डॉन दाऊद का भी खास है बाहुबली शहाबुद्दीन, 2001 में की थी मुलाकात
पटना (मुकुन्द सिंह)। राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सांसद बाहूबली शाहबुद्दीन जहां राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के लिए खास है। जिसका नमूना उन्होंने जेल में रहते हुए भी राजद कार्यकारिणी में सदस्य बनाकर पेश किया है वही वर्ष 2003 में पुलिस मुख्यालय द्वारा सरकार को सौंपी गई एक रिपोर्ट मे यह खुलासा किया गया है कि शहाबुद्दीन ने दाऊद इब्राहिम से वर्ष 2001 में मक्का में मुलाकात किया था। खूंखार डॉन मोहम्मद शहाबुद्दीन की जन्म से जेल तक की पूरी दास्तान

आपको बताते चलें की कई अपराधिक मामलों के आरोप में जेल में कैद राजद के बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन से जुड़ी हुई कई संवेदनशील फाइल इकट्ठा किया गया था। लेकिन अचानक से एक फाइल गायब हो गई। आईबी और स्पेशल ब्रांच की टीम इसे फिर से खोजने की प्रयास में लगी हुई है। सूत्रों की मानें तो इस सिलसिले में पिछले दिनों आईबी और स्पेशल ब्रांच के कई अधिकारी तत्कालीन डीपी ओझा से मिलकर गायब हुए फाइल के बारे में जानकारी हासिल की। खुलासा: भारत के कई नेताओं से रोज फोन पर बातचीत करता है डॉन दाऊद इब्राहिम
उल्लेखनीय है कि पूर्व महानिदेशक डीपी ओझा के कार्यकाल में ही पुलिस मुख्यालय ने यह रिपोर्ट सरकार को पेश की थी। जिसके बाद पूर्व महानिदेशक ने राज्य सरकार को यह सलाह दी थी कि इस अत्यंत संवेदनशील मामले में केंद्र सरकार की भी मदद लें। वही पुलिस मुख्यालय द्वारा इस रिपोर्ट को पेश करना और राज्य सरकार को सलाह देना बिहार के पूर्व महानिदेशक डीपी ओझा को काफी महंगा पड़ा और उन्हें अपने पद से भी हाथ धोना पड़ा था। मुंबई पुलिस के कुछ लोग करते हैं दाऊद के लिए काम
जिसका खुलासा उन्होंने एक कार्यक्रम में पूछे गए प्रश्न में किया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि शहाबुद्दीन के खिलाफ की गई कार्रवाई की वजह से उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ा है। हलांकि उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में यह अपील करना चाहते हैं कि शहाबुद्दीन को दिल्ली के तिहाड़ जेल में शिफ्ट कर मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। डॉन दाऊद का दावा, मुंह खोला तो नप जायेंगे भारत के कई क्रिकेटर और बिजनेसमेन
वहीं अपने पद से हाथ धोने के बाद डीपी ओझा ने सरकार से यह मांग की थी कि शहाबुद्दीन के खिलाफ एकत्रित किया गया इस दस्तावेज को सार्वजनिक किया जाए। लेकिन उनकी मांगों को सरकार के द्वारा अनदेखा कर दिया गया। आपको बताते चलें कि यह रिपोर्ट जब पेश किया गया था तब बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थी लेकिन राबड़ी देवी के बाद जब नीतीश की सरकार बनी तभी इस फाइल को अनदेखा कर दिया गया।












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