BSF के अधिकार क्षेत्र को लेकर पंजाब सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, केंद्र को नोटिस जारी
नई दिल्ली, 11 दिसंबर: पंजाब सरकार ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स( बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर अंदर तक बढ़ाने के केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। दरअसल हाल ही में केंद्र सरकार ने पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर अंदर तक बढ़ा दिया था। जो पहले 15 किमी तक हुआ करती थी। यही नहीं भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने हाल ही में पंजाब के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और असम में बीएसएफ अधिनियम में संशोधन किया है।

संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत दायर मुकदमे को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार ने केंद्र सरकार को अटॉर्नी जनरल के जरिये नोटिस जारी कर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। बता दें कि, संविधान का अनुच्छेद 131 राज्य और केंद्र सरकार के बीच विवादों पर सुप्रीम कोर्ट को फैसला देने का विशेष अधिकार देता है. इसके साथ ही अगर राज्य से राज्य का कोई विवाद हो तो उस स्थिति में भी यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को निर्णय का विशेष अधिकार देता है।
अब चार हफ्ते बाद ही ये मामला सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आएगा। बीएसएफ के कार्य और अधिकार क्षेत्र का दायरा बढ़ाने की ये अधिसूचना 11 अक्तूबर को जारी की गई थी। पंजाब सरकार ने केंद्र के इस कदम को संघीय ढांचे पर प्रहार करने और राज्यों के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करने वाला बताया है। सुप्रीम कोर्ट में मामले के पहुंचने पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने खुशी जाहिर की है।
केंद्र सरकार के फैसले पर एतराज जताते हुए पंजाब सरकार ने कहा कि, केंद्र के इस फैसले का असर पाकिस्तान से लगने वाले इलाके वाले जिलों के 80 फीसदी भूभाग पर पड़ेगा, जबकि संविधान ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस का अधिकार राज्य सूची में रखा यानी ये अधिकार राज्य सरकार को दिया हुआ है। लेकिन यहां इस अधिसूचना के जरिए राज्यों के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण बताया है। पंजाब ने कहा है कि केंद्र सरकार ने इस फैसलो को लागू करने से पहले राज्य से सलाह तक नहीं ली।
पंजाब सरकार और इसकी लीगल टीम को बधाई देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि संघीय ढांचे और राज्यों की स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए संविधान में निहित सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए संघर्ष शुरू हो गया है। इससे पहले सिद्धू ने केंद्र के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि सरकार देश के संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है। सिद्धू ने अपने ट्वीट में आगे कहा, "केंद्र को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया गया है।












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