किसान आंदोलन पर बोले योगी आदित्यनाथ, विपक्ष माहौल बिगाड़ने की फिराक में
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि किसान आंदोलन की आड़ में कुछ राजनीतिक दल अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं और माहौल को खराब करने की कोशिश में हैं। सोमवार को यूपी सीएम आदित्यनाथ ने कहा, देश के कुछ राजनीतिक दलों की ओर से वातावरण खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। खासतौर पर एपीएमसी एक्ट पर राजनीतिक दलों का वर्तमान रवैया उनके दोहरे चरित्र को दर्शा रहा है।
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यूपी सीएम ने कहा, 2010-11 में यूपीएम की सरकार में केंद्रीय कृषिमंत्री शरद पवार ने सभी राज्य सरकारों को एपीएमसी एक्ट में संशोधन के लिए पत्र लिखा था। कांग्रेस और उसे समर्थन करने वाले राजनीतिक दल आज अपने वक्तव्यों से कैसे मुकर सकते हैं। ये किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर के देश में अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। विपक्षी दल किसानों को अपना हथियार बना रहे हैं। जब इनके पास सत्ता थी, तब इनको किसानों के बारे में सोचने का मौका नहीं मिला। किसानों के हित के बारे में पीएम नरेंद्र मोदी ने सिर्फ सोचा ही नहीं, काम को करके दिखाया है। कृषि कानून में संशोधन भी इसीलिए है। जब विपक्षी दलों के पास सत्ता थी तो दोहरे चरित्र वाले इन दलों ने किसानों के बारे में नहीं सोचा और अब इनके कंधों पर बंदूक रखकर अपना छोटा सा हित साधने के प्रयास में हैं।
केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून से आंदोलनरत हैं। किसान हाल ही मे 26 नवंबर को पंजाब हरियाणा से दिल्ली की ओर कूच किए और 12 आठ दिन से किसान सिंधु बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसान संगठनों और सरकार के बीच हुई कई दौर की बातचीत से भी अभी कोई नतीजा नहीं निकलता दिख रहा है। इसी को लेकर अब केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ ही किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद की घोषणा की है।
किसानों के भारत बंद और आंदोलन को विपक्षी के ज्यादातर दलों का समर्थन मिल रहा है। शिवसेना, बसपा, आप, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसी, आरजेडी, एनसीपी, डीएमके, एआईएफबी, आरएसपी, सीपीआई, सीपीआईएम, सीपीआईएमएल, पीएजीडी ने किसानों को समर्थन दिया है। एक और किसान और विपक्ष नए कानूनों को वापस लेने को कह रहे हैं तो वहीं भाजपा का कहना है कि ये तो किसानों के भले के लिए ही हैं, विपक्ष आंदोलन को भड़का रहा है।












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