बैंकॉक की एनएसए वार्ता भारत-पाक की ओर से खेला गया मास्टर स्ट्रोक
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए के बीच थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में हुई वार्ता को लेकर देश में हंगामा मचा हुआ है। पिछली बार अगस्त में दोनों देशों के बीच होने वाली इस वार्ता को अलगाववादियों को शामिल करने के मुद्दे की वजह से रद्द कर दिया गया था।

इसके बाद रविवार को जो वार्ता हुई है, उसे दोनों ही देशों की ओर से खेले गए एक मास्टर स्ट्रोक की तरह से देखा जा रहा है। बैंकॉक में आयोजित इस वार्ता से अलगाववादियों को अलग रखना इस वार्ता की सबसे बड़ी सफलता है।
अलगाववादी हमेशा से ही भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली किसी भी वार्ता में सबसे बड़ी बाधा के तौर पर साबित होते आए हैं। भारत ने हमेशा ही इस मुद्दे पर अपना रुख, पाक को साफ कर दिया था लेकिन पाक हर बार अपने अड़ियल रवैये की वजह से समस्या पैदा करता आया।
पिछली बार जो कुछ हुआ वह सभी को मालूम है। इस वार्ता को दोनों देशों की ओर से एक अच्छी शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है।
दोनों ही देशों के पास बातचीत के लिए काफी मुद्दे हैं। पाक ने इस बात की अहमियत को समझकर कहीं न कहीं एक सकारात्मक रास्ते की ओर कदम बढ़ाया है। पाक ने इस बात को महसूस किया कि अगर भारत से बात करनी है तो फिर अलगाववादियों का अलग रखना होगा।
जो लोग इस वार्ता को लेकर शोर मचा रहे हैं, उन्हें यह बात समझनी होगी कि भारत में अगर यह वार्ता आयोजित होती तो फिर से पाक की ओर से कश्मीर के अलगाववादियों को शामिल करने की जिद्द की जाने लगती।
अलगाववादी हमेशा से ही पाक की कश्मीर नीति का हिस्सा रहे हैं और ऐसे में उन्हें दूर रखना काफी मुश्किल है। ऐसे में एक अलग जगह पर इस मुलाकात को अंजाम देना शायद एक सफलता की ही तरह है।
बैंकॉक में दोनों देशों के एनएसए के बीच हुई मुलाकात उन लोगों की सोच को बदलने के लिए भी काफी है जो यह कहते हैं कि वर्तमान भारत सरकार की नीति पाक के साथ शांति स्थापित करने की नहीं है।
इस मुलाकात से साफ है कि दोनों ही देश मतभेदों को भुलाकर एक नई शुरुआत को बढ़ावा देना चाहते हैं। दोनों देशों की ओर से मुलाकात के दौरान कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दे का काफी ध्यान रखा गया।












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