Defence News: चीन को घेरने की तैयारी? एशियाई देश इतनी तेजी से क्यों खरीद रहे हैं भारत की BrahMos मिसाइल?

Defence News: एक समय था जब भारत को दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदने वाले देश के रूप में गिना जाता था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। भारत सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अब दुनिया के कई देशों को हथियार बेचने वाली ताकत के रूप में उभर रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है भारत का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात, जो 2025-26 में बढ़कर ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया। इस उपलब्धि के पीछे अगर किसी एक हथियार प्रणाली का सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है, तो वह है ब्रह्मोस मिसाइल।

फिलीपींस से शुरू हुई कहानी, अब कई देशों तक पहुंची

ब्रह्मोस की अंतरराष्ट्रीय यात्रा फिलीपींस से शुरू हुई थी, लेकिन अब यह कहानी वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया और कई दूसरे देशों तक पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि जिन देशों ने ब्रह्मोस में रुचि दिखाई है, उनमें से ज्यादातर चीन की बढ़ती समुद्री ताकत और क्षेत्रीय दावों को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में इन देशों के लिए ब्रह्मोस सिर्फ एक मिसाइल नहीं, बल्कि अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करने का एक प्रभावी साधन बनती जा रही है।

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रफ्तार और सटीकता ने बनाया दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों में शामिल

ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्पीड, सटीकता और अलग-अलग जगहों से इस्तेमाल। यह जमीन, समुद्र, फाइटर जेट और सबमरीन- सभी प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती है। इसकी तेज रफ्तार दुश्मन को रिसपॉन्स देने के लिए बहुत कम समय देती है। यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है और कई देश इसे अपनी सैन्य ताकत का हिस्सा बनाना चाहते हैं।

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मिसाइल के साथ बनती है लंबी रणनीतिक साझेदारी

भारत के लिए ब्रह्मोस का महत्व सिर्फ सैन्य नहीं है। जब कोई देश ब्रह्मोस खरीदता है, तो वह केवल मिसाइल नहीं खरीद रहा होता, बल्कि भारत के साथ एक लंबी रक्षा साझेदारी भी बना रहा होता है। प्रशिक्षण, रखरखाव, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और भविष्य के अपग्रेड जैसी कई चीजें दोनों देशों को लंबे समय तक जोड़कर रखती हैं। यही कारण है कि रक्षा विशेषज्ञ इन सौदों को भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत के रूप में भी देखते हैं।

चीन के लिए बढ़ सकती है चिंता

दक्षिण-पूर्व एशिया के जिन देशों के साथ चीन के समुद्री विवाद हैं, वही देश अब भारत की ब्रह्मोस मिसाइल में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इससे चीन के लिए स्थिति थोड़ी असहज हो सकती है। धीरे-धीरे भारत उस क्षेत्र में एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है, जहां पहले चीन का प्रभाव ज्यादा दिखाई देता था। यही वजह है कि ब्रह्मोस को सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदलने वाले साधन के रूप में भी देखा जा रहा है।

आने वाले सालों में और बढ़ सकती है भारत की ताकत

अगर वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ हुए समझौते पूरी तरह लागू हो जाते हैं, और मलेशिया, सऊदी अरब, कतर, ओमान, मिस्र या लैटिन अमेरिकी देशों में से कुछ भी ब्रह्मोस खरीद लेते हैं, तो भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट एक नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। इससे न केवल भारतीय रक्षा उद्योग को फायदा होगा, बल्कि दुनिया में भारत की रणनीतिक पहुंच भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी।

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ब्रह्मोस अब सिर्फ मिसाइल नहीं, भारत की पहचान है

सीधी भाषा में कहें तो ब्रह्मोस अब सिर्फ एक मिसाइल नहीं रही। यह भारत की सैन्य ताकत, तकनीकी क्षमता, रक्षा उद्योग और विदेश नीति चारों का प्रतीक बन चुकी है। जिस रफ्तार से दुनिया के देश इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि आने वाले दशक में "मेड इन इंडिया" हथियारों की पहचान दुनिया के कई हिस्सों में ब्रह्मोस के नाम से होगी। और अगर ऐसा होता है, तो यह सिर्फ रक्षा निर्यात की सफलता नहीं होगी, बल्कि भारत के ग्लोबल इम्पैक्ट के बढ़ने की भी कहानी होगी।

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