Election Report Card: 5 चुनावी राज्यों में बीजेपी का हिसाब-किताब: कहां बन रही सरकार, कहां बिगड़ रहे समीकरण?
Election Report Card: देश की राजनीति अगले 30 दिनों में बड़ा मोड़ लेने वाली है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि बीजेपी के लिए भविष्य का रोडमैप तय करने वाले हैं। कहीं महज 5% वोट का स्विंग सरकार बना सकता है, तो कहीं एकजुट वोट बैंक पूरी बाज़ी पलट सकता है।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के वोट खिसके तो सत्ता बदल सकती है, जबकि असम में मुस्लिम वोटों की एकजुटता बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में सवाल यही है-क्या बीजेपी इन चुनावों में अपना दबदबा और बढ़ाएगी या कुछ राज्यों में उसे बड़ा झटका लगेगा? यही समझने के लिए हम लाए हैं 5 राज्यों का पूरा चुनावी रिपोर्ट कार्ड।

🔷पश्चिम बंगाल: 5% वोट से पलट सकता खेल (West Bengal Election Analysis)
पश्चिम बंगाल में मुकाबला सीधे ममता बनर्जी की TMC और बीजेपी के बीच सिमटता दिख रहा है। 2015 में जब कैलाश विजयवर्गीय को बंगाल की जिम्मेदारी दी गई थी, तब पार्टी की मौजूदगी बेहद सीमित थी। लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 18 सीटें जीतकर बड़ा उछाल दिखाया और 2021 विधानसभा चुनाव में 77 सीटों के साथ मजबूत विपक्ष बनकर उभरी।
अब 2026 के चुनाव में बीजेपी सरकार के सबसे करीब मानी जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि अगर बीजेपी TMC के सिर्फ 5% वोट भी खींच लेती है, तो 10% के मार्जिन से हारी सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। इससे उसकी सीटें 150 के पार जा सकती हैं। एंटी-इनकम्बेंसी, बेरोजगारी और स्थानीय असंतोष बीजेपी के लिए बड़ा मौका बन सकते हैं।
🔷असम: मुस्लिम वोट तय करेगा सत्ता का रास्ता (Assam Election Analysis)
असम में बीजेपी की स्थिति मजबूत जरूर है, लेकिन यहां का समीकरण बेहद संवेदनशील है। हिमंता बिस्व सरमा के नेतृत्व में पार्टी तीसरी बार सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है।
2016 में बीजेपी ने पहली बार राज्य में सरकार बनाई और 2021 में दोबारा जीत दर्ज की। लेकिन 2026 में सबसे बड़ा फैक्टर है राज्य की 34% मुस्लिम आबादी। अगर ये वोट कांग्रेस और AIUDF के बीच बंटता है, तो बीजेपी को फायदा होगा। लेकिन अगर मुस्लिम वोट एकजुट हो गया, तो मुकाबला बेहद कठिन हो सकता है। बीजेपी यहां बांग्लादेशी घुसपैठ और पहचान की राजनीति को मुद्दा बनाकर हिंदू वोटों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
🔷तमिलनाडु: विकल्प बनने की लड़ाई (Tamil Nadu Election Analysis)
तमिलनाडु में बीजेपी के लिए चुनौती अलग तरह की है। यहां दशकों से DMK और AIADMK का वर्चस्व रहा है। बीजेपी को "बाहरी पार्टी" की छवि से बाहर निकलना सबसे बड़ा टास्क है।
पूर्व IPS अधिकारी के अन्नामलाई के नेतृत्व में पार्टी ने आक्रामक रणनीति अपनाई है। उनकी 'एन मन, एन मक्कल' यात्रा ने बीजेपी को गांव-गांव तक पहुंचाया। 2024 लोकसभा चुनाव में सीट नहीं जीत पाने के बावजूद बीजेपी का वोट शेयर 11.2% तक पहुंच गया, जो पहले 2.6% था। अब 2026 में AIADMK के साथ गठबंधन कर बीजेपी खुद को एक मजबूत विकल्प के तौर पर स्थापित करना चाहती है।
🔷केरल: तीसरे मोर्चे से 'किंगमेकर' तक (Kerala Election Analysis)
केरल लंबे समय से बीजेपी के लिए सबसे कठिन राज्यों में रहा है। यहां सत्ता हमेशा LDF और UDF के बीच घूमती रही है। 2016 में बीजेपी ने पहली बार एक सीट जीती, लेकिन 2021 में फिर शून्य पर आ गई। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में सुरेश गोपी की जीत ने पार्टी को नई उम्मीद दी।
इसके अलावा निकाय चुनावों में तिरुवनंतपुरम नगर निगम में जीत ने बीजेपी को मजबूती दी है। लेकिन यहां 45% मुस्लिम और ईसाई आबादी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है। बीजेपी इस बार ईसाई समुदाय को साधने की कोशिश कर रही है और स्थानीय दलों के साथ गठबंधन कर रही है। लक्ष्य साफ है-सीधे सत्ता नहीं, बल्कि 'किंगमेकर' बनना।
🔷पुडुचेरी: गठबंधन से सत्ता बचाने की चुनौती (Puducherry Election Analysis)
पुडुचेरी में बीजेपी ने गठबंधन राजनीति के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की है। एन. रंगास्वामी की पार्टी AINRC के साथ मिलकर 2021 में सरकार बनाई गई थी। बीजेपी ने 9 में से 6 सीटें जीतकर चौंकाया था। साथ ही नॉमिनेटेड विधायकों के जरिए अपनी ताकत और बढ़ा ली।
अब 2026 में बीजेपी की कोशिश सत्ता बरकरार रखने के साथ-साथ अपनी सीटें बढ़ाने की है। पार्टी दक्षिण भारत में यह संदेश देना चाहती है कि वह क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर स्थिर सरकार चला सकती है।
हां फायदा, कहां नुकसान?
अगर पांचों राज्यों का कुल मिलाकर विश्लेषण करें, तो बीजेपी बंगाल और असम में सबसे मजबूत स्थिति में दिख रही है, लेकिन दोनों जगह अलग-अलग चुनौतियां हैं। तमिलनाडु और केरल में पार्टी विस्तार की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि पुडुचेरी में सत्ता बचाना प्राथमिकता है।
आने वाले 30 दिन तय करेंगे कि बीजेपी इन राज्यों में अपनी पकड़ और मजबूत करती है या फिर कुछ जगहों पर उसे झटका लगता है। चुनावी गणित साफ है-कहीं 5% वोट से सरकार बन सकती है, तो कहीं एकजुट वोट बैंक पूरी तस्वीर बदल सकता है।












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