CIA और FBI ताकते रह गए मुंह, शख्स ने US में बैठ ईरान को भेजी पूरी टेक्नोलॉजी, कैसे चलाया 13 सालों तक नेटवर्क?

Iran War Update: अमेरिका में एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां कैलिफोर्निया के एक टेक कंपनी CEO को ईरान की सेना और उसके न्यूक्लियर इंस्टीट्यूशंस तक कंप्यूटर नेटवर्किंग इक्विपमेंट्स पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) का दावा है कि आरोपी ने सालों तक अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार कर ईरान को संवेदनशील तकनीक सप्लाई की और इस कारोबार से करोड़ों डॉलर कमाए। कहा ये भी जा रहा है कि इन सब टेक्नोलॉजी ने ईरान को अमेरिका के खिलाफ युद्ध लड़ने में मदद की।

कौन है आरोपी CEO?

गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का नाम जमशेद घोमी है। वह कैलिफोर्निया के न्यूपोर्ट कोस्ट में रहता है और उसकी उम्र 63 साल बताई गई है। घोमी के पास अमेरिकी और ईरानी दोनों देशों की नागरिकता है। वह तेहरान स्थित कंप्यूटर नेटवर्किंग कंपनी फराज परदाज रायनेह (FPR) का संस्थापक, मालिक और CEO है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि उसने 2011 से 2024 तक ईरान को बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित इक्विपमेंट्स मुहैया कराए।

Iran War Update

13 साल तक चलता रहा नेटवर्क

अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, घोमी ने 2011 से 2024 के बीच ईरान को सैकड़ों टन कंप्यूटर नेटवर्किंग और संचार इक्विपमेंट्स सप्लाई किए। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए कमाई गई रकम में से कम से कम 15 मिलियन डॉलर (करीब 125 करोड़ रुपये से अधिक) अमेरिकी बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। अमेरिका का कहना है कि यह पैसा उन्हीं अवैध सौदों से कमाया गया था जो ईरान के साथ किए गए थे।

UAE के रास्ते ईरान पहुंचता था सामान

DoJ के मुताबिक घोमी सीधे ईरान को सामान नहीं भेजता था। इसके बजाय वह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में मौजूद बिचौलियों और कंपनियों का इस्तेमाल करता था। इस व्यवस्था का मकसद अमेरिकी अधिकारियों और सप्लायर्स से यह छिपाना था कि इक्विपमेंट्सों की असली डेस्टिनेशन ईरान है। अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत बिना सरकारी इजाजत के ईरान के साथ अधिकांश व्यापारिक लेनदेन, खासकर सैन्य और न्यूक्लिर इंस्टीट्यूशंस से जुड़े सौदे करना गैरकानूनी है।

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eBay और PayPal का भी किया इस्तेमाल

जांच में यह भी सामने आया कि 2011 से 2015 के बीच घोमी ने अपने eBay और PayPal खातों का उपयोग करके 400 से ज्यादा बार कंप्यूटर नेटवर्किंग इक्विपमेंट्स खरीदे। इसके बाद इन इक्विपमेंट्सों को UAE भेजा गया और वहां से अलग-अलग माध्यमों से ईरान पहुंचाया गया। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह पूरा सिस्टम जानबूझकर इस तरह बनाया गया था ताकि प्रतिबंधों को चकमा दिया जा सके।

250 टन से ज्यादा इक्विपमेंट्स पहुंचाने का आरोप

न्याय विभाग के मुताबिक 2018 तक घोमी दुबई में मौजूद फ्रेट फॉरवर्डर्स और बिचौलियों की मदद से 250 टन से अधिक नेटवर्किंग इक्विपमेंट्स ईरान पहुंचा चुका था। अधिकारियों का कहना है कि हर चरण पर यह कोशिश की जाती थी कि अमेरिकी सप्लायर्स और नियामकों को असली गंतव्य का पता न चल सके।

2023 तक जारी रहा ऑपरेशन

अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि यह गतिविधियां 2023 के अंत तक जारी रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक घोमी ने व्यक्तिगत रूप से मिनेसोटा और नेब्रास्का में स्थित अमेरिकी सप्लायर्स से नेटवर्किंग इक्विपमेंट्स खरीदने के लिए बातचीत की। बाद में इन सामानों को एक अमीराती कंपनी के जरिए ईरान भेजा गया। यानी जांच के मुताबिक यह केवल पुराना नेटवर्क नहीं था, बल्कि हाल के सालों तक सक्रिय रहा।

ईरान के न्यूक्लिर प्रोग्राम तक कैसे पहुंचा सामान?

इस मामले का सबसे गंभीर हिस्सा ईरान के न्यूक्लिर कार्यक्रम से जुड़ा है। DoJ का आरोप है कि 2017 से 2023 के बीच घोमी ने ईरान के न्यूक्लिर ऊर्जा संगठन (AEOI) को अमेरिकी मूल के कंप्यूटर नेटवर्किंग इक्विपमेंट्स उपलब्ध कराए। AEOI वही सरकारी संस्था है जो ईरान के न्यूक्लिर कार्यक्रम की देखरेख करती है। अमेरिका ने 2020 में इस संगठन पर यूरेनियम एनरिचमेंट और स्टोर से जुड़े विवादों के कारण प्रतिबंध लगाए थे।

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क्या मिले सबूत?

सबूत के तौर पर अधिकारियों ने 2017 के एक कॉन्ट्रैक्ट का हवाला दिया है, जो ईरान कंप्यूटर इंडस्ट्रीज के साथ साइन किया गया था। जांचकर्ताओं के मुताबिक उस दस्तावेज में अमेरिकी मूल के इक्विपमेंट्सों का अंतिम उपयोगकर्ता सीधे ईरान की डिफेंस मिनिस्ट्री को बताया गया था। यही दस्तावेज इस केस में सबसे अहम सबूतों में से एक माना जा रहा है। अब अगर घोमी दोषी साबित होता है तो उसे 20 साल तक की सजा हो सकती है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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