केसरिया साफा पहनकर PM ने लाल किले से लगाई पाकिस्तान को फटकार,नए लुक से दिया कड़ा संदेश
Independence day 2025: आज पूरा भारत 79वां स्वतंत्रता दिवस समारोह मना रहा है, चारों ओर खुशी और उल्लास देखा जा सकता है। पीएम मोदी ने शुक्रवार को 12वीं बार लाल किले के प्राचीर से झंडा फहराया और देश को संबोधित किया। हर बार की तरह इस बार भी पीएम मोदी का लुक काफी अलग था, वो इस बार केसरिया साफे में नजर आए। उन्होंने सफेद कुर्ते के साथ नारंगी रंग की नेहरू जैकेट भी पहनी और साथ ही गमछा भी लिया, जिसके पीछे एक खास अर्थ है।
पंडितों के मुताबिक केसरिया रंग को त्याग, वीरता, आत्मबल, और उन्नति का प्रतीक माना जाता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र में यह रंग सूर्य और अग्नि से जुड़ा हुआ है जो कि तेजी और वीरता का मानक है।

PM ने नए लुक से दिया कड़ा संदेश (Independence day 2025)
पीएम मोदी ने केसरिया साफा पहनकर विश्व को बताने की कोशिश की आज का भारत आत्मबल वाला है और दुश्मनों को उसकी भाषा में जवाब देना जानता है। तो वहीं सफेद का अर्थ शांति से है, पीएम मोदी ये ही कहते हैं कि 'भारत शांति से अपना काम करता है लेकिन अब वो छेड़ने पर चुप नहीं बैठता बल्कि तगड़ा जवाब देता है' तो वहीं पारंपरिक गमछे को उनके स्वदेशी चीजों को बढ़ावा देने से जोड़ा जा रहा है।

आपको बता दें कि 15 अगस्त पर हमेशा से उनका लुक आकर्षण का केंद्र रहा है। पीएम मोदी ने लगातार 12वीं बार लालकिले के प्राचीर से देश को संबोधित किया है।
साल 2014 से लेकर 2025 तक, उनके साफे के अंदाज में हर साल बदलाव आया है (Independence day 2025)
- 2014: पीएम मोदी ने सफेद खादी का कुर्ता और जोधपुरी बंधेज वाला साफा बांधा था।
- 2015: क्रीम रंग के कुर्ते, सफेद चूड़ीदार पजामे और बंधानी साफा पहना था।
- 2016: मोदी ने सादे कुर्ते के साथ राजस्थानी साफा पहना था।
- 2017: पीएम मोदी लाल -पीले रंग का साफा पहना था।
- 2018: उन्होंने केसरिया और लाल रंग का साफा पहना था।
- 2019: पीएम मोदी ने लहरिया साफा बांधा था।
- 2020: भगवा और क्रीम रंग का साफा पहना था।
- 2021: भगवा साफा कु्र्ते के साथ।
- 2022: तिरंगे की आकृति वाला सफेद साफा।
- 2023: पीले और लाल रंग का साफा।
- 2024: हरे और पीले रंग का साफा।
PM मोदी ने पाकिस्तान को लगाई फटकार, जानिए क्या कहा?
पीएम मोदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का ज़िक्र करते हुए साफ़ कहा कि 'खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते। सिंधु जल समझौता अब राष्ट्रहित में मंज़ूर नहीं है और भारत अब न्यूक्लियर अटैक की धमकी से नहीं डरता है।












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