Independence Day 2024 Special: खाद्यान संकट से निकल कर विश्व को खाद्य सुरक्षा देने की ओर बढ़ चला है भारत
78th independence day: कृषि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और यहां की विरासत का आधार है। आज भी भारत की लगभग आधी आबादी का जीवन यापन और आमदनी का जरिया मूल रूप से कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियां ही हैं।
आजादी के बाद से कृषि क्षेत्र में देश ने जो प्रगति की है, वह पूरी दुनिया के सामने एक नजीर है। स्वतंत्रता के वक्त यह देश खाद्यान संकट से जूझने वाला राष्ट्र था। आज हम खाद्यान आधिक्य (Food Surplus) राष्ट्र से भी आगे निकलकर खाद्यान निर्यातक (Food Exporter) राष्ट्र बन चुके हैं।

विश्व को खाद्य सुरक्षा देने की ओर बढ़ा भारत
कृषि क्षेत्र में भारत की ताकत का अंदाजा इसी से लगता है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, 'एक समय था जब भारत की खाद्य सुरक्षा दुनिया के लिए चिंता की वजह थी। अब भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा और वैश्विक पोषण सुरक्षा' का समाधान देने की दिशा में काम कर रहा है।' वे बोले,'कृषि भारत की आर्थिक नीतियों के केंद्र में है।'
खाद्यान ही नहीं, अन्य कृषि उत्पादों में मजबूत हो रही है भारत की पकड़
साल 2023-24 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबित बीते पांच वर्षों में देश के कृषि क्षेत्र के विकास की सालाना दर औसतन 4.18% रही है। आज देश दूध, दालों और जूट का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक है। वहीं चावल, गेहूं, गन्ना, मूंगफली, सब्जी, फल और कपास का भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। मसाले, मछली, पॉल्ट्री, पशुधन और बागानी फसलों के उत्पादन के मामले में भी देश बहुत ही तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है।
खाद्यान के मामले में अगर भारत आज दुनिया के अनेकों देशों के लिए खाद्य सुरक्षा की गारंटी बनकर उभरा है तो सभी तरह के तिलहनों की खेती में भी इसका तेजी से विस्तार हो रहा है। 2014-15 में देश में 25.60 मिलियन हेक्टेयर में तिलहनों की खेती हो रही थी, जो 2023-24 में 17.5% की बढ़ोतरी के साथ 30.08 मिलियन हेक्टर तक पहुंच चुकी है।
तथ्य यह है कि आज देश में जो कृषि क्षेत्र का विस्तार हुआ है, उसमें निजी क्षेत्र का भी बड़ा रोल है, जिनकी ओर से बढ़े निवेश की वजह से हम इस लायक बन रहे हैं कि दुनिया के लिए खाद्य सुरक्षा उपलब्ध करने की सोच के साथ काम कर रहे हैं।
329.7 मिलिटन टन तक पहुंच चुका है खाद्यान उत्पादन
देश में साल 2022-23 अनाजों का उत्पादन 329.7 मिलिटन टन तक पहुंच गया था, जो सर्वाधिक है। वहीं इस दौरान तिलहनों का उत्पादन 41.4 मिलियन टन रहा। साल 2023-24 में खाद्यान उत्पादन थोड़ा घटकर 328.8 मिलियन टन रहा, जिसकी प्राथमिक वजह खराब और देर से आया मानसून रहा।
खाद्य तेल में कम हो रही है विदेशों पर निर्भरता
आज भारत के पास खाद्यान की उपलब्धता खपत से कहीं ज्यादा है तो खाद्य तेलों के उत्पादन में भी हम तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। इसी का परिणाम है कि साल 2015-16 में देश में 86.30 लाख टन खाद्य तेल उपलब्ध थे, जो 2023-24 में बढ़कर 121.33 टन तक पहुंच चुका है।
नतीजा ये हुआ है कि साल 2015-16 में अगर देश खाद्य तेलों के लिए 63.2% विदेशी आयात पर निर्भर था तो साल 2022-23 में यह कम होकर 57.3% तक आ चुका था। यह स्थिति भी तब रही जब देश में खाद्य तेलों की मांग और खपत में लगातार बढ़ोतरी का पैटर्न देखा जा रहा है।
कृषि निर्यात में विश्व व्यापार संगठन ने भी माना भारत का लोहा
विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने भारत की इस बात को लेकर तारीफ की थी कि 2023 में भारत का कृषि निर्यात 2022 के 55 बिलियन डॉलर से गिरकर 51 बिलियन डॉलर रहा, लेकिन फिर भी यह दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पाद निर्यातक देशों में अपना आठवां स्थान बनाए रखने में सफल रहा। देश की यह स्थिति तब रही है, जब शीर्ष 10 निर्यातक देशों में सात की हालत डंवाडोल हो गई।
यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि अगर भारत के कृषि उत्पादों के निर्यात में कमी दर्ज की गई है तो उसकी वजह लाल सागर संकट और रूस-यूक्रेन में जारी जंग है, जिसके चलते देश को चावल, गेहूं, चीनी और प्याज के निर्यात में कमी लानी पड़ी है।
कृषि क्षेत्र में आजादी के बाद कितना बड़ा बदलाव आया?
साल 2024-25 के आम बजट में केंद्र सरकार ने कृषि और संबंधित क्षेत्र के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया है। यह वही देश है, जहां आजादी से ठीक पहले बंगाल ने ऐसा अकाल देखा था, जिसमें 20 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
यह तब था, जब देश की जनसंख्या मात्र 30 करोड़ थी, फिर भी सबको खाने के लिए अनाज उपलब्ध नहीं थे। लेकिन, आज हम न सिर्फ वैश्विक खाद्य सुरक्षा की बात कर रहे हैं, बल्कि पोषण सुरक्षा देने की दिशा में भी काम कर रहे हैं और उसपर अमल भी शुरू किया जा चुका है।
देश में आज सभी प्रमुख फसलों के लिए सरकार कम से कम लागत से 50% मार्जिन से अधिक का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दे रही है। तो दूसरी तरफ 80 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को मुफ्त में अनाज भी उपलब्ध करवा रही है।
सरकार खेती और बागवानी फसलों की ऐसी 109 नई उच्च उपज वाली और जलवायु अनुकूल किस्में किसानों को उपलब्ध करवाने जा रही है, जिससे देश में कृषि की दिशा और दशा बदलने की उम्मीद है।
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