पोखरण में DRDO और एयरफोर्स ने SANT मिसाइल का किया सफल परीक्षण
नई दिल्ली, 11 दिसंबर: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने शनिवार को पोखरण रेंज से स्टैंड-ऑफ एंटी टैंक ( सैंट) मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इसमें स्टैंड-ऑफ एंटी-टैंक मिसाइल के अलावा पिनाक एक्सटेंडेड रेंज सिस्टम, एरिया डिनायल म्यूनिशंस और न्यू इंडीजिनस फ्यूज शामिल हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने टेस्ट टीम को बधाई दी है।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि टेस्टिंग अपने सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा करने में सफल रहा। रिलीज सिस्टम, एडवांस गाइडेंस और ट्रैकिंग एल्गोरिदम, एकीकृत सॉफ्टवेयर के साथ सभी एवियोनिक्स, संतोषजनक ढंग से प्रदर्शन किया और ट्रैकिंग सिस्टम ने सभी मिशन कार्यक्रमों की निगरानी की है। स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित हेलीकॉप्टर से लॉन्च की गई मिसाइल में 10 किलोमीटर तक की सीमा में लक्ष्य को बेअसर करने की क्षमता है।
यह अत्याधुनिक मिलीमीटर वेव (MMW) सीकर से लैस है जो सुरक्षित दूरी से उच्च परिशुद्धता स्ट्राइक क्षमता प्रदान करता है। डीआरडीओ ने सेना के साथ मिलकर पिछले तीन दिनों के दौरान फील्ड फायरिंग रेंज में इन स्वदेशी निर्मित रॉकेटों के लांचिग परीक्षणों की सीरीज आयोजित की। इन परीक्षणों में, उन्नत रेंज के पिनाक रॉकेटों का विभिन्न वार हेड क्षमताओं के साथ विभिन्न रेंजों पर परीक्षण किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उड़ान परीक्षण ने अपने सभी मिशन उद्देश्यों को हासिल कर लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिशन से जुड़ी टीम को बधाई दी। डीआरडीओ द्वारा जारी स्लो-मोशन वीडियो में सैंट मिसाइल को हेलीकॉप्टर से लॉन्च होते हुए और लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाते हुए दिखाया गया है।भारतीय वायु सेना के शस्त्रागार को और मजबूत करते हुए लंबी दूरी के बम और स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (SAAW) के बाद हाल के दिनों में परीक्षण किए जाने वाले स्वदेशी स्टैंड-ऑफ हथियारों की श्रृंखला में सैंट मिसाइल का तीसरा परीक्षण है।
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मंत्रालय ने कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकियों के साथ स्वदेशी विकास "रक्षा में 'आत्मनिर्भर भारत' की ओर एक मजबूत कदम है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने कहा कि सैंट मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण से स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को और बढ़ावा मिलेगा। सैंट मिसाइल को अनुसंधान केंद्र इमारत (RCI), हैदराबाद द्वारा अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के समन्वय और उद्योगों की भागीदारी के साथ डिजाइन और विकसित किया गया है।












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