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भारत के स्‍वदेशी युद्ध विमान और मिसाइल पाकिस्‍तान के लिए काल, पलक झपकते ही कर देंगे तबाह

India-Pakistan Tensions: जम्‍मू-कश्‍मीर के पहलगाम में हमले के बाद भारत और पाकिस्‍तान के बीच टेंशन चरम पर है। भारत ने पाकिस्‍तान के खिलाफ आर्थिक मोर्चो पर ही नहीं सैन्‍य और कूटनीति स्‍तर पर घेराबंदी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए तीनों भारतीय सेनाओं को खुली छूट दे दी है। जिसके बाद पाकिस्‍तान को युद्ध का खौफ सता रहा है।

युद्ध के भय से पाकिस्‍तान ने लाइन ऑफ कंट्रोल पर सैन्‍य मौजूदगी बढ़ा दी है और भारत से मुकाबला करने की तैयारी कर रहा है, लेकिन सच्‍चाई ये है यदि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है तो भारत की तीनों सेनाओं के पास विदेशी ही नहीं ऐसे स्‍वदेशी हथियार और सिस्टम हैं जो पाकिस्‍तान के लिए काल साबित होंगे।

India-Pakistan Tensions

भारत तैयार कर रहा स्‍वदेशी युद्ध विमान और मिसाइल

बता दें SIPRI द्वारा मार्च 2019 में जारी रिपोर्ट के अनुसार 2014 से 2018 तक हथियार आयात के मामले में भारत सबसे बड़ा हथियार अयातक देश था लेकिन देश की सुरक्षा जरूरतों को मजबूत करने के लिए भारत ने 'मेक इन इंडिया' की पहल की और हथियारों और युद्ध विमानों का निर्माण शुरू कर दिया। पिछले कुछ वर्षो में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने कई स्‍वदेशी हथियार, मिसाइल और एडवांस तकनीकी विकसित की है।

तेजस विमान (Tejash Fighter Aircraft)

  • तेजस विमान एक मल्‍टी रोल सुपरसोनिक फाइटर एयरक्राफ्ट है। इसे DRDO (Defence Research and Development Organisation) और HAL ने मिलकर विकसित किया है। इसका Mk1 वर्जन भी भारतीय वायु सेना में सेवा में पहले ही शामिल हो चुका है।
  • लाइट कॉम्‍बैट एयरक्राट तेजस 4.5 पीढ़ी का मल्‍टीरोल एयरक्राफट है। जो ना केवल हवा से हवा में वार करने में सक्षम है बल्कि ये हवा में सतह पर भी हमला कर सकता है।
  • ये ऐसे डिजाइन किया गया है कि ये हवाई हमलों के समय सपार्ट दे सकता है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा तैयार किया तेजस इंडियन नेवी के विमान वाहक पोतों से उड़ान भरने में सक्षम है। तेजस में हवा से हवा में ईंधन भरने की क्षमता है।

तेजस MK1 (Tejas MK1)

इसके अलावा तेजस MK1 पहले ही आ चुका है। इसे भारतीय वायु सेना में जुलाई 2016 में शामिल किया जा चुका है।

तेजस MkII ((Tejas MkII))

इसके बाद तेजस MkII फाइटर जेट का पहला प्रोटोटाइप भी जल्‍द ही उड़ान भरेगा। MkII फाइटर जेट एडवांस 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है।

  • तेजस मार्क 2 की खासियत यह है कि इसमें नाइट विजन सक्षम कॉकपिट होगा। जिसकी सहायता से रात या अंधेरे में भी फाइटर जेट से दुश्‍मनों पर हमला किया जा सकेगा।
  • इसमें 'हैंड्स ऑन थ्रॉटल एंड स्टिक' (HOTAS) तकनीक है, जिससे पायलट विमान का नियंत्रण और हथियार संचालन एक ही स्थान से कर सकता है। उसमें ऐसे ऐसे उपकरण और बटन होंगे जिससे दुश्‍मनों पर हथियार भी चलेंगे। कॉकपिट में पायलट को अपने हाथों को इधर-उधर हिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये 2224 किमी की स्‍पीड से उड़ेगा।

अर्जुन टैंक (Arjun Tank)

DRDO ने तीसरी पीढ़ी का मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन भी विकसित किया है। मुख्य युद्धक टैंक (MBT) की 120 मिमी की राइफल्ड गन (Rifled Gun) विस्फोटक कवच-भेदी गोले फायर करने में सक्षम है। फायर कंट्रोल सिस्टम, नाइट विज़न, लेज़र रेंज फाइंडर, और ऑटोमैटिक टारगेट ट्रैकिंग इसकी खासियत है।

  • लगभग 58.5 टन के अर्जुन टैंक का 1400 hp डीजल इंजन है।
  • सड़क पर 70 किमी/घंटा और ऑफ-रोड 40 किमी/घंटा तक की गति से आगे बढ़ता है
  • अर्जुन टैक प्रारंभिक वर्जन अर्जुन MK1 हैं और अर्जुन MK1A (या MK2) इसका उन्‍नत वर्

आकाश मिसाइल (Akash Missile)

आकाश मिसाइल सतह से हवा (Surface-to-Air) वार करने वाली मिसाइल है। ये एक साथ कई खतरों पर निशाना साधने में सक्षम है।

अस्त्र मिसाइल (Astra missile)

DRDO द्वारा विकसित और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित की गई अस्त्र मिसाइल भारत की रक्षा तकनीक में एक बड़ी है। यह हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जो अंधेरे में भी लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। ये मिसाइल लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को निशाना बना सकती है।आकाश-एनजी (Akash-NG) इसका नया वर्जन है जिसकी इससे भी बेहतर रेंज और अन्‍य खासियत है।

  • इसके अलावा Su-30MKI विमान से लॉन्च किए जाने के लिए डिज़ाइन की गई, 4.5 मैक तक की गति से वार करने वाली अस्त्र मिसाइल है।
  • DRDO ने भारतीय नौसेना के लिए वरुणास्त्र, मारीच, उशुस और TAL सहित कई तकनीकें विकसित की हैं।
  • भारतीय नौसेना के लिए वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (वीएल-एसआरएसएएम)।

पहलगाम हमले के बाद DRDO ने स्ट्रैटोस्फेरिक एयरशिप का किया सफल परीक्षण

पहलाम हमले के बाद डीआरडीओ ने स्ट्रैटोस्फेरिक एयरशिप किया। आमतौर पर 20 से 25 किलोमीटर (65,000 से 82,000 फीट) की ऊंचाई पर जाने वाला हवा से भी हल्का वाहन है जिसे स्ट्रैटोस्फियर में संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है । ये एयरशिप पारंपरिक ब्लिंप या बैलून से अलग हैं क्योंकि वे अक्सर बिना चालक दल के कभी-कभी हफ्तों या महीनों तक सौर ऊर्जा से संचालित होता है और एक निश्चित क्षेत्र में लंबे समय तक मंडरा सकता है। निगारानी मौसम विज्ञान, संचार और रक्षा के उद्देश्‍यो में इसे इस्‍तेमाल में लाया जाएगा।

ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos missile)

हालांकि ये मिसाइल भारत ने रूस के साथ मिलकर बनाई है लेकिन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दुश्मन को तबाह करने के लिए काफी है।

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