विकसित भारत @ 2047 का सपना: फिटनेस को राष्ट्रीय मिशन बनाने की अनूठी पहल
आईआरएस अधिकारी और फिट इंडिया एंबेसडर नरेंद्र कुमार यादव की नई किताब 'विकसित भारत @ 2047' के सपने को साकार करने में देश की सेहत को एक मजबूत आधार के रूप में पेश करती है। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित 'फिटनेस और भारत @ 2047' का विमोचन आज नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के स्पीकर हॉल में आयोजित एक भव्य समारोह में किया गया।

इस किताब का विमोचन केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने किया। इस मौके पर स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संगठन सचिव सतीश कुमार मुख्य वक्ता और विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रकाशन जगत की हस्तियों, सिविल सेवकों, फिटनेस विशेषज्ञों और कई गणमान्य अतिथियों ने शिरकत की।
यह किताब इस बात पर जोर देती है कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास, तकनीक और बुनियादी ढांचे के दम पर हासिल नहीं किया जा सकता। लेखक का मानना है कि 'विकसित भारत @ 2047' के विजन को हकीकत में बदलने के लिए देश की आबादी का स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान होना बेहद जरूरी है।
फिटनेस को महज एक निजी शौक के बजाय 'राष्ट्रीय उत्पादकता' में निवेश के तौर पर देखते हुए, लेखक ने इसे एक जन आंदोलन बनाने की वकालत की है। इसमें स्कूलों, परिवारों, दफ्तरों, समुदायों और सरकारी संस्थानों की सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है।
भारत की पारंपरिक शारीरिक संस्कृति जैसे वैदिक परंपराओं, योग, सूर्य नमस्कार, अखाड़ों और मल्लखंब से प्रेरणा लेते हुए, यह किताब फिटनेस के आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के मेल पर जोर देती है।
किताब में डायबिटीज, मोटापा और हाइपरटेंशन जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते बोझ पर भी चिंता जताई गई है। लेखक ने इन्हें न केवल स्वास्थ्य चुनौती, बल्कि भारत के 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' (जनसांख्यिकीय लाभांश) के लिए एक आर्थिक खतरा भी बताया है। इसमें युवाओं की फिटनेस, मानसिक मजबूती, महिलाओं के स्वास्थ्य, एक्टिव एजिंग और 'स्टेरॉयड-मुक्त भारत' जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में एआई (AI) और वियरेबल टेक्नोलॉजी की भूमिका को भी रेखांकित किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान किरेन रिजिजू ने कहा, "विकसित भारत @ 2047 का सफर सिर्फ हमारी अर्थव्यवस्था की ताकत से नहीं, बल्कि हमारे लोगों की ताकत से तय होगा। एक फिट इंडिया ही निश्चित रूप से एक विकसित इंडिया बनेगा।" वहीं लेखक नरेंद्र कुमार यादव ने कहा, "फिटनेस कोई निजी शौक नहीं है, बल्कि यह देश की उत्पादकता में किया गया निवेश है। अगर हम 2047 में एक विकसित भारत चाहते हैं, तो हमें आज से ही मजबूत, स्वस्थ और जुझारू नागरिक तैयार करने होंगे।"
2009 बैच के आईआरएस अधिकारी नरेंद्र कुमार यादव एक वरिष्ठ सिविल सेवक हैं और फिट इंडिया एंबेसडर के रूप में नियुक्त होने वाले पहले सिविल सर्वेंट भी हैं। घुटने की गंभीर चोट से उबरने और अपना वजन 107 किलो से घटाकर 86 किलो करने का उनका निजी अनुभव, साथ ही न्यूट्रिशन और पर्सनल ट्रेनिंग में उनकी विशेषज्ञता, इस किताब को नीतिगत नजरिए और वास्तविक जीवन के अनुभवों का एक अनूठा संगम बनाती है।












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