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Farmers Protest: कृषि कानूनों को रद्द करने की याचिका पर SC की टिप्पणी, हमें किसानों की परेशानी का अहसास

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नई दिल्ली। केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों (Farm Laws) को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसानों की परेशानी का अहसास हमें भी है। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 11 जनवरी की तारीख दी है, इन कानूनों को लेकर दायर सभी याचिकाओं पर 11 जनवरी को कोर्ट सुनवाई करेगा।

farmers protest Supreme Court adjourned hearing to January 11 on petition seeking quashing of 3 farm laws
    Farmer Protest और Farmer Law पर Supreme Court ने जताई चिंता, कही ये बात | वनइंडिया हिंदी

    चीफ जस्टिस बोबडे ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम चाहते हैं किसानों और सरकार के बीच बातचीत से हल निकले लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि बैठकों में कुछ हल निकल रहा है। इस पर केंद्र की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि सरकार लगातार आंदोलनकारी किसानों से बातचीत कर रही है। उम्मीद है कि जल्दी ही इस मामले का हल निकलेगा।

    कृषि कानूनों के खिलाफ ये याचिका वकील एमएल शर्मा ने दाखिल की है। याचिका में वकील ने केंद्र सरकार की ओर से लाए तीनों कानूनों को खत्म करने की मांग की है याचिका में कहा गया है कि नए कृषि कानून कॉर्पोरेट के हितों को प्रोमोट करने वाले और किसानों को नुकसान की ओर ले जाने वाले हैं। बुधवार को अदालत ने याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा है।

    बता दें कि केंद्र सरकार इस साल तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसानों को कहना है कि ये कानून मंडी सिस्टम और पूरी खेती को प्राइवेट हाथों में सौंप देंगे, जिससे किसान को भारी नुकसान उठाना होगा। किसान इन कानूनों को खेती के खिलाफ कह रहे हैं और तीनों कानूनों को वापस नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि किसानों को विपक्ष ने भ्रम में डाला है, ये कानून उनके फायदे के लिए हैं।

    केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन नए कानूनों के खिलाफ बीते छह महीने से किसान आंदोलन कर रहे हैं। ये आंदोलन जून से नवंबर तक मुख्य रूप से हरियाणा और पंजाब में हो रहा था। सरकार की ओर से प्रदर्शन पर ध्यान ना देने पर 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली की और कूच करने का ऐलान कर दिया। इसके बाद बीते 42 दिन से किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। टिकरी, गाजीपुर और दिल्ली के दूसरे बॉर्डर पर भी किसान जमा हैं। दिल्ली में किसानों के आने के बाद सरकार और किसान नेताओं के बीच अब तक सात दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि अभी तक कोई नतीजा निकलता बातचीत से नहीं निकला है। अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गया है।

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    English summary
    farmers protest Supreme Court adjourned hearing to January 11 on petition seeking quashing of 3 farm laws
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