अगर सरकार जिद्दी है तो किसान भी जिद्दी हैं, कानून वापस लेने ही होंगे- राकेश टिकैत
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले कई दिनों से आंदोलित हैं। किसानों के प्रदर्शन खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार लगातार किसानों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर रही है। लेकिन अभी तक इस गतिरोध का अंत नहीं हो सका है। इस बीच किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच छठे दौर की वार्ता को रद्द कर दिया गया है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार हमे जो ड्राफ्ट भेजेगी उसपर हम बैठक करेंगे। बैठक में ड्राफ्ट पर चर्चा की जाएगी और आगे के कदम पर फैसला लिया जाएगा। हमे उम्मीद है कि आज शाम 4-5 बजे तक स्थिति साफ हो जाएगी।
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राकेश टिकैत ने कहा कि अपनी बैठक में रणनीति को तैयार करेंगे और सरकार के प्रस्ताव पर विचार करेंगे। किसान पीछे नहीं हटेंगे और ना ही वापस जाएंगे, यह उनके सम्मान का विषय है। क्या सरकार कानून को वापस नहीं लेगी। क्या तानाशाही होगी। अगर सरकार जिद्दी है तो किसान भी जिद्दी है, कानून को वापस लेना ही होगा।
बता दें कि इससे पहले कृषि कानूनों को लेकर मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह और 13 किसान नेताओं की बातचीत बेनतीजा निकली। इस बैठक के बाद ऑल इंडिया किसान सभा के हन्नान मोल्लाह ने कहा कि सरकार कानून वापस लेने को तैयार नहीं है, सरकार की ओर से आज एक प्रस्ताव मिलेगा। जिसको लेकर किसान दोपहर 12 बजे सिंधु बॉर्डर पर बैठक करेंगे। मालूम हो कि आज किसान नेताओं और सरकार के बीच जो बैठक होने वाली थी उसे रद्द कर दिया गया है। गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने कृषि से जुड़े तीनों कानूनों को वापस लेने से इनकार कर दिया है तो वहीं किसान अभी भी कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
आपको बता दें कि केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं लेकिन किसान इस नए कानून को मानने को तैयार नहीं है। वो इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसलिए ही बीते 14 दिन से किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। इसके बाद किसान नेताओं और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है।












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