Ranveer Singh ने आखिर क्या कर दी गलती? मां चामुंडेश्वरी के दरबार में माफी मांगने पहुंचे
Ranveer Singh Visits Chamundeshwari Temple: बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह कर्नाटक के मैसूर में स्थित प्रसिद्ध चामुंडेश्वरी देवी के मंदिर में पहुंचे। यहां पर एक्टर ने वीआईपी दर्शन करने के बजाय, साधारण भक्तों की लाइन में लगे और लंबे समय तक लाइन में इंतजार करने के बाद चामुंडेश्वरी देवी के दर्शन किए और हाथ जोड़ कर माफी मांगी। जिसकी सोशल मीडिया पर फोटो सामने आई है। जानते है रणवीर सिंह ने आखिर ऐसा क्या किया जिसकी वजह से उन्हें चामुंडेश्वरी देवी के दरबार में जाकर माफी मांगनी पड़ी?
दरअसल, कथित "कांतारा मिमिक्री केस" से जुड़े विवाद में कर्नाटक हाई कोर्ट के निर्देश पर मैसूर स्थित मां चामुंडेश्वरी मंदिर पहुंचे। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने बिना किसी तामझाम के आम श्रद्धालु की तरह मंदिर में दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना कर क्षमा याचना की।

Ranveer Singh ने हाथ जोड़कर मांगी माफी
रणवीर मंदिर में प्रवेश से पहले मास्क उतारकर भक्तों की कतार में खड़े होकर दर्शन करते दिखे। तस्वीरों में वे सिर झुकाए, हाथ जोड़े खड़े थे। सफेद कुर्ता-पायजामा, काले नेहरू जैकेट, फूलों की माला व माथे पर तिलक से सजे थे। महंत के साथ उनकी तस्वीर भी दिखी। उन्होंने मुख्य देवी प्रतिमा और उत्सव मूर्ति दोनों के सामने प्रार्थना की। पूजा के बाद रणवीर बिना प्रचार के चुपचाप वहाँ से रवाना हो गए।
Ranveer Singh ने आखिर क्या कर दी गलती?
यह विवाद गोवा में आयोजित 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दौरान अभिनेता द्वारा फिल्म "कांतारा" के 'कांतारा: चैप्टर 1' में एक्टर ऋषभ शेट्टी के किरदार की मिमिक्री करने पर एफआईआर दर्ज हुई थी। उन्होंने चामुंडेश्वरी देवी को 'महिला भूत' कहकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी, जिससे विवाद खड़ा हुआ।
कोर्ट ने रणवीर सिंह को क्या दिया था आदेश?
इस पर आपत्ति के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां एक्टर ने बिना शर्त माफी का हलफनामा दाखिल किया। अदालत ने उनकी माफी स्वीकार करते हुए मामले का निपटारा किया और उन्हें चार सप्ताह के भीतर मैसूर कचामुंडेश्वरी मंदिर जाकर दर्शन करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश के पालन में वे मंदिर पहुंचे।
चामुंडेश्वरी देवी मंदिर की खासियत क्या है?
कर्नाटक के मैसूर शहर के पास स्थित चामुंडी हिल्स पर बना चामुंडेश्वरी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यह मंदिर देवी दुर्गा के उग्र रूप चामुंडेश्वरी को समर्पित है और धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तीनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण है।
क्या है पौराणिक मान्यता?
मान्यता है कि इसी स्थान पर देवी चामुंडेश्वरी ने राक्षस महिषासुर का वध किया था, इसलिए इसे "महिषासुर मर्दिनी" का पवित्र स्थल माना जाता है। यह स्थान शक्ति उपासना के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से मैसूर शहर का शानदार दृश्य दिखाई देता है
चामुंडेश्वरी देवी मंदिर 18 प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है
यह मंदिर 18 प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। भक्तों के अनुसार यह स्थान देवी शक्ति की अत्यंत शक्तिशाली उपस्थिति का प्रतीक है, जहां सदियों से पूजा-अर्चना होती आ रही है।
क्या है इसका ऐतिहासिक महत्व?
माना जाता है कि मंदिर का मूल ढांचा 12वीं शताब्दी में होयसला राजाओं द्वारा बनाया गया था, जबकि बाद में विजयनगर और वोडेयार शासकों ने इसका विस्तार कराया। यह मंदिर लंबे समय से मैसूर राजघराने की कुलदेवी का प्रमुख स्थान रहा है।
1000 सीढ़ियों का रास्ता
मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 1000 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। रास्ते में विशाल नंदी की प्रतिमा भी स्थित है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण है।
नवरात्रि और दशहरा उत्सव में जुटती है भक्तों की भीड़
यह मंदिर नवरात्रि और मैसूर दशहरा के समय विशेष रूप से सजता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और देवी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।
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