गर्भपात के बहाने भारतीय लड़कियों पर टेस्टिंग तो नहीं कर रहीं दवा कंपनियां
ऑनलाइन गर्भपात के बढ़ते चलन में पाया गया है कि जब लड़कियां इंटरनेट के माध्यम से खुद गोलियां खरीद कर खा लेती हैं, तो कई गंभीर परिणाम सामने आते हैं। जैसे अत्यधिक ब्लीडिंग, अधूरा गर्भपात, डी और सी की जरूरत, रक्त में इन्फेक्शन, सदमा तथा मृत्यु की आशंका। कभी-कभी बांझपन की समस्या भी हो सकती है। लेकिन इन सबके बीच एक आशंका यह भी है कि दवा कंपनियां ऑनलाइन गर्भपात का लालच देकर भारतीय महिलाओं पर अपनी दवाओं का परीक्षण कर रही हैं।

लखनऊ के श्री जय नारायण पीजी कॉलेज के मानव वैज्ञानिक एवं इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी के काउंसिलर डा. आलोक चांटिया का कहना है कि तमाम दवाएं ऐसी हैं, जो जर्मनी व अमेरिका में प्रतिबंधित हैं, लेकिन भारत में उन पर प्रतिबंध नहीं लगा है। उन देशों ने दवाओं पर सिर्फ इसलिये प्रतिबंध लगा रखा है, क्योंकि उनका परीक्षण इंसानों पर नहीं हुआ है। और ऑनलाइन गर्भपात में जो दवाएं दी जाती हैं, वो असल में पूर्ण रूप से परीक्षण से गुजरी नहीं हुई होती हैं।
डा. चांटिया ने आगे कहा कि इससे साफ है कि पश्चिमी देश भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका जैसे देशों में अपनी दवाओं का परीक्षण इस प्रकार कर रही हैं। अगर आप ऑनलाइन गर्भपात की वेबसाइटों पर जायेंगे तो उसमें दवा के बाद क्या हुआ, यह भी बताना होता है। कई कंपनियां दवा खरीदने वाली लड़कियों को फोन करके पूछती हैं कि उस दवा से फायदा हुआ या नहीं, अगर नहीं तो उसे लेने के बाद क्या-क्या हुआ।
लड़कियों द्वारा की जाने वाली यह ऑनलाइन शॉपिंग उनके लिये सर्वेक्षण एवं परीक्षण का काम करती हैं। और उन्हीं के नतीजों के आधार पर दवा पर एक्सपेरीमेंट करती हैं। अगर ऑनलाइन गर्भपात को रोकना है, तो सरकार को सबसे पहले उन दवाओं पर प्रतिबंध लगाना चाहियें, जो उन देशों में प्रतिबंधित हैं, जहां उनका निर्माण हुआ है।












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