खूंखार डॉन मोहम्मद शहाबुद्दीन की जन्म से जेल तक की पूरी दास्तान
नयी दिल्ली। मोहम्मद शहाबुद्दीन जिन्हें सिवान की जनता 'साहब' के नाम से जानती है, उनके दबंग वज़ूद से लोग चुप रहना ही मुनासिब समझते हैं। सीवान जेल में छापेमारी के दौरान फरियादियों की कतार देखकर तो यही लगा कि आज भी लोगों को शहाबुद्दीन के दरबार पर ही भरोसा है। सिवान के पूर्व सांसद व राजद नेता शहाबुद्दीन भले ही सलाखों के पीछे बंद हैं लेकिन उनका दरबार आज भी प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। छापेमारी के क्रम में जेल में मौजूद पुलिस ने वहां पूर्व सांसद शहाबुद्दीन से मिलने आए 50 लोगों को मिलने से रोक दिया गया। इनमें पूर्व नगर सभापति कृष्णा देवी शामिल हैं। शहाबुद्दीन पर फिदा है RJD परिवार, पत्नी को MLC बनाने की तैयारी

ज्ञात हो कि सीवान कारागार में बुधवार और रविवार को शहाबुद्दीन से मिलने वालों की भारी भीड़ लगती है। शहाबुद्दीन, जिन्होंने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और इस सूबे की सियासत को बदल कर रख दिया। बिहार में ऐसे कई नाम हैं लेकिन यह नाम ऐसा है जो सीवान से निकलकर पूरे बिहार में छा गया।
मोहम्मद शहाबुद्दीन का जन्म 10 मई 1967 को सीवान जिले के प्रतापपुर में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा दीक्षा बिहार से ही पूरी की थी। राजनीति में एमए और पीएचडी करने वाले शहाबुद्दीन ने हिना शहाब से शादी की थी। जेल में शहाबुद्दीन की वो फोटो तो नहीं बनी पत्रकार राजदेव की हत्या का कारण!
उनका एक बेटा और दो बेटी हैं। शहाबुद्दीन ने कॉलेज से ही अपराध और राजनीति की दुनिया में कदम रखा था। किसी फिल्मी किरदार से दिखने वाले मोहम्मद शहाबुद्दीन की कहानी भी फिल्मी सी लगती है। उन्होंने कुछ ही वर्षों में अपराध और राजनीति में काफी नाम कमाया।
1986 में उनके खिलाफ पहला आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद उनके नाम एक के बाद एक कई मुकदमे लिखे गए। छोटी उम्र में ही अपराध की दुनिया में शहाबुद्दीन जाना माना नाम बन गया। राजनीतिक गलियारों में शहाबुद्दीन का नाम उस वक्त चर्चाओं में आया जब शहाबुद्दीन ने लालू प्रसाद यादव की छत्रछाया में जनता दल की युवा इकाई में कदम रखा।
शहाबुद्दीन की इजाजत के बिना पत्ता भी नहीं हिलता
राजनीति में सितारे बुलंद थे। पार्टी में आते ही शहाबुद्दीन को अपनी ताकत और दबंगई का फायदा मिला। पार्टी ने 1990 में विधान सभा का टिकट दिया। शहाबुद्दीन जीत गए। उसके बाद फिर से 1995 में चुनाव जीता। इस दौरान कद और बढ़ गया। ताकत को देखते हुए पार्टी ने 1996 में उन्हें लोकसभा का टिकट दिया और शहाबुद्दीन की जीत हुई।
1997 में राष्ट्रीय जनता दल के गठन और लालू प्रसाद यादव की सरकार बन जाने से शहाबुद्दीन की ताकत बहुत बढ़ गई थी। शहाबुद्दीन का आतंक इस कदर था कि किसी ने भी उस दौर में उनके खिलाफ किसी भी मामले में गवाही देने की हिम्मत नहीं की। सीवान जिले को वह अपनी जागीर समझते थे। जहां उनकी इजाजत के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था।

ताकत के नशे में चूर मोहम्मद शहाबुद्दीन इतना अभिमानी हो गए थे कि वह पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को कुछ नहीं समझते थे। आए दिन अधिकारियों से मारपीट करना उनका शगल बन गया था। यहां तक कि वह पुलिस वालों पर गोली चला देते थे। मार्च 2001 में जब पुलिस राजद के स्थानीय अध्यक्ष मनोज कुमार पप्पू के खिलाफ एक वारंट तामील करने पहुंची थी तो शहाबुद्दीन ने गिरफ्तारी करने आए अधिकारी संजीव कुमार को थप्पड़ मार दिया था। और उनके आदमियों ने पुलिस वालों की पिटाई की थी।
शहाबुद्दीन की थी अपनी अदालत
कार्रवाई के दौरान दो पुलिसकर्मियों समेत 10 लोग मारे गए थे। पुलिस के वाहनों में आग लगा दी गई थी। मौके से पुलिस को 3 एके-47 भी बरामद हुई थी। शहाबुद्दीन और उसके साथी मौके से भाग निकले थे। इस घटना के बाद शहाबुद्दीन पर कई मुकदमे दर्ज किए गए थे। 2000 के दशक तक सीवान जिले में शहाबुद्दीन एक समानांतर सरकार चला रहे थे। उनकी एक अपनी अदालत थी। जहां लोगों के फैसले हुआ करते थे। वह खुद सीवान की जनता के पारिवारिक विवादों और भूमि विवादों का निपटारा करते थे। यहां तक के जिले के डॉक्टरों की परामर्श फीस भी वही तय किया करते थे।
कई घरों के वैवाहिक विवाद भी वह अपने तरीके से निपटाते थे। वर्ष 2004 में लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई जगह खास ऑपरेशन किए थे। जो मीडिया की सुर्खियां बन गए थे। 1999 में एक सीपीआई (एमएल) कार्यकर्ता के अपहरण और संदिग्ध हत्या के मामले में शहाबुद्दीन को लोकसभा 2004 के चुनाव से आठ माह पहले गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन चुनाव आते ही शहाबुद्दीन ने मेडीकल के आधार पर अस्पताल में शिफ्ट होने का इंतजाम कर लिया।
अस्पताल का एक पूरा फ्लोर उनके लिए रखा गया था। जहां वह लोगों से मिलते थे, बैठकें करते थे। साल 2004 के चुनाव के बाद से शहाबुद्दीन का बुरा वक्त शुरू हो गया था। इस दौरान शहाबुद्दीन के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। राजनीतिक रंजिश भी बढ़ रही थी। नवंबर 2005 में बिहार पुलिस की एक विशेष टीम ने दिल्ली में शहाबुद्दीन को उस वक्त दोबारा गिरफ्तार कर लिया था

जब वह संसद सत्र में भागेदारी करने के लिए यहां आए हुए थे। दरअसल उससे पहले ही सीवान के प्रतापपुर में एक पुलिस छापे के दौरान उनके पैतृक घर से कई अवैध आधुनिक हथियार, सेना के नाइट विजन डिवाइस और पाकिस्तानी शस्त्र फैक्ट्रियों में बने हथियार बरामद हुए थे।
हत्या, अपहरण, बमबारी, अवैध हथियार रखने और जबरन वसूली करने के दर्जनों मामले शहाबुद्दीन पर हैं। अदालत ने शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। शहाबुद्दीन के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। उस वक्त लोकसभा चुनाव में शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ने पर्चा भरा था। लेकिन वह चुनाव हार गई। उसके बाद से ही राजद का यह बाहुबली नेता सीवान के मंडल कारागार में बंद है। भले ही शहाबुद्दीन जेल में हों लेकिन उनका रूतबा आज भी सीवान में कायम है।
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