Honey Trap: जासूसी से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक हनी ट्रैप के शातिर खेल में क्यों फंस रहीं औरतें?
Honey Trap: युद्ध में अपने विरोधियों की जासूसी के लिए हनी ट्रैप का इस्तेमाल काफी पुराना है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भी हनी ट्रैप का इस्तेमाल किया गया था। माता हारी चर्चित जासूस थी जो अपने हुस्न के जाल में फ्रेंच सैनिकों को फंसाने का का करती थी। भारत में हनी ट्रैप के कई मामले सामने आए हैं। इसमें पूर्व आईएफएस अधिकारी माधुरी से लेकर हालिया ज्योति मल्होत्रा (Jyoti Malhotra) केस भी शामिल है। सोशल मीडिया औप इंटरनेट का चलन बढ़ने के बाद से डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। हनी ट्रैप में पुराने दौर में महिलाएं पुरुषों को हुस्न के जाल में फंसाती थी और खुफिया जानकारी निकालने का काम करती थीं। हालांकि, पिछले एक दशक में स्थिति बदली है और महिलाएं भी इसका शिकार खूब होने लगी हैं। समझें इसके पीछे क्या वजहें हैं।
Honey Trap का इतिहास क्या है?
हनी ट्रैप इस शब्द का सबसे पहला जिक्र सन् 1974 में ब्रिटिश लेखक जॉन ले कैरे ने अपने एक स्पाई नॉवेल में किया था। दुनिया में हनी ट्रैप का पहला केस माता हारी को ही माना जाता है। इसमें महिलाएं पुरुषों को अपने रूप के जाल में फंसाती हैं और फिर उनसे देश, कंपनी या इस तरह की कोई खुफिया जानकारी निकालने से लेकर ब्लेकमैलिंग कर पैसे ऐंठने का काम करती हैं। डिजिटल अरेस्ट लोगों को ठगने का एक आधुनिक तरीका है। इसमें वीडियो कॉल या ऐसे ही किसी संदिग्ध तरीके से लोगों को ब्लैकमेल किया जाता है।
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महिलाएं क्यों बन रही हैं Honey Trap का शिकार
सोशल मीडिया के इस दौर में लोगों के पास अपने अकेलेपन को दूर करने का एक तरीका ऑनलाइन चैटिंग, वीडियो कॉल वगैरह भी है। भारत में जिस तादाद में सोशल मीडिया और इंटरनेस यूजर्स बढ़े हैं उस अनुपात में इन माध्यमों के इस्तेमाल के लिए जागरुकता नहीं आई है। इनके नियमन के लिए भी अब तक कोई मजबूत नेटवर्क और प्रक्रिया नहीं बन सकी है। कुछ महिलाएं नई दोस्त बनाने के चक्कर में, तो कुछ अकेलापन दूर करने और कुछ पैसों के लिए इस घिनौने खेल में शामिल हो जाती हैं। महिलाओं के हनी ट्रैप और डिजिटल अरेस्ट का शिकार होने की एक वजह है कि बहुत सी महिलाएं दिन भर में काफी वक्त सोशल मीडिया पर बिताती हैं, लेकिन उसके लिए जरूरी प्रोफाइल सुरक्षा और दूसरे सुरक्षा उपाय नहीं अपनाती हैं।
हनी ट्रैप से बचने का क्या है तरीका
डिजिटल अरेस्ट या हनी ट्रैप के जरिए ब्लैकमेलिंग से बचने का सबसे आसान तरीका है कि कभी भी अनजान नंबर से आए वीडियो कॉल नहीं उठाना चाहिए। ऐसे किसी भी तरह के कॉल आने पर नंबर ब्लॉक कर तत्काल पुलिस और साइबर सेल को सूचना देनी चाहिए। सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें और निजी जानकारी सिर्फ परिचित लोगों के साथ ही शेयर करनी चाहिए।

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