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Independence Day 2024 Special: रक्षा क्षेत्र में किस तरह से तेजी से आगे बढ़ रहा है भारत

Defence Sector growth in India: साल 2024-25 के बजट में केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्रालय के लिए 6,21,941 करोड़ रुपए का आवंटन किया है। यह सभी मंत्रालयों के बजट आवंटन से ज्यादा है। केंद्र सरकार मौजूदा वित्त वर्ष में जो कुल खर्च करने जा रही है, यह उसका 13% है। रक्षा बजट में निरंतर बढ़ोतरी का ही परिणाम है कि भारत अब दुनिया में डिफेंस के पावरहाउस बनने की ओर अग्रसर है।

भारत में इस साल डिफेंस सेक्टर के लिए जितना बजट दिया गया है, वह 2012-13 के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा है। वहीं 1951-52 में रक्षा क्षेत्र का कुल बजट अनुमान मात्र 375.43 करोड़ रुपए का था। लगातार बढ़ते बजट और 'मेक इन इंडिया' की वजह से ही भारत आज रक्षा क्षेत्र में दुनिया का ध्यान खींचने में सफल हुआ है। इसमें निजी क्षेत्र का भी जबर्दस्त योगदान मिल रहा है।

defence sector in india

2028-29 तक 50,000 करोड़ रुपए के रक्षा निर्यात का लक्ष्य
23 जुलाई, 2024 को इस साल का आम बजट पेश हुआ है। इससे पहले जून में ही केंद्र सरकार ने साल 2028-29 तक देश का सालाना रक्षा निर्यात दोगुना से भी अधिक करते हुए 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का संकल्प लिया था, जो अभी 21,083 करोड़ रुपए है। इस संकल्प के पीछे एक ठोस आधार काम कर रहा है।

सालाना 20-30% की दर से बढ़ रहा है रक्षा निर्यात
पिछले कुछ वर्षों में भारत के रक्षा निर्यात में 20-30% सालाना वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसमें निजी क्षेत्र का बहुत बड़ा रोल है और रक्षा निर्यात में उसकी हिस्सेदारी काफी ज्यादा है।

रक्षा उत्पादन में अगले पांच साल में तीन गुना बढ़ोतरी का लक्ष्य
मोदी सरकार का लक्ष्य साल 2028-29 तक सालाना रक्षा उत्पादन करीब तीन गुना करने का लक्ष्य है। 2024-25 में कुल रक्षा उत्पादन का लक्ष्य 1,75,000 करोड़ रुपए का है, जिसमें 35,000 करोड़ रुपए का रक्षा निर्यात भी शामिल है।

तेजी से हो रहा है रक्षा उत्पादों का स्वदेशीकरण
कुछ महीने पहले रक्षा उत्पादन विभाग के निदेशक (डीआईपी) अमित सतीजा ने कहा था कि भारत ने अब तक 4,666 सूचीबद्ध वस्तुओं में से 2,920 रक्षा वस्तुओं का स्वदेशीकरण कर लिया है। मतलब, यह भारत में ही और भारत की जरूरत के हिसाब से ही बनाए जा रहे हैं।

एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी का कहना है कि भारतीय वायुसेना पिछले दो से तीन साल में ही 60,000 से ज्यादा कंपोनेंट्स का स्वदेशीकरण कर चुकी है।

रक्षा व्यय में भारत दुनिया के शीर्ष चार देशों में शामिल
रक्षा क्षेत्र में खर्च के नजरिए से देखें तो दुनिया में भारत आज 83.6 बिलियन डॉलर रक्षा व्यय (स्रोत: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) के साथ अमेरिका, चीन और रूस के बाद चौथे स्थान पर खड़ा है। भारत के बाद सऊदी अरब, यूके और जर्मनी जैसे देश आते है। फ्रांस और जापान तो और भी पीछे हैं। 2009 में भारत नौवें पायदान पर था।

रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक सोच के साथ भारत का बढ़ता जा रहा है दबदबा
रक्षा क्षेत्र के कुछ जानकारों का अनुमान है कि मौजूदा रक्षा नीतियों को देखते हुए कहा जा सकता है कि साल 2029-30 तक रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत व्यय कुल बजट के 37% तक ले जाने का लक्ष्य है। यह रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण के साथ प्रगति की दिशा में सरकार की रणनीतिक प्रतिबद्धता भी जाहिर करता है।

भारत में ही होगा सभी तरह के गोला-बारूद का उत्पादन
रक्षा क्षेत्र में भारत के बुलंद इरादे का ही नतीजा है कि अगले वित्तीय वर्ष से हम अपने सभी गोला-बारूद का घरेलू स्तर पर उत्पादन करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

रक्षा क्षेत्र के लिए हाल में हुई कुछ बड़ी डील
भारत सरकार का रक्षा क्षेत्र के विकास पर जोर का अंदाजा हाल में डिफेंस सेक्टर के लिए हुए कुछ डील से लगाया जा सकता है। सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए 802 करोड़ रुपए की डील की गई है। भारतीय कोस्ट गार्ड के लिए 14 फास्ट पेट्रोल वेसल के लिए मझगांव डॉक के साथ 1,070 करोड़ रुपए का करार हुआ है।

मेक इन इंडिया के तहत 39,125 करोड़ रुपए की 5 बड़ी खरीदारी की डील हुई है। इनके अलावा रक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने भारतीय सशस्त्र सेना की ताकत बढ़ाने के लिए 92,000 करोड़ रुपए के बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी दी है।

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