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Republic Day 2023: गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस में क्या अंतर है ?

गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस दोनों ही दिन तिरंगा फहराया जाता है। लेकिन, इन दोनों राष्ट्रीय पर्वों के मनाने के तरीके में कुछ मूलभूत अंतर है। इन दोनों के माध्यम से संदेश भी अलग-अलग मिलता है।

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गणतंत्र दिवस 2023: भारत इस बार अपना 74वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राजधानी नई दिल्ली में पुनर्निमित कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराएंगी और देश को गौरवांवित करने वाली उत्साह से भरपूर परेड की सलामी लेंगी। गणतंत्र दिवस भारत के संविधान के लागू किए जाने के दिन की यादगारी के तौर पर मनाया जाता है। झंडोतोलन का कार्यक्रम स्वतंत्रता दिवस पर भी होता है। दोनों ही देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय पर्व हैं। लेकिन, फिर भी दोनों राष्ट्रीय पर्वों में कुछ मूलभूत अंतर हैं। जिसके बारे में बात करना आवश्यक है।

गणतंत्र दिवस क्या है ?

गणतंत्र दिवस क्या है ?

देश 26 जनवरी, 2023 यानि गुरुवार को अपना 74वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। 26 जनवरी, 1949 को संविधान सभा ने भारत के संविधान को आत्मसात किया था और 26 जनवरी, 1950 से हमारा संविधान लागू हुआ था। इस दिन भारत गणतंत्र बना था और उसी के उपलक्ष में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति जो कि देश के प्रथम नागरिक भी होते हैं, वह कर्तव्य पथ पर (पहले राजपथ) पर तिरंगा फहराते हैं। इसके बाद पूरा देश तीनों सशस्त्र सेनाओं और बाकी सुरक्षा बलों की शानदार परेड और झांकियों का गवाह बनता है। बाद में विभिन्न प्रदेशों, मंत्रालयों और अन्य संस्थाओं की मनमोहक झांकियों का भी प्रदर्शन होता है। यह एक राष्ट्रीय पर्व है और इस दिन सार्वजनिक अवकाश होता है। देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य समारोह के अलावा पूरे देश में भी तिरंगा फहराया जाता है। इस मौके पर राज्यों में राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेशों में उपराज्यपाल मुख्य कार्यक्रम में झंडोतोलन करते हैं और परेड की सलामी लेते हैं।

स्वतंत्रता दिवस क्या है ?

स्वतंत्रता दिवस क्या है ?

स्वतंत्रता दिवस में देश का मुख्य समारोह लालकिले पर आयोजित होता है, जहां प्रधानमंत्री लालकिले की प्राचीर पर तिरंगा फहराते हैं। 15 अगस्त, 1947 को देश आजाद हुआ था, उसी अवसर पर हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने की परंपरा है। गणतंत्र दिवस की तरह यह भी एक राष्ट्रीय पर्व है। जहां गणतंत्र दिवस पर देश की जनता अपनी तीनों सेनाओं के शौर्य, बल और पराक्रम से सीधी रूबरू होती है, उसके उलट 15 अगस्त को झंडोतोलन के तत्काल बाद लालकिले की प्राचीर से ही प्रधानमंत्री एक विस्तृत भाषण देते हैं। इस भाषण में सरकार की नीतियों और योजनाओं का समावेश होता है। इसमें सरकार और मौजूदा राजनीतिक, कूटनीति, अर्थव्यवस्था और अन्य स्थितियों पर प्रधानमंत्री अपनी बात देश के सामने रखते हैं। इस भाषण से देश में क्या कुछ चल रहा है या कुछ होने वाला है, इसकी काफी कुछ झलक मिल जाती है। प्रधानमंत्री लालकिले से जो कुछ कहते हैं, उसपर पूरी दुनिया की मीडिया की नजरें लगी रहती हैं। स्वतंत्रता दिवस के दिन राज्यों में मुख्यमंत्री अपने-अपने प्रदेश की राजधानियों में मुख्य समारोह में झंडा फहराते हैं।

गणतंत्र दिवस 2023: मुख्य अतिथि

गणतंत्र दिवस 2023: मुख्य अतिथि

गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस में एक मुख्य अंतर यह भी है कि गणतंत्र दिवस पर भारत में हुई प्रगति से देश और दुनिया अवगत होती है। जबकि, स्वतंत्रता दिवस हमारे स्वतंत्रता संघर्ष में मिली कामयाबी पर जश्न मनाने का दिन है। गणतंत्र दिवस में हर साल किसी ना किसी देश के राष्ट्राध्याक्ष या शासनाध्यक्ष मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किए जाते हैं। जैसे इस बार गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। गणतंत्र दिवस परेड में मिस्र का एक 120 सदस्यीय दल भी हिस्सा लेगा।

गणतंत्र दिवस 2023 परेड

गणतंत्र दिवस 2023 परेड

गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के तिरंगा फहराने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परंपरागत रूप से अमर जवानों को देश की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। जब प्रधानमंत्री का काफिला कर्तव्य पथ पर स्थित समारोह स्थल पर पहुंच जाएगा तो पारंपरिक रूप से राष्ट्रपति अपने अंगरक्षकों और काफिले के साथ शानदार अंदाज में वहां पहुंचेंगी। फिर ध्वजारोहण करने के साथ ही परेड की शुरुआत हो जाएगी। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां मुख्य समारोह लालकिले पर होता है, वहीं 26 जनवरी की परेड इंडिया गेट की ओर से आते हुए वापसी में लालकिले तक पहुंचती है।

कर्तव्य पथ पर 45,000 सीटों की व्यवस्था

कर्तव्य पथ पर 45,000 सीटों की व्यवस्था

इस साल कर्तव्य पथ के पुनर्निमाण का असर गणतंत्र दिवस परेड में भी दिखेगा। क्योंकि, रिपोर्ट के मुताबिक इस बार सीर्फ 45,000 सीटों की ही व्यवस्था की गई है। गौरतलब है कि देश के हर नागरिक और विदेशी सैलानियों का भी एक सपना होता है कि कम से कम एक बार कर्तव्य पथ से इस समारोह का आनंद जरूर उठाएं।


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