Explainer: सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान जाने से रोककर राजस्थान को देने में अभी लगेंगे इतने साल
Indus Water to Rajasthan: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के अगले ही दिन भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का फैसला लिया। इसका अर्थ यह हुआ कि अब भारत अपनी नदियों का पानी पाकिस्तान को भेजने के लिए बाध्य नहीं रहेगा। यह फैसला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर पानी की भारी कमी झेलते राज्य राजस्थान के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं।

Indira Gandhi Canal water: किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता ने क्या कहा?
OneIndia Hindi Explainer के लिए खास बातचीत में सुभाष सहगल, किसान संघर्ष समिति (हनुमानगढ़) के प्रवक्ता ने कहा कि "सिंधु जल समझौता तोड़ने के बाद सिंधु नदी का पानी राजस्थान तक पहुंचाया जा सकता है। राह मुश्किल जरूर है, मगर नामुमकिन नहीं।"
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सहगल आगे बताते हैं कि यह समझने के लिए पहले सिंधु जल समझौते का इतिहास और भारत की मौजूदा जल संरचनाओं को समझना जरूरी होगा। उनके अनुसार अगर बुनियादी ढांचागत सुधार तेजी से हों, तो कम से कम 5 साल में अतिरिक्त पानी राजस्थान पहुंच सकता है।

Rajasthan Water Crisis: पानी की ज़रूरत कितनी है?
करीब 6 लाख हेक्टेयर ज़मीन को सिंचाई की आवश्यकता है।
नहरी पानी की आवश्यकता: 10 मिलियन एकड़ फीट (MAF)
वर्तमान में मिल रहा पानी: 4 से 6.5 मिलियन एकड़ फीट (MAF)
हर साल फरवरी में ही नहरी पानी खत्म होने की स्थिति बन जाती है।

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राजस्थान के किन जिलों को लाभ होगा?
सिंचाई: बीकानेर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर
पीने का पानी: जोधपुर, नागौर, सीकर, झुंझुनूं, बाड़मेर, चूरू

Indira Gandhi Canal Water: राजस्थान तक सिंधु का पानी कैसे पहुंचेगा?
मुख्य रास्ता हरिके बैराज: पंजाब के तरनतारन और फिरोजपुर की सीमा पर स्थित हरिके बैराज एक प्रमुख जलस्रोत है। यहीं से इंदिरा गांधी नहर (IGN) निकलती है, जो पहले से ही राजस्थान तक पानी पहुंचा रही है। अब रोका गया अतिरिक्त पानी भी इसी रूट से लाया जा सकता है।

तकनीकी तैयारी क्या है?
हरिके बैराज से निकलने वाली दो फीडर नहरें।
1. फिरोजपुर फीडर
2. राजस्थान फीडर (IGN)
इनकी वर्तमान क्षमता लगभग 30,000 क्यूसेक थी, लेकिन अब यह घटकर 20,000 क्यूसेक रह गई है। सुधार के लिए 197 किलोमीटर लंबाई में नहरें मजबूत की जा रही हैं।

राजस्थान में पानी लाने में कितना समय लगेगा?
पहला चरण: जुलाई 2026 से शुरुआत। पहले साल 3,500 क्यूसेक पानी इंदिरा गांधी नहर में डाला जाएगा। दो सालों में शेष 3,000 क्यूसेक और जोड़ा जाएगा।
पूरा प्रोसेस: कम से कम 5 साल
देरी की वजह: झेलम, चिनाब और सिंधु नदियों का प्रवाह तेज़ है - इसलिए पानी का रुख मोड़ना या रोकना तुरंत संभव नहीं है। ढांचागत सुधारों, नहरों की मरम्मत और नए बैराज निर्माण में समय लगेगा।

India Pakistan Water Dispute: अब तक भारत अपनी ही नदियों का पानी क्यों नहीं रोक पाया?
रावी नदी: शाहपुर कंडी बांध योजना 1982 में शुरू हुई, लेकिन पंजाब और जम्मू-कश्मीर के विवाद में फंसी रही।अब 2024 में जाकर यह बांध बनकर तैयार हुआ है।
सतलुज और व्यास: भाखड़ा नांगल, रोपड़ और पोंग बांध बनाए गए। हरिके बैराज से निकलने वाली नहरें जर्जर हो चुकी हैं - क्षमता घट गई है। मरम्मत के लिए राजस्थान और पंजाब सरकारों ने फंड दिया है, लेकिन कार्य अधूरा है।

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India Water Strategy Pakistan: वर्तमान में कितना पानी पाकिस्तान चला जाता है?
बारिश के दिनों में हरिके बैराज से 50,000 से 1 लाख क्यूसेक पानी की आवक होती है। इनमें से 5,000 से 10,000 क्यूसेक पानी बिना उपयोग के पाकिस्तान चला जाता है। पिछले 30 वर्षों में अनुमानित 15 से 20 MAF पानी भारत से पाकिस्तान चला गया।

Pahalgam Attack: पहलगाम हमले के बाद तेजी से बदला गया प्लान
22 अप्रैल 2025 के हमले के बाद, 13 जिलों में जल संसाधन विभाग ने नहर तंत्र के आधुनिकीकरण का कार्य समय से पहले पूरा करने की योजना बनाई है। इससे राजस्थान के लाखों लोगों को पीने और सिंचाई के लिए स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है।

सिंधु का पानी बदल सकता है राजस्थान की तस्वीर
सिंधु जल समझौता स्थगित होने से भारत ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। यदि ढांचागत सुधारों और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ इसे लागू किया जाए, तो राजस्थान जैसे जल-संकटग्रस्त राज्य को स्थायी समाधान मिल सकता है - जिससे कृषि, पेयजल और जीवन स्तर पर क्रांतिकारी बदलाव संभव हैं।

Indus Water Treaty: सिंधु जल संधि क्या है और किसे क्या मिला था?
समझौते का इतिहास: सिंधु जल समझौता 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से कराची में हुआ। यह समझौता सिंधु बेसिन की 6 नदियों पर आधारित है। भारत को रावी, व्यास और सतलुज तथा पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी मिला।
समझौते में पानी का बंटवारा कैसे हुआ था?
समझौते के अनुसार पाकिस्तान को सिंधु नदी प्रणाली के कुल जल का 80% और भारत को 20% पानी का अधिकार मिला। भारत को यह छूट दी गई कि वह पाकिस्तान की नदियों से "गैर-उपभोग्य प्रयोग" (जैसे बिजली उत्पादन, सिंचाई) कर सकता है, लेकिन बड़ा बांध नहीं बना सकता।
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