Kolkata का ‘काला सिंडिकेट’ बेनकाब! Sonu Papu कौन है? पूर्व DCP शांतनु संग TMC से कनेक्शन
ED Exposed Bengal Syndicates: पश्चिम बंगाल में भाजपा की भारी चुनावी जीत के बाद हलचल मच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य में आपराधिक सिंडिकेट्स के खिलाफ अब तक की सबसे आक्रामक मुहिम शुरू कर दी है। इस बार ED का निशाना है कोलकाता का काला सिंडिकेट, जिसके दो प्रमुख चेहरे हैं कि पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास और कुख्यात अपराधी बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू।
दोनों के बीच का गठजोड़ सिर्फ अपराध का नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण का भी प्रतीक माना जा रहा है। ED की जांच में खुलासा हुआ है कि ये दोनों मिलकर भूमि हथियाने, जबरन वसूली, अवैध निर्माण और हवाला का विशाल रैकेट चलाते थे।

Who Is Sona Papu: सोना पप्पू कौन है? 'टीएमसी का गोल्डन बॉय'
बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू बंगाल के अपराध जगत का एक जाना-पहचाना और विवादित नाम है। उन पर 15 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या का प्रयास, जबरन वसूली, शस्त्र कानून का उल्लंघन, डराने-धमकाने और अवैध रियल एस्टेट गतिविधियां शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल में TMC के लंबे शासनकाल के दौरान सोना पप्पू को 'अछूत' माना जाता था। पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई उन तक शायद ही पहुंच पाती थी। उनकी कई तस्वीरें TMC के बड़े नेताओं के साथ वायरल हुई थीं, जिससे उनके गहरे राजनीतिक संबंधों की चर्चा हमेशा रहती थी।
भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान आरोप लगाया था कि सोना पप्पू अभिषेक बनर्जी का दाहिना हाथ था, जिस वजह से उसे खुली छूट मिली हुई थी। ED की अदालत में दायर रिपोर्ट के अनुसार, पप्पू ने कई प्रॉपर्टी मालिकों को जान से मारने की धमकी देकर उनकी हाई-वैल्यू संपत्तियां औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर किया। एक मामले में 5 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी मात्र 1 करोड़ रुपये में ट्रांसफर कराई गई।
गिरफ्तारी के समय सोना पप्पू ने मीडिया से कहा कि मैं एक कारोबारी हूं, अपराधी नहीं। लेकिन ED की जांच इस दावे से पूरी तरह उलट तस्वीर पेश कर रही है।
Former DCP Shantanu Sinha: पूर्व DCP शांतनु सिन्हा विश्वास, यूनिफॉर्म में अपराध?
शांतनु सिन्हा विश्वास कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर थे। उन्होंने ममता बनर्जी के कालीघाट आवास वाले उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र की देखरेख की जिम्मेदारी संभाली थी। यह पद उन्हें TMC शासन में खास विश्वास का प्रतीक माना जाता था।
ED का आरोप है कि सेवानिवृत्ति के बाद विश्वास ने अपनी पुलिसिया जानकारी और संपर्कों का इस्तेमाल कर सोना पप्पू के साथ मिलकर एक शक्तिशाली सिंडिकेट चलाया। इस सिंडिकेट में शामिल थे:-
- जबरन भूमि हड़पना
- निर्माण परियोजनाओं में कट-मनी वसूली
- रेत तस्करी
- हवाला के जरिए बड़े वित्तीय लेनदेन
विश्वास का नाम तब सामने आया जब ED ने सन एंटरप्राइज के मैनेजिंग डायरेक्टर जॉय कामदार को गिरफ्तार किया। कामदार से बरामद व्हाट्सएप चैट और डिजिटल डेटा से 2.5 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ।
चुनाव के बाद ED की बड़ी छापेमारी
4 मई 2026 को विधानसभा चुनाव नतीजे आने के ठीक एक दिन बाद शांतनु विश्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया। 15 मई को ED ने उन्हें 11 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। 22 मई 2026 की सुबह ED ने अपने सबसे बड़े अभियान में कोलकाता और मुर्शिदाबाद के नौ ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। इनमें शामिल थे:-
- मुर्शिदाबाद के कंडी में विश्वास का आलीशान पैतृक घर
- कोलकाता का एक पॉश होटल
- एक बिजनेसमैन का आवास
- कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर का घर
कंडी में घर बंद मिला। ED अधिकारियों ने फाटक तोड़कर प्रवेश किया। विश्वास की बहन गौरी सिन्हा विश्वास, जो कंडी नगर पालिका की उपाध्यक्ष हैं, मौजूद नहीं थीं। इस बार स्थानीय लोगों ने कोई विरोध नहीं किया, यह दृश्य 2024 के संदेशखाली कांड से बिल्कुल अलग था।
TMC का संरक्षण और सांठगांठ
ED की जांच में जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ है, वह है अपराध, पुलिस और राजनीति का त्रिकोण। TMC शासन में सोना पप्पू जैसे अपराधी बेखौफ घूमते थे क्योंकि उन्हें ऊपरी स्तर से संरक्षण मिला हुआ था।
भाजपा का आरोप है कि TMC ने इन सिंडिकेट्स को पनपने दिया ताकि पार्टी की फंडिंग और स्थानीय स्तर पर नियंत्रण बना रहे। अब सत्ता बदलने के बाद केंद्रीय एजेंसियां इन नेटवर्क को तोड़ने में जुटी हैं।
हवाला और अंतरराष्ट्रीय लिंक क्या है?
जांच सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। ED को अवैध अंतरराष्ट्रीय हवाला लेनदेन के सबूत भी मिले हैं। यह दर्शाता है कि कोलकाता का यह काला सिंडिकेट बंगाल की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ था। रेत तस्करी रैकेट में भी विश्वास और पप्पू की संलिप्तता की अलग जांच चल रही है।
आगे क्या हो सकता है?
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। अगर ED की पूछताछ में और बड़े नाम सामने आए तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ सकता है।
- TMC ने इसे 'राजनीतिक बदला' बताया है।
- भाजपा इसे 'कानून का राज' स्थापित करने की प्रक्रिया बता रही है।
आम बंगालवासी लंबे समय से सिंडिकेट राज, जबरन वसूली और भूमि हड़पने से परेशान थे। ED की इस कार्रवाई को उन्होंने राहत की सांस के रूप में देखा है। कोलकाता का काला सिंडिकेट अब बेनकाब हो चुका है। सोना पप्पू और शांतनु विश्वास की गिरफ्तारी सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि एक पूरे सिस्टम की गिरफ्तारी है। आने वाले दिनों में अगर ED और बड़े खुलासे करती है तो पश्चिम बंगाल में अपराध और राजनीति के गठजोड़ की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। यह मामला राज्य में प्रशासनिक सफाई, कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मांग को और मजबूत करेगा।













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