Jagdeep Dhankhar: जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद चर्चा में आए ये बड़े विधेयक, जो बने उनके कार्यकाल की पहचान
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने सोमवार शाम अचानक एक बड़ा कदम उठाते हुए 'स्वास्थ्य को प्राथमिकता' देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजकर कहा है कि वह तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। उपराष्ट्रपति रहते हुए धनखड़ ने राज्यसभा के सभापति के तौर पर कई ऐतिहासिक और अहम विधेयकों को पारित कराने में अहम भूमिका निभाई थी।
उनके पत्र में लिखा है, 'स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं।
धनखड़ के इस्तीफे की अप्रत्याशित घोषणा ने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस में अटकलों को जन्म दे दिया है। कांग्रेस का मानना है कि 'उनके इस अप्रत्याशित इस्तीफे के पीछे जो दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा कुछ हो सकता है।'

उपराष्ट्रपति ने ये अहम विधेयक पास किए
1. संविधान (128वां संशोधन) विधेयक, 2023 - नारी शक्ति वंदन अधिनियम
सितंबर 2023 में लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों ने इस विधेयक को पास किया था। इसका मुख्य उद्देश्य है कि लोकसभा और राज्य विधानसभा में महिलाओं को 33% सीटों का आरक्षण दिया जाए, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को मजबूती मिले।
2. बिल ऑफ लेंडिंग विधेयक, 2025
इस विधेयक को राज्यसभा ने पारित किया। इसका मकसद यह है कि शिपिंग डॉक्यूमेंट को कानूनी तौर पर मान्यता दी जाए, ताकि व्यापारिक लेन-देन में ट्रांसपेरेंट और सिक्योंरिटी बढ़े। इस कानून से व्यापार में विश्वसनीयता बनी रहेगी और धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी।
3. आपराधिक कानून सुधार विधेयक, 2023
इस विधेयक के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को संसद ने पारित किया। इन तीनों नए कानूनों का उद्देश्य भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक आधुनिक, प्रभावी और पीड़ित-केंद्रित बनाना है।
4. दिल्ली सेवा विधेयक, 2023
इसे 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023' कहा जाता है। यह विधेयक दिल्ली में सरकारी नौकरियों के ट्रांसफर (Transfer) और अपॉइंटमेंट (Appointment) को लेकर केंद्र सरकार को अधिकार देता है।
अब कौन संभालेगा उपराष्ट्रपति का कार्यभार?
नियमों के अनुसार, राज्यसभा के उपसभापति संसद के उच्च सदन (Upper House) के कार्यवाहक सभापति के रूप में कार्यभार संभालेंगे। हरिवंश नारायण सिंह वर्तमान में राज्यसभा के उपसभापति हैं। हरिवंश भारत के अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव तक अस्थायी रूप से इस पद पर बने रहेंगे।
संविधान का आर्टिकल 91
भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति होता है। लोकसभा का सभापति लोकसभा अध्यक्ष होता है। जब उपराष्ट्रपति का पद खाली होता है, तो राज्यसभा के सभापति के कर्तव्य अधूरे नहीं रहते। संविधान के अनुच्छेद 91 के अनुसार, राज्यसभा के उपसभापति को अस्थायी रूप से कार्यभार संभालने और सभापति के कार्यों का निर्वहन करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
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