Good News:1.5 लाख से अधिक कंपनियों ने शुरू किया EPFO में योगदान, जानिए क्या है इसके मायने?
नई दिल्ली। कोरोना महामारी संकट के बीच मार्च महीने की अंत में लागू हुए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद लाखों नौकरीपेशों लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। किसी की नौकरी चली गई, तो किसी की सैलरी में कटौती कर दी गई और यहां तक कि कंपनियों ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) कंपनी का योगदान भी बंद करना पड़ा था, लेकिन अगस्त के महीने ने रोजगार में वृद्धि ने आर्थिक सुधार के संकेत दिए हैं।


अगस्त में 1,53,500 कंपनियों ने EPFO में योगदान देना शुरू कर दिया है
रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में लागू लॉकडाउन के बाद अब कंपनियों में कामकाज शुरू होने से लोगों को रोजगार मिलने शुरू हो गए हैं। इसकी तस्दीक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के हालिया आंकड़ों से मिल रहे हैं। आंकड़े कहते हैं कि अगस्त में 1,53,500 कंपनियों ने ईपीएफओ में योगदान देना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी भी 64 हजार कंपनियों ने ईपीएफओ में योगदान शुरू नहीं किया है, लेकिन अर्थव्यवस्था के लिए धीमा ही सही पर सुधार के संकेत दिखने लगे हैं।

EPFO योगदान में वापसी आर्थिक सुधार का एक महत्वपूर्ण संकेत: विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का कहना है कि ईपीएफओ योगदान में वापसी धीरे-धीरे हो रहे आर्थिक सुधार का एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह कई क्षेत्रों में एक आर्थिक सुधार देखा जा रहा है। इनमें कारों की बिक्री और अन्य क्षेत्रों में हुए सुधार शामिल हैं। यह इसलिए संभव हुआ है, क्योंकि अर्थव्यवस्था कम से कम दो महीने के लिए निलंबित रहने के बाद फिर से खुल गई है।

अप्रैल में EPFO योगदान में 2 लाख से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी
ईपीएफओ डेटा के मुताबिक फरवरी 2020 में 5,49,037 कंपनियां ईपीएपओ में अपना योगदान दे रही थीं, लेकिन अप्रैल 2020 में इसमें 2 लाख से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। अप्रैल में ईपीएफओ में योगदान करने वाली कंपनियों की संख्या गिरकर 3,32,773 पर आ गई थी। अगस्त महीने में 1.53 लाख कंपनियों का लौटना राहत की बात है। इन कंपनियों के लौटने से ईपीएफओ के सब्सक्राइबर बेस में बढ़ोत्तरी होगी, जो अप्रैल में निचले स्तर पर पहुंच गया था।

20 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को EPFO में योगदान देना होता है
20 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों या संस्थानों को ईपीएफओ में योगदान देना होता है। यह योगदान कर्मचारी की बेसिक सैलरी के 24 फीसदी के बराबर होता है। इसमें 12 फीसदी हिस्सा कर्मचारी और 12 फीसदी हिस्सा कंपनी का होता है। मई में केंद्र सरकार ने कर्मचारी के योगदान को घटाकर 10 फीसदी कर दिया था। यह सुविधा केवल 3 महीने के लिए दी गई थी। अगस्त से फिर से 24 फीसदी योगदान का नियम लागू हो गया है।

महामारी के दौरान EPFO सदस्य को आंशिक निकासी की सुविधा दी गई थी
कोरोना आपदा के दौरान वित्त मंत्रालय ने ईपीएफओ के सब्सक्राइबर्स को आंशिक निकासी की विशेष सुविधा प्रदान की थी। यह सुविधा अप्रैल से दी गई थी। इस सुविधा के तहत ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स खाते में जमा कुल राशि में से 75 फीसदी या तीन महीने की सैलरी के बराबर (दोनों में से जो कम हो) राशि निकाल सकता था। ईपीएफओ के डाटा के मुताबिक अप्रैल से अब तक चार महीने से कम समय में 80 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स ने ईपीएफओ से 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की है।

सरकार ने सेंट लूसिया को चिकित्सा आपूर्ति और सुरक्षात्मक गियर भेंट किए
विदेश मंत्रालय का विकास भागीदारी प्रशासन (DPA) के मुताबिक भारत सरकार ने कोरोना महामारी से लड़ने में अपना वैश्विक समर्थन जारी रखते हुए सेंट लूसिया सरकार को चिकित्सा आपूर्ति और सुरक्षात्मक गियर भेंट किए हैं। जुलाई 2018 में युगांडा यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने नागरिक उपयोग और युगांडा के रक्षा बल के लिए वाहनों को उपहार देने की घोषणा की थी। कंपाला में स्थित भारत के उच्चायोग ने बताया कि गत 24 अगस्त को सौंपी गई युगांडा को भारत सरकार की ओर से 10 बसें, 10 सैन्य टुकड़ियों, 2 एम्बुलेंस और 14 मोटरसाइकिलों सहित 36 वाहन सौंपी है।
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