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Indore Contaminated Water Deaths: क्या सीवर वॉटर बैक्टीरिया बनी मौत की वजह? इंदौर केस में चौंकाने वाली रिपोर्ट

Indore Contaminated Water Deaths: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भगिरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैली बीमारी ने भयावह रूप ले लिया है। अब तक की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि पीने के पानी के सैंपल में ऐसे बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो आमतौर पर सीवर के पानी और मानव अपशिष्ट में मिलते हैं।

इस मामले में अब तक कम से कम 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग उल्टी-दस्त के लक्षणों से पीड़ित हैं। यह खुलासा जांच से जुड़े अधिकारियों ने किया। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि, 2,400 से ज्यादा लोग इस पानी को पीने से बिमार हो गए।

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NHRC ने इस पूरे मामले में MP सरकार को नोटिस भेजा है।। यह जानकारी उस घटना के तीन दिन बाद सामने आई, जब पहले मरीजों को उल्टी और दस्त की गंभीर शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया था।

पानी की पाइपलाइन में सीवर लाइन से रिसाव की आशंका

अधिकारियों ने पहले ही संकेत दिए थे कि सीवर की पाइपलाइन से रिसकर गंदा पानी पीने की पानी की लाइन में मिल गया, जिससे यह संक्रमण फैला। गुरुवार को अधिकारियों ने बताया कि अभी और जांच रिपोर्ट्स आनी बाकी हैं, जिनके बाद यह स्पष्ट हो पाएगा कि कौन-सा विशिष्ट बैक्टीरिया इस त्रासदी की वजह बना। इस बीच, मौतों का आंकड़ा चार से बढ़कर नौ हो गया है। वहीं, कम से कम 150 मरीजों का इलाज अस्पतालों में जारी है।

मेडिकल कॉलेज की पुष्टि

इंदौर स्थित महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन ने कहा, प्रारंभिक रिपोर्ट में असामान्य बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जो आमतौर पर सीवर के पानी में पाए जाते हैं। हालांकि, अभी बैक्टीरिया की पहचान के लिए कल्चर रिपोर्ट का इंतजार है। प्रभावित मरीजों के स्टूल टेस्ट की रिपोर्ट भी आनी बाकी है, जिससे स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।

14 मौतों में से 9 की वजह डायरिया

जांच समिति के प्रमुख और अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि इलाके में कुल 14 मौतें हुई हैं, लेकिन जांच में यह सामने आया है कि 9 मौतें डायरिया और दूषित पानी से हुईं। बाकी मौतें पहले से मौजूद बीमारियों (को-मॉर्बिडिटी) और एक दुर्घटना की वजह से हुईं। 21 दिसंबर को हुई एक महिला की मौत को भी शुरू में दूषित पानी से जोड़ा गया था, लेकिन बाद में यह लिंक गलत पाया गया

अधिकारियों के अनुसार, भगिरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से बीमार पड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक 2,456 लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित पाए गए हैं। इनमें से 162 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है

मुख्यमंत्री और प्रशासन हरकत में

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। वहीं, जांच समिति प्रमुख संजय दुबे ने उस स्थान का निरीक्षण किया, जहां से दूषित पानी के सप्लाई लाइन में मिलने की आशंका है। उन्होंने कहा, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं। शहर के अन्य इलाकों में भी रैंडम वाटर सैंपलिंग कराई जाएगी। पेयजल से जुड़े मामलों को लंबित न रखा जाए और जनहित में तुरंत मंजूरी दी जाए।

पुराने पाइपलाइन सिस्टम पर उठे सवाल

अधिकारियों ने बताया कि इलाके में 30 साल पुरानी पाइपलाइन है, जिसमें लीकेज का पता लगाना मुश्किल होता है। इसी वजह से अधिकारियों की ड्यूटी में लापरवाही को लेकर भी जांच की जा रही है। इस गंभीर मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है।

आयोग ने इसे पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। NHRC ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें मौतों के कारण, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के उपाय शामिल हों।

प्रशासन के लिए बड़ी चेतावनी

इंदौर की यह घटना शहरी पेयजल व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है। दूषित पानी से हुई मौतों ने प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट के अंतिम निष्कर्ष और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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