Hathras:पीड़ित परिवार को झूठा बयान देने के लिए 50 लाख का ऑफर, आखिर हाथरस में ये कैसी साजिश

Hathras:पीड़ित परिवार को झूठा बयान देने के लिए 50 लाख का ऑफर, आखिर हाथरस में ये कैसी साजिश

हाथरस/लखनऊ: उत्तर प्रदेश का हाथरस मामला (Hathras case) उलझता ही जा रहा है। हाथरस मामले में यूपी पुलिस (UP police) ने अब तक 19 एफआईआर (FIR) दर्ज की है। 19 एफआईआर में से 6 हाथरस में दर्ज हुई है। इसमें एफआईआर नंबर 151 काफी अहम है। जिसमें अज्ञात और अराजक तत्वों पर राजद्रोह और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये एफआईआर चांदपा थाने के सब-इंस्पेक्टर द्वारा शिकायत के बाद दर्ज की गई है। इसी एफआईआर में ये दावा किया गया है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार के खिलाफ झूट और गलत बयान देने के लिए हाथरस पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये ऑफर किए गए थे।

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    हाथरस पीड़ित परिवार को 50 लाख का लालच: पुलिस

    हाथरस पीड़ित परिवार को 50 लाख का लालच: पुलिस

    एनडीटीवी की रिपोर्ट के मताबिक सब-इंस्पेक्टर द्वारा शिकायत के बाद दर्ज की गई एफआईआर (FIR) में लिखा गया है कि आपराधिक साजिश के तहत पीड़ित परिवार के बयान को भटकाया गया है। पीड़ित परिवार को प्रदेश सरकार के खिलाफ गलत बयान और झूठा आरोप लगाने के लिए 50 लाख का लालच दिया गया था। हालांकि एफआईआर में पुलिस ने किसी का नाम नहीं लिखा है। ये एफआई अज्ञात और अराजक तत्वों पर दर्ज है।

    FIR में जाति के नाम पर दंगे की बात

    FIR में जाति के नाम पर दंगे की बात

    एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि उनके पास इस एफआईआर (FIR) की कॉपी है। एफआईआर में लिखा गया है कि अराजक तत्व प्रदेश में वर्ग और जाति विशेष को भड़काकर दंगा करवाना चाहते थे। यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में भी साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने की बात कही है।

    एफआईआर में यह भी लिखा हुआ है कि सोशल मीडिया पर लोगों को भड़काने के लिए तमाम झूठी तस्वीरें और ऑडियो वायरल किए गए थे। यूपी पुलिस ने एफआईआर में यह भी कहा है कि राज्य सरकार की छवि खराब करने की साजिश में "सोशल मीडिया पर वायरल" किए गए झूठे बयानों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिम्मेदार ठहराया गया था।

    UP पुलिस ने कब दर्ज की FIR

    UP पुलिस ने कब दर्ज की FIR

    हाथरस कांड में राजद्रोह और आपराधिक साजिश को लेकर एफआईआर (FIR) तब दर्ज हुई, जब प्रदेश सरकार को खुफिया विभाग से जाति के नाम पर दंगे के इनपुट मिले। सीएम योगी ने भी दावा किया था कि कुछ लोग उनकी सरकार की विकास कार्य को देखकर हाथरस में दंगा करवाना चाहते हैं। सीएम योगी के इस बयान के बाद एफआईआर में कई चार्ज जोड़े गए हैं।

    यूपी एडीजी प्रशांत कुमार ने सोमवार को दर्ज किए गए एफआईआर पर कहा था कि हाथरस में एक गहरी साजिश रची गई है। हम जल्द ही इस मामले के तह तक पहुंच जाएंगे और सच सबके सामने लाएंगे।

    सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा हाथरस का मामला

    सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा हाथरस का मामला

    हाथरस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (6 अक्टूबर) को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने योगी सरकार से गवाहों और पीड़ित परिवार के सुरक्षा इंतजाम पर जवाब मांगा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में यूपी की सरकार ने बताया है कि हाथरस में हिंसा कराने की कोशिश की जा रही है। यूपी सरकार ने कोर्ट में कहा है कि हम चाहते हैं मामले की जांच सीबीआई करे।

    पीड़िता के देर रात अंतिम संस्कार पर कोर्ट में योगी सरकार ने कहा कि दंगा ना भड़के इसलिए हमने ये फैसला किया था। हमें खुफिया जानकारी मिली थी कि अगली सुबह वहां लाखों की संख्या में भीड़ होने वाली है।

    14 सितंबर 2020 को दलित पीड़िता का कथित तौर पर चार लोगों ने मिलकर गैंगरेप किया था। जिसके बाद पीड़िता की मौत 20 सितंबर की सुबह 4 बजे के आसपास दिल्ली के अस्पताल में हो गई। पीड़िता ने अपनी तीसरी बयान में 22 सितंबर को कहा था कि उसके साथ 4 लड़कों ने रेप किया है। पहले के दो बयान में उसने मारपीट की बात कही थी।

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