Doctors strike: डॉक्टरों की हड़ताल से चरमराई अस्पताल सेवाएं, IMA ने पीएम मोदी से चाहा हस्तक्षेप

Docters Strike: बीते दिन शनिवार को पूरे भारत में आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) सेवाएं बाधित रहीं, डॉक्टरों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की 24 घंटे की हड़ताल में भाग लिया। यह विरोध प्रदर्शन 9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के कथित बलात्कार और हत्या के विरोध में था। इसके अलावा, हड़ताल ने 14 अगस्त को अस्पताल में हुई बर्बरता की निंदा की।

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के डॉक्टर हड़ताल में शामिल हुए। निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों में ओपीडी और वैकल्पिक सर्जरी बंद रहीं, केवल आपातकालीन सेवाएं ही चालू रहीं।

अपने विरोध के माध्यम से आईएमए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए एक केंद्रीय कानून बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने यह भी मांग की है कि अस्पतालों को अनिवार्य सुरक्षा उपायों के साथ सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए। कार्रवाई के लिए यह आह्वान देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शनों और कैंडल मार्च के बीच किया गया है।

कोलकाता पुलिस ने 18 अगस्त से सात दिनों के लिए आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आसपास सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस कदम का उद्देश्य चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखना है। देशभर में विरोध प्रदर्शन का व्यापक असर देखने को मिला। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने शनिवार को कैंडल मार्च निकाला।

उन्होंने पीड़िता के लिए न्याय और अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा देने की मांग की। ओडिशा में नर्सिंग कर्मचारी संघ के सदस्यों ने शहीद लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज में कैंडल मार्च निकाला। इस घटना के विरोध में नर्सों और डॉक्टरों ने इसमें हिस्सा लिया। वहीं पश्चिम बंगाल में रंगमंच कलाकारों ने शनिवार को आधी रात को मार्च निकालकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। वे अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर अपराध की निंदा करने में शामिल हुए। इसी प्रकार महाराष्ट्र और मंगलगिरी एम्स में भी इसी तरह के प्रदर्शन हुए।

जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने इन प्रदर्शनों के ज़रिए घटना पर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया।इन सबके बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक समिति बनाने की योजना की घोषणा की है जिसमें राज्य के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षा उपाय सुझाएगी। मंत्रालय ने डेंगू और मलेरिया के बढ़ते मामलों के कारण डॉक्टरों से अपनी ड्यूटी पर लौटने का भी आग्रह किया है। आईएमए स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान की समीक्षा कर रहा है, लेकिन उसे संदेह है। उन्होंने कहा कि अतीत में इसी तरह की समितियों से कोई खास प्रगति या कानून नहीं बन पाया है।

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