Independence Day 2024: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल में हैं, कौन फहरा सकता है तिरंगा, क्यों हो रहा है विवाद
Independence Day 2024 Delhi: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले के आरोपों में तिहाड़ जेल में बंद हैं। ऐसे में इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर है कि उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली सरकार के मुख्य कार्यक्रम में तिरंगा कौन फहराएगा या यह अधिकार किसे मिलना चाहिए?
अपने देश में एक परंपरा विकसित हुई है कि स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के मुख्य कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री लालकिले पर झंडोतोलन करते हैं और राज्यों में मुख्यमंत्री मुख्य सरकारी समारोह में झंडा फहराकर परेड की सलामी लेते हैं। लेकिन, पहली बार दिल्ली में बहुत ही विकट परिस्थिति पैदा हुई है।

केजरीवाल चाहते हैं मंत्री आतिशी फहराएं तिरंगा- आम आदमी पार्टी
वैसे बुधवार को दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की ओर से दावा किया गया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें कहा गया है कि उनकी जगह कैबिनेट मंत्री आतिशी दिल्ली सरकार के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में झंडा फहराएंगी।
हालांकि, बुधवार को राज निवास के अधिकारियों ने सीएम की इस तरफ से इस तरह की कोई चिट्ठी मिलने से इनकार किया। राज निवास के अधिकारी ने बताया,'15 अगस्त को झंडोतोलन के सिलसिले में विभिन्न जगहों पर किए गए दावों को लेकर, यह स्पष्ट किया जाता है कि उपराज्यपाल सचिवालय के साथ इस प्रकार का कोई संवाद नहीं हुआ है।'
भाजपा का दावा- सिर्फ मुख्यमंत्री ही कर सकते हैं झंडोतोलन
दिल्ली के सीएम की कथित चिट्ठी को लेकर दिल्ली में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का दावा है कि राष्ट्रीय झंडा प्रोटोकॉल के तहत सिर्फ मुख्यमंत्री ही ध्वजारोहण कर सकते हैं।
सीएम नहीं तो उपराज्यपाल फहराएंगे तिरंगा- दिल्ली बीजेपी
उनका कहना है कि 'यदि केजरीवाल चाहते हैं कि उनकी मंत्री आतिशी झंडा फहराएं तो उन्हें उनपर विश्वास करके इस्तीफा दे देना चाहिए, ताकि वह मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकें।' सचदेवा का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री झंडा नहीं फहरा सकेंगे तो उपराज्यपाल फहराएंगे। इसके पीछे उनका तर्क है कि '1991 से लेकर 1993 तक और 2014 में जब दिल्ली में कोई सीएम नहीं था तो लेफ्टिनेंट गवर्नर ने झंडा फहराया था।'
उन्होंने यह भी तंज कसा है कि 'संविधान निर्माताओं ने शायद कभी नहीं सोचा होगा या राष्ट्रध्वज प्रोटोकॉल तैयार करते वक्त किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि एक दिन ऐसा आएगा कि एक जिद्दी मुख्यमंत्री जेल जाने के बाद भी इस्तीफा नहीं देंगे।'
झंडा फहराने के लिए किसी को नहीं मनोनीत कर सकते सीएम- बीजेपी सांसद
जहां तक केजरीवाल की इच्छा का सवाल है तो दक्षिणी दिल्ली से बीजेपी सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी का कहना है कि सीएम अपनी जगह किसी मंत्री को झंडा फहराने के लिए मनोनीत नहीं कर सकते। उनका दावा है, 'दिल्ली में न तो ऐसी कोई परंपरा है, न ही नियम या कोई उदाहरण ही है। अगर आतिशी झंडा फहराना चाहती हैं तो वह पार्टी ऑफिस या कहीं भी कार्यक्रम आयोजित करके ऐसा कर सकती हैं।'
कांग्रेस ने भी कसा केजरीवाल पर तंज
वहीं आम आदमी पार्टी की ओर से चिट्ठी के दावे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने यह कहकर हैरानी जताई है कि सीएम केजरीवाल को यह चिंता तो है कि उनकी गैर-मौजूदगी में राष्ट्रध्वज कौन फहराएगा, 'लेकिन जलभराव, ट्रैफिक जाम, पानी की किल्लत या पानी से फैलने वाली बीमारियों की कोई चिंता नहीं है।'
दिल्ली के गृहमंत्री होने के नाते कैलाश गहलोत को मिल सकता है मौका?
आमतौर प्रोटोकॉल के तहत मुख्यमंत्री के बाद गृहमंत्री का दर्जा आता है। इस हिसाब से यह जिम्मेदारी कैलाश गहलोत को मिल सकती है, जो कि दिल्ली के गृहमंत्री हैं। ऐसे में यह देखना है कि अगर उपराज्यपाल के पास सीएम की कोई चिट्ठी पहुंचती है तो वह क्या निर्णय लेते हैं।
करुणानिधि ने दिलाया मुख्यमंत्रियों को झंडा फहराने का अधिकार!
बता दें कि देश में 1973 तक राज्यों में यही व्यवस्था थी कि प्रदेश के राज्यपाल ही गणतंत्र दिवस की तरह ही स्वतंत्रता दिवस पर भी राज्य स्तर पर मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रध्वज फहराया करते थे। इसको लेकर तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने केंद्र सरकार को लगातार चिट्ठियां लिखीं और 15 अगस्त को झंडा फहराने का अधिकार मुख्यमंत्रियों को देने की गुजारिश की।
आखिरकार 1974 में केंद्र सरकार ने करुणानिधि के आग्रह को स्वीकार कर लिया और उसी साल से 15 अगस्त को राज्य की राजधानियों में मुख्यमंत्रियों को मुख्य सरकारी कार्यक्रमों में तिरंगा फहराने की अनुमति मिल गई।












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