America Oil reserves: नमक की गुफाओं में क्यों भरा जा रहा है कच्चा तेल? अमेरिका की इस चालाकी का क्या है कारण
America Oil reserves Texas: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के लंबे समय तक बंद रहने से दुनिया की तेल सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे हालात में देशों के लिए सिर्फ तेल खरीदना ही नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से स्टोर करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। अमेरिका, चीन, भारत और दूसरे बड़े देश इमरजेंसी के समय इस्तेमाल के लिए स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व तैयार रखते हैं।
खास बात यह है कि अमेरिका अपने करोड़ों बैरल कच्चे तेल को जमीन के नीचे बनी विशाल नमक की गुफाओं में रखता है। आखिर नमक की गुफाएं इतनी खास क्यों हैं और भारत इस मॉडल से क्या सीख रहा है, आइए समझते हैं।

Hormuz Strait Oil Supply Crisis: नमक की गुफाएं ऑयल स्टोरेज के लिए क्यों हैं सबसे बेहतर?
ऑयल स्टोरेज के लिए नमक की गुफाओं को दुनिया में सबसे सुरक्षित ऑप्शन माना जाता है। नमक की परतें प्राकृतिक रूप से लीक होने से रोकती हैं और इनमें पानी या हवा का असर भी बहुत कम होता है। इसी वजह से करोड़ों बैरल कच्चा तेल लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन गुफाओं से तेल निकालने और दोबारा भरने की प्रक्रिया कई बार की जा सकती है, जबकि गुफा की स्ट्रक्चर पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता। यही कारण है कि अमेरिका दशकों से इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है।
अमेरिका के पास कितना बड़ा स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व है?
अमेरिका का स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व दुनिया के सबसे बड़े इमरजेंसी ऑयल स्टोरेज सिस्टम में शामिल है। यह रिजर्व मुख्य रूप से टेक्सास और लुइसियाना के सॉल्ट डोम्स में मौजूद है। 1970 के दशक में तैयार की गई इन विशाल अंडरग्राउंड गुफाओं में तेल जमा किया जाता है। मौजूदा समय में अमेरिका के पास करीब 374 मिलियन बैरल तेल रिजर्व है, जबकि इसकी कुल स्टोरेज क्षमता 714 मिलियन बैरल तक है। हाल ही में वैश्विक सप्लाई संकट के दौरान अमेरिका ने अपने रिजर्व से बड़ी मात्रा में तेल जारी कर बाजार को राहत देने की कोशिश की।
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होर्मुज संकट ने क्यों बढ़ाई ऑयल रिजर्व की अहमियत?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। इस रास्ते से खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा वैश्विक बाजार तक पहुंचता है। जब भी यहां तनाव बढ़ता है या आवाजाही प्रभावित होती है, तब तेल की कीमतों में तेजी आने लगती है। इसी वजह से देशों के लिए पर्याप्त स्ट्रैटजिक रिजर्व रखना जरूरी हो जाता है। मार्च 2026 में तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए कई देशों ने अपने रिजर्व से तेल जारी किया था। साल 2025 के अंत तक दुनिया का कुल स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व करीब 2.5 अरब बैरल आंका गया था।
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भारत भी बना रहा है भविष्य की तैयारी
भारत फिलहाल कच्चे तेल को खास तौर पर तैयार की गई चट्टानी अंडरग्राउंड गुफाओं में स्टोर करता है। हालांकि सरकार भविष्य में नमक की गुफाओं वाले मॉडल पर भी काम करना चाहती है। साल 2023 में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) ने राजस्थान में सॉल्ट कैवर्न बेस्ड ऑयल स्टोरेज की संभावनाओं का अध्ययन शुरू किया था। अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है तो भारत को पहली बार नमक की गुफाओं पर आधारित स्ट्रैटजिक ऑयल स्टोरेज सुविधा मिल सकती है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और किसी वैश्विक सप्लाई संकट के दौरान भारत के पास ज्यादा बैकअप उपलब्ध रहेगा।












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