Delta variant: किन लोगों को है कम खतरा, शोध से पता चल गया
नई दिल्ली, 7 जुलाई: कोविड 19 की डेल्टा वेरिएंट भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में चिंता की वजह बनी हुई है। कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट या बी.1.617.2 को इसी वजह से डेल्टा प्लस वेरिएंट ऑफ कंसर्न का दर्जा दिया गया है। गौरतलब है कि भारत में दूसरी लहर के लिए डेल्टा वेरिएंट ही जिम्मेदार है। देश की कई बेहतरीन संस्थाओं के शोधकर्ताओं ने मिलकर डेल्टा वेरिएंट पर वैक्सीन के प्रभाव का अध्ययन किया है। इससे पता चला है कि कोविड से ठीक हुए मरीज, जिन्होंने वैक्सीन की सिंगल या डबल डोज लगा रखी है, वह सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं।

डेल्टा वेरिएंट चिंता की वजह क्यों है
कोरोना वायरस का यह वेरिएंट इंसान के इम्यून सिस्टम को जल्द तबाह कर देता है और मानव अंगों में प्रवेश कर जाता है। नए वेरिएंट की स्पाइक प्रोटीन की संरचना में बदलाव आ जाने से इंसानी शरीर को ऑरिजनल कोविड स्ट्रेन से ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। असल में डेल्टा वेरिएंट में दो और म्यूटेशन का जेनेटिक कोड भी मिल चुका है 'ई484क्यू' और 'एल452आर'। इसलिए इसका संक्रमण तेजी से फैलता है और महामारी की स्थिति गंभीर बन जाती है।

डेल्टा से किन लोगों को कम खतरा है
एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें पता चला है कि डेल्टा वेरिएंट से कौन लोग ज्यादा सुरक्षित हैं। यह स्टडी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरोसर्जरी, कमांड हॉस्पिटल (सदर्न कमांड), पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने की है। इनके मुताबिक कोरोना से ठीक हो चुके वे मरीज, जिन्होंने कोविड वैक्सीन की एक या दोनों डोज ले ली है, वह डेल्टा वेरिएंट से सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं। स्टडी का परिणाम यह कहता है कि वैक्सीन लगवाने के बाद इंफेक्टेड हुए लोग (ब्रेकथ्रू इंफेक्शन) और कोविड 19 से ठीक होकर वैक्सीन की सिंगल या डबल डोज ले चुके लोग उन लोगों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित हैं, जो कभी संक्रमित नहीं हुए और जो लोग दोनों डोज लगवा चुके हैं।

किन लोगों पर की गई डेल्टा वेरिएंट की स्टडी
इस शोध में 5 तरह के लोगों को शामिल किया गया है। जिन्हें कोविड वैक्सीन की एक डोज लगी थी, दो डोज लगी थी, कोविड से ठीक हो चुके वो मरीज जिन्हें एक डोज लग चुकी है, कोविड से ठीक हुए मरीज जिन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है और कोविड-19 की वैक्सीन लगवाने के बाद इससे संक्रमित (ब्रेकथ्रू इंफेक्शन) हुए लोग।

डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कितनी प्रभावी है
आईसीएमआर के मुताबिक जो भी वैक्सीन उपलब्ध है फेज 3 ट्रायल में ऑरिजनल स्ट्रेन के खिलाफ वह 51 फीसदी से लेकर 94 फीसदी तक प्रभावी है। जबकि, इसके मुताबिक सामने आई नई वायरस ऑफ कंसर्न का वैक्सीन लगा चुके लोगों पर असर का आगे भी आकलन जारी है।

कोविड की नई वेरिएंट का बचाव क्या है
कोरोना का सबसे बेहतर बचाव यही है कि कोविड अनुकूल व्यवहार करें और डबल मास्क पहनकर ही निकलें। जितनी जल्दी हो सके वैक्सीन लगवाएं। क्योंकि, वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी प्राप्त करने के लिए इस समय इससे बेहतर विकल्प नहीं है और यही संक्रमण को रोक सकता है और बीमारी की गंभीरता को टाल सकता है।
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