धनंजय सिंह की BJP के साथ डील! अमित शाह ने बिछा दी बिसात, राजा भैया का क्या है रोल?
लोकसभा चुनाव के दौरान कई सीटों बड़े राजनीतिक बदलाव के लिए भूमिका तैयार हो रही है। इस बीच बीजेपी और धनंजय सिंह के साथ गठजोड़ की चर्चा है। जिसमें नाम कुंडा से विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के नेता राजा भैया का भी आया। हालांकि अमित शाह से मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद धनंजय और उनकी पत्नी श्रीकला रेड्डी ने चुनाव से अपने कदम पीछे खींचे। इस बीच दोनों बाहुबली नेताओं ने अपने राजनीतिक करीबियों के साथ बैठकें कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के बीच जौनपुर से पूर्व धनंजय सिंह और श्रीकला रेड्डी की भाजपा के करीबी बढ़ने की चर्चाएं जोरों पर हैं। हालांकि बाहुबली नेता किस करवट बैठेंगे इसको लेकर स्थिति साफ नहीं है।

शाह से राजा भैया ने की थी मुलाकात
बीजेपी ने अपने वर्तमान सांसद विनोद सोनकर को ही टिकट दिया है। हालांकि राजा भैया इस बार कौशांबी लोकसभा सीट से अपने सहयोगी शैलेंद्र कुमार को चुनाव लड़ाना चाहते थे। उन्होंने इससे पहले
लेकिन इसके बाद बैंगलुरु में राजा भैया और अमित शाह की मुलाकाल की, लेकिन बीजेपी से बात नहीं बन पाई। हालांकि अमित शाह ने राजा भैया को उचित मान सम्मान का भरोसा दिया है। अगर इतने पर ही राजा मान गए तो फिर मंगलवार की बैठक में वे बीजेपी को समर्थन देने का फैसला कर सकते हैं।
14 मई को ही दोनों बाहुबलियों की बैठक क्यों?
इस लोकसभा चुनाव में बाहुबली समीकरण प्रभावी कम दिख रहा है। इस बीच राजा भैया और धनंजय सिंह की अलग- अलग बैठकें क्या रंग लाएंगी, ये कहना मुश्किल हो रहा है। लेकिन एक बात है तो है कि दोनों नेताओं ने एक ही दिन यानी 14 मई को अहम बैठकें की। धनंजय सिंह ने जौनपुर में अपने घर पर मीटिंग बुलाई, तो राजा भैया ने प्रतापगढ़ में अपने बेंती पैलेस पर जनसत्ता दल के नेताओं के साथ बैठक की।
जौनपुर का राजनीतिक समीकरण
बीजेपी ने इस बार लोकसभा चुनाव में जौनपुर से कृपा शंकर सिंह को कैंडिडेट बनाया है। दावा ये किया जा रहा है कि धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी अगर यहां बसपा के टिकट के पर चुनाव लड़ती तो बीजेपी के लिए राहें मुश्किल हो जातीं। बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी यहां से चुनाव हार चुकी है। ऐसे में इस बीच शाह ने अगल रणनीति बनाई है, जो कामयाब होती दिख रही है।
धनंजय सिंह की सोमवार को बैठक के बाद अब कयास ये लगाए जा रहे हैं कि वे बीजेपी पक्ष में बड़ा ऐलान कर सकते हैं। ऐसे कई मौके आए जब राजा भैया ने बीजेपी का समर्थन किया। हालांकि ऐसे में उनके अखिलेश यादव से भी संबंध खराब हुए। वर्ष 2018 के राज्य सभा चुनाव की बात करें तो राज भैया ने सपा को वोट नहीं दिया। हालांकि राजा भैया के बारे में ये भी कहा जाता है कि वे बिना शर्त गठबंधन को निभाते हैं। लेकिन इस बार धनंजय और बीजेपी के नजदीकियों के बीच राजा भैया का जिक्र आया है तो ये बिना शर्त होने की संभावना कम है।












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