हर साल खुद गर्भपात कर लेती हैं 18 लाख युवतियां
दिल्ली की डॉक्टर अर्चना धवन बताती हैं कि आजकल नवयुवतियों में वेब के द्वारा अबॉर्शन आम चलन हो गया है, जो लड़कियों के लिए एक बड़ा खतरा है। इन दिनों ऐसे मामले बहुत आम हो चुके हैं। इंटरनेट के जरिए बहुत गर्भपात हो रहे हैं, ज्यादातर नवयुवतियां ही इसमें फंसती हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि हर साल 18 लाख से 67 लाख गर्भपात खुद से किए गए मेडिकल अबॉर्शन के द्वारा होते हैं।

दवा से गर्भपात कोई अवैध नहीं है। इस प्रक्रिया को परिवार एवं स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2002 में मान्यता प्रदान की गई है। मेडिकल अबॉर्शन निर्देशों के अनुसार, गर्भावस्था के सात हफ्तों के भीतर दवा द्वारा गर्भपात किया जा सकता है यानी माहवारी के अगले तीन हफ्तों के अंदर माइफप्रोस्टिन व मीसोप्रोसटल अबॉर्शन पिल ली जा सकती है।
पहली गोली से प्रेग्नेंसी को खत्म किया जाता है और दूसरी गोली यूट्रीन कॉन्ट्रेक्शन को बढ़ाकर गर्भपात कर देती है, लेकिन यह दवा हमेशा डॉक्टर की निगरानी में ही ली जानी चाहिए, क्योंकि गर्भपात के बाद डॉक्टर अल्ट्रासाउंड के द्वारा फिर चेक करती हैं कि गर्भपात ठीक प्रकार से हुआ या नहीं, ताकि कोई अवशेष न रह जाए।
डॉ. अर्चना बताती हैं कि इंटरनेट की मदद से गर्भपात खतरे से भरा होता है। उन्होंने कहा, "मुझे हर हफ्ते कई कॉल आते हैं, जिनमें लड़कियां इंटरनेट पर दिए गए तथ्यों को पढ़कर पूछती हैं कि क्या ये तरीके सही हैं? वे लड़कियां डॉक्टर के पास जाना नहीं चाहतीं, खुद गर्भपात करना चाहती हैं। मैं उन्हें मना करती हूं, क्योंकि इससे उनकी जान को खतरा हो सकता है।"












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