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Indore Water Case: एक्शन में सीएम, अपर आयुक्त तत्काल हटाए गए, HC ने कहा-'गंभीर लापरवाही'

Indore Contaminated Water Case: दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की। सरकार की रिपोर्ट में दावा किया गया कि गंदा पानी पीने की वजह से अब तक चार लोगों की मौत हुई है।

हालांकि, स्थानीय स्तर पर इससे कहीं अधिक मौतों के दावे सामने आ रहे हैं, जिस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।

Indore Contaminated Water Case

हाईकोर्ट ने जताई सख्ती

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी तलब की थी। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि पूरे मामले की गहन जांच की जाएगी और किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रशासन की जवाबदेही तय की जाएगी।

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सीएम मोहन यादव का सख्त एक्शन

इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस मामले में शो-कॉज नोटिस जारी करने, तत्काल अपर आयुक्त को इंदौर से हटाने और जल वितरण कार्य विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता को पद हटाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने नगर निगम में जरूरी पदों को तत्काल प्रभाव से भरने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो और जल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके।

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15 मौतों का दावा, पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया

वहीं, इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र से आ रही जानकारी सरकार के आंकड़ों से अलग है। स्थानीय पार्षद कमल वाघेला ने दावा किया है कि जहरीला पानी पीने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं और कई मरीजों का इलाज अभी भी अस्पतालों में चल रहा है।

पानी की जांच रिपोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दी है। शुरुआती जांच में सैंपलों में फीकल कॉलीफॉर्म, ई-कोलाई और क्लेसबेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये बैक्टीरिया उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इससे इलाके में स्वास्थ्य संकट की आशंका गहराती जा रही है।

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अगली सुनवाई 6 जनवरी को

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली तारीख पर प्रभावित इलाकों में अब तक की गई कार्रवाई, मरीजों की मौजूदा स्थिति और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए उठाए गए ठोस कदमों पर विस्तृत जवाब पेश करे। इस घटना के बाद प्रभावित इलाकों में लोगों में गहरा रोष और डर का माहौल है।

एक तरफ मौतों की संख्या को लेकर विरोधाभासी आंकड़े सामने आ रहे हैं, तो दूसरी ओर पानी में खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से स्थिति और चिंताजनक हो गई है। हाईकोर्ट की सख्ती और मुख्यमंत्री के एक्शन के बाद अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा।

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