कैसे कर्नाटक में मुफ्त बिजली, फ्री बस यात्रा की शर्तों ने बहुतों को दिया जोर का झटका? जानिए
कर्नाटक सरकार ने जिन मुफ्त वाली योजनाओं को लागू करने की घोषणा की है या उसपर अमल कर रही है, कई लोग उसका लाभ लेने से वंचित रह सकते हैं। इसकी वजह है इससे जुड़े नियम और शर्तें।
कर्नाटक सरकार की ओर से हर घर को 200 यूनिट फ्री बिजली और महिलाओं को निशुल्क बस यात्रा वाली योजनाओं ने बहुत सारे लोगों को मुफ्त का झटका दिया है। क्योंकि, इन योजनाओं के पीछे कुछ ऐसी शर्तें लगाई गई हैं, जिससे बहुत सारे लोगों को मायूस होना पड़ रहा है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने ऐलान किया है कि उसके गृह ज्योति स्कीम के दायरे में सिर्फ मकान मालिक ही नहीं, बल्कि किराए पर रहने वाले लोग भी आएंगे। लेकिन, जमीनी स्तर पर इस योजना का लाभ कितने किराएदारों को मिल पाएगा, उसको लेकर बहुत ज्यादा संदेह है।

कई लोग मुफ्त बिजली के लाभ से वंचित रह जाएंगे
कर्नाटक में बिजली आपूर्ति करने वाली कंपनियां सभी घरों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना पर अमल के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। लेकिन, जमीनी सच्चाई ये है कि राज्य सरकार की घोषणा के मुताबिक किराएदारों को भी मकान मालिक की तरह ही इस योजना का लाभ मिलेगा, इसको लेकर तमाम आशंकाएं पैदा हो रही हैं और संभावना है कि कई किराएदारों को इस योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ सकता है।
किराएदारों को मुफ्त का चक्कर छोड़ने को कहा जा रहा है
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलुरु और कर्नाटक के अन्य शहरों में कई मकान मालिकों को यह डर सता रहा है कि इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन देने में किराए की पूरी डिटेल देने से वह आयकर के दायरे में आ सकते हैं। इसलिए वह किराएदारों से चाह रहे हैं कि वह मुफ्त बिजली का लाभ लेने के बजाए पूरा बिल का भुगतान करें।
मुफ्त बिजली के बदले किराएदारों को मिल रहा है नया ऑफर
इसके बदले कुछ मकान मालिक किराएदारों को किराए में हर महीने कुछ छूट दिए जाने का ऑफर कर रहे हैं। क्योंकि, राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि किराएदार भी इस योजना के लाभ के हकदार हैं, लेकिन उन्हें या तो अपना एड्रेस प्रूफ देना होगा या फिर मकान मालिक के साथ हुए रेंट एग्रीमेंट की कॉपी देनी होगी।
इसलिए कुछ उपभोक्ता कर रहे हैं लाभ लेने से इनकार
बिजली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, 'यह योजना अनिवार्य नहीं है। कुछ उपभोक्ताओं ने लिखित घोषणा की है कि वह इसका लाभ नहीं लेना चाहते।' बेंगलुरु के हनुमंतनगर के एक किराएदार नागलक्ष्मी इटागी के मुताबिक, 'किराएदार मकान मालिक की मर्जी पर हैं। उन्हें लगता है कि अगर उनकी प्रॉपर्टी का रेंटल और लीज एग्रीमेंट सरकारी पोर्टल पर अपलोड हो गया तो उनकी असल आमदनी का खुलासा हो जाएगा और वह अतिरिक्त टैक्स के दायरे में आ जाएंगे।'
आयकर के दायरे में आने से बचना चाहते हैं मकान मालिक
उन्होंने कहा, 'मुझे निराशा है कि मैं सरकारी सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रही हूं।' बनशंकरी के मुनीश कुमार गौड़ा के पांच मकान हैं। उनका कहना है, 'मैंने अपने पांचों मकानों को किराए पर लगा रखा है और महीने में या दो महीने पर कैश में रेंट लेता हूं। पैन और आधार कार्ड नंबर लिंक होने से अगर हमारी प्रॉपर्टी की डिटेल का पैन नंबर के साथ खुलासा हो गया, तो आयकर अधिकारियों के लिए टैक्स चोरी का पता लगाना आसान हो जाएगा और हम अघोषित आए के लिए पकड़े जाएंगे।'
मुफ्त बस यात्रा भी शर्तों के साथ
इसी तरह कर्नाटक में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की जो सुविधा दी जा रही है, उसके साथ भी कई शर्तें जोड़ी गई हैं। कर्नाटक सरकार की ओर से महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की यह सुविधा सिर्फ नॉन-एसी और गैर-वॉल्वो बसों में ही दी जाएगी।
सिर्फ 20 किलोमीटर तक की यात्रा पर मिलेगा लाभ
शनिवार को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक की महिलाएं सिर्फ 20 किलोमीटर तक ही मुफ्त यात्रा का आनंद ले सकेंगी। यानि यह सुविधा सिटी सेवा के लिए तो लाभदायक है, लेकिन कर्नाटक में भी एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा के लिए उपयुक्त नहीं है।
जहां 20 किलोमीटर का दायरा पूरा होगा, वहीं महिलाओं को किराए का भुगतान करना होगा। मुख्यमंत्री ने कह दिया है कि अगर महिलाएं तिरुपति जाना चाहती हैं तो वह मुफ्त में सफर नहीं कर सकतीं। इसी तरह उन्होंने कहा है वह मुलबगल (आंध्र प्रदेश से सटे कोलार जिले) तक मुफ्त यात्रा कर सकती हैं, उसके बाद यह सुविधा नहीं मिलेगी।












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