कोरोना की दूसरी लहर पहली के मुकाबले अधिक खतरनाक, लेकिन बेहतर डेथ रेट से राहत

नई दिल्ली। भारत में एक बार फिर कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से इजाफा देखने को मिल रहा है। पिछले 2 हफ्ते से देश में कोरोना के नए मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और आशंका जताई जा रही है कि अगले कुछ दिन तक भी कोरोना संक्रमण की संख्या में तेज उछाल जारी रह सकता है। एक्सपर्ट्स इसे कोरोना का दूसरी लहर मान रहे हैं। देश के एक दर्जन से अधिक राज्य कोरोना वायरस की दूसरी लहर का सामना कर रहे हैं। लेकिन राहत की बात यह है कि, संक्रमण दर भले ही तेजी से बढ़ी रही है, लेकिन मृत्युदर पिछले साल की तुलना में काफी कम है।

Indias 2nd coronavirus Wave is much stronger than 1st Wave but fatalities lower

भारत में मार्च 2021 में पिछले सात दिनों के कुल दैनिक मामलों का औसत 56,213 रहा है, जो सितंबर 2020 की तुलना में एक दिन में आए कुल मामले से 43 प्रतिशत कम है। पिछले साल सितंबर मे एक दिन में 97,860 तक कोरोना के नए मामले सामने आए थे। सोमवार को भारत में कोरोना के 68000 से अधिक मामले दर्ज किए गए जबकि मंगलवार को यह संख्या 60000 के नीचे ही बनी रही। यह पिछले साल अक्टूबर के बाद से सबसे बड़ा उछाल है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगले 10 दिनों में कोरोना के मामले पिछले साल के दैनिक मामलों की संख्या को पार कर जाएँगे।

अन्य देशों को तुलना भारत की स्थिति बदतर है। अमेरिका, फ्रांस और रूस जैसे देशों में जहां कोरोना के मामलों के संख्या पिछले साथ अधिक थी, लेकिन अभी वहां 65 फीसदी तक कम मामले सामने आ रहे हैं। केवल ब्राजील एक मात्र ऐसा देश है जिसकी स्थिति सबसे अधिक खराब है। वह पिछले साल की तुलना में 9 फीसदी से अधिक मामले रोज आ रहे हैं। अगर भारत की बात करें तो पांच राज्यों की स्थिति काफी खराब बनी हुई है।

भारत में इस समय सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र से आ रहे हैं। हालांकि अन्य राज्यों में पिछली साल की तुलना में कम मामले आ रहे हैं। महाराष्ट्र लगातार नए संक्रमण का हॉटस्पॉट बना हुआ है। यहां पिछले साल सितंबर की तुलना में दैनिक मामलों की संख्या 34 प्रतिशत अधिक है। लेकिन बाकी राज्यों जैसे केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पिछले साल की तुलना में दैनिक मामलों की संख्या कम है।

अगर केरल की बात करें तो पिछले सात दिनों के कुल मामलों का संख्या पिछले साल अक्टूबर में एक दिन में आए सर्वाधिक मामलों की कुल संख्या से 83 फीसदी कम है। यही स्थिति आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की है। जहां क्रमश: 93 और 78 फीसदी कम मामले आ रहे हैं। अगर देश में मृत्युदर की बात की जाए तो पिछले साल जून में एक दिन में 2004 मौतों के मुकाबले अभी देश में मृत्युदर 87 प्रतिशत कम तक कम है। इस मामले में हम अमेरिका, फ्रांस और रूस के मुकाबले में कुछ बेहतर स्थिति में हैं।

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