथि से अगले पाँच वर्षों तक पद पर बने रहते हैं।
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