बिहार महागठबंधन में छोटे दलों को लेकर खींचतान, सीट शेयरिंग पर कांग्रेस-आरजेडी में फंसा पेंच

नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 की घोषणाओं में अब महज औपचारिकताएं ही बाकी रह गई हैं, क्योंकि चुनाव आयोग कभी भी बिहार चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकती है, जिसकी संभावित तारीख नवंबर और दिसंबर के बीच हो सकती है, लेकिन आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ एनडीए से मुकाबले के लिए अभी तक महागठबंधन तैयार नहीं दिख रही है।

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    महागठबंधन में दलों के बीच शीट शेयरिंग को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है

    महागठबंधन में दलों के बीच शीट शेयरिंग को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है

    ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि अभी तक महागठबंधन में शामिल विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच शीट शेयरिंग को लेकर कोई स्पष्टता नहीं हैं। यह असमंजस खासकर छोटे दलों को लेकर और बनी हई हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, जिसका परिणाम ही कहेंगे कि कई महागठबंधन के नेता और दल जेडीयू से शामिल हो गए हैं। इनमें जीतन राम मांझी का प्रमुखता से लिया जा सकता है।

    कांग्रेस ने जिला स्तरीय वर्चुअल रैलियां के साथ चुनावी अभियान की शुरू किया

    कांग्रेस ने जिला स्तरीय वर्चुअल रैलियां के साथ चुनावी अभियान की शुरू किया

    गौरतलब है बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भले ही कांग्रेस ने जिला स्तरीय वर्चुअल रैलियां के साथ चुनावी अभियान की शुरूआत कर दी है, लेकिन अब तक कांग्रेस में भी स्पष्टता नहीं है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगी, क्योंकि अभी तक महागठबंधन में शामिल प्रमुख पार्टियों में आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टी के सीट शेयरिंग को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    आरजेडी और कांग्रेस के बीच RLSP और वीआईपी को लेकर असमंजस

    आरजेडी और कांग्रेस के बीच RLSP और वीआईपी को लेकर असमंजस

    निः संदेह आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन में कौन सा दल या उम्मीदवार किस सीट से चुनाव लड़ेगा, इसको लेकर भंयकर ऊहापोह बना हुआ है, जिसके चलते सहयोगी दलों में बेचैनी बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक आरजेडी और कांग्रेस के बीच उपेंद्र कुशवाहा की अगुवाई वाली आरएलएसपी और मुकेश साहनी की अगुवाई वाली विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) जैसे छोटे दलों को महागठबंधन में समायोजित करने को लेकर सहमित नहीं बनी है।

    आरजेडी छोटी पार्टियों को ज्यादा सीट देने की इच्छुक नहीं हैं

    आरजेडी छोटी पार्टियों को ज्यादा सीट देने की इच्छुक नहीं हैं

    आरजेडी छोटी पार्टियों को ज्यादा सीट देने की इच्छुक नहीं हैं। यहां तक कि आरजेडी ने कहा है कि महागठबंधन में शामिल दोनों छोटे दल आरजेडी और कांग्रेस के चिन्हों पर चुनाव लड़ सकते हैं। इसके पीछे आरजेडी का तर्क हैं कि दोनों दल अपने जाति के वोटों का पूर्ण हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा ताकि एनडीए विरोधी और सत्ता विरोधी वोटों को विभाजन न होने पाए।

    कांग्रेस बिहार चुनाव 2020 में 70 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी!

    कांग्रेस बिहार चुनाव 2020 में 70 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी!

    कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक कांग्रेस बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में 70 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी, लेकिन सीटों को लेकर अब तक कोई स्पष्टता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वर्चुअल रैली ठीक है, लेकिन पहला मुद्दा यह है कि गठबधन में सीट शेयरिंग पर स्पष्टता होनी चाहिए। मसलन, कौन किस सीट से उम्मीदवार होगा यह अभी तक स्पष्ट नहीं, किस दल को कितनी सीट मिलेगी, इन बातों पर पहले ध्यान दिया जाना चाहिए।

    छोटे दलों के बिना भी चुनाव में जा सकती हैं RJD, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टी

    छोटे दलों के बिना भी चुनाव में जा सकती हैं RJD, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टी

    वहीं, आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि आरजेडी, कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के बीच व्यापक सहमित है, लेकिन गठबंधन में आरएलएसपी और वीआईपी को शामिल किया जाना अभी शेष है। साथ ही, उन्होंने कहा कि छोटे दल 25-30 सीटें मांग रही है, लेकिन साथ में डिप्टी सीएम पद भी मांग रही हैं, लेकिन अपने वोटों के हस्तांतरण को लेकर प्रश्नचिन्ह बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर छोटे दल जिद पर अड़ती हैं तो उनके बिना भी आरजेडी, कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी चुनाव में उतर सकती हैं।

    बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में त्रिशंकु विधानसभा की संभावनाएं भी बरकरार है

    बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में त्रिशंकु विधानसभा की संभावनाएं भी बरकरार है

    एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में त्रिशंकु विधानसभा की संभावनाएं भी बरकरार है, क्योंकि इस बार चुनाव में तगड़ी फाइट की संभावना है, इसलिए चुनाव बाद गठबंधनों की आवश्यकता हो सकती है। हमें विश्वास है कि राजद, कांग्रेस और वाम दलों के उम्मीदवार काफी हद तक भाजपा का विरोध करने में सक्षम होंगे, लेकिन समस्या छोटी पार्टियों की है।

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