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Pralay Missile: DRDO की नई मिसाइल 'प्रलय', अगर उधमपुर से दागी तो इस्लामाबाद कर देगी खत्म! जानें खासियत

Pralay Missile: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी कि DRDO ने मंगलवार को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आईलैंड से 'प्रलय' मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल पूरी तरह से भारत निर्मित है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, यह मिसाइल जंग के दौरान पेलोड (संभवत: ज्यादा वजन वाले बम) सामग्री ले जाने में सक्षम है।

DRDO ने सोशल मीडिया साइट 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि DRDO ने 28 और 29 जुलाई 2025 को ओडिशा के तट से दूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आईलैंड से प्रलय मिसाइल के दो सफल परीक्षण किए।

Pralay Missile

उम्मीद के मुताबिक मिले नतीजे

वहीं मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि मिसाइल प्रणाली की अधिकतम और न्यूनतम सीमा क्षमताओं को बताने लिए यह टेस्टिंग अलग-अलग हिस्सों में की गई। DRDO ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में यह भी कहा कि मिसाइलों ने उम्मीद के मुताबिक नतीजे दिए हैं और पूरी प्रक्रिया के बाद अपने टारगेट तक पहुंची।

सेंसर से मिले डेटा ने दिए बेहतर नतीजे

बयान में आगे कहा गया, "सभी सब-सिस्टम ने अपेक्षा के हिसाब से प्रदर्शन किया, जिसे इंटिग्रेटेड टेस्ट रेंज द्वारा तैनात किए गए अलग-अलग ट्रैकिंग सेंसर द्वारा कैप्चर किया गया डेटा भी दिया। जो बताता है कि इस मिसाइल ने अपन टारगेट्स को हिट किया है। इसके नतीजों को पहले से तय एक जगह पर शिप को तैनात कर उन्हें दोबारा रिकॉर्ड किया गया। ये परिणाम दोनों ही पैमानों पर सटीक उतरे।

रक्षा मंत्रायल ने बताई खासियत

रक्षा मंत्रालय ने कहा, "प्रलय एक स्वदेशी रूप से विकसित सोलिड प्रोपेलेंट क्वेसी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता एक दम सटीक है। ये मिसाइल हाईटेक गाइडेंस और नेविगेशन का इस्तेमाल करती है।" यह कम दूरी की सतह से सतह (Surface to Surface) पर मार करने वाली मिसाइल है, जिसकी पेलोड क्षमता 500 से 1,000 किलोग्राम है।

कितनी है मिसाइल की रेंज?

यह मॉर्डन वॉरफेयर में वजनदार पेलोड ले जाने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिसकी मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर है। यानी कि इसे दिल्ली से दागा जाए तो जयपुर के किसी भी इलाके को आसानी से निशाना बना सकती है। अगर जम्मू के उधमपुर से दागा जाए तो आसानी से इस्लामाबाद को आसानी से टारगेट कर सकती है।
DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने टीमों को बधाई देते हुए कहा कि इस फेज-1 के फ्लाइट टेस्ट ने इसे डिफेंस फोर्सेस में शामिल कराने का रास्ता और मजबूत कर दिया है।मिसाइल सिस्टम को Research Centre द्वारा कई DRDO प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित किया गया था।

4 दिन पहले हुआ था एक और मिसाइल का टेस्ट

इससे पहले 25 जुलाई को, DRDO ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल में राष्ट्रीय ओपन एरिया रेंज (एनओएआर) में मानव रहित हवाई वाहन से प्रक्षेपित प्रिसीजन गाइडेड मिसाइल ULPGM-V3 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। यूएलपीजीएम-वी3, DRDO द्वारा विकसित पहले के ULPGM-V2 मिसाइल का अपडेटेड वर्जन है।

क्या है ULPGM-V3 मिसाइल की खासियत?

DRDO के मुताबिक, मिसाइल में एक हाई-डेफिनिशन, डुअल-चैनल रिसीव कर सकती है जो कई टारगेट्स को एक भेदने में सक्षम है और इसे मैदानी और पहाड़ी दोनों ही क्षेत्रों में लॉन्च किया जा सकता है। इसमें दिन-रात की क्षमता है और पोस्ट-लॉन्च टारगेट्स अपडेट के लिए दो-तरफा डेटा लिंक है। यह मिसाइल दुश्मन के हाईटेक डिफेंस सिस्टम और मिसाइल लॉन्च सिस्टम और यहां तक कि बंकर अंदर तक नुकसान पहुंचा सकती है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कॉमेंट में बताएं।

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