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डेल्टा प्लस वैरिएंट के खिलाफ सिर्फ वैक्सीन काफी नहीं, क्या है बचाव WHO ने बताया

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नई दिल्ली, 27 जून: कोरोना वायरस की डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर पूरे विश्व में चिंता बढ़ती जा रही है। दुनिया के कम से कम 12 देशों में इसके केस सामने आ चुके हैं। भारत के कई राज्यों में भी इसके मामले मिले हैं। मौजूदा वैक्सीन इस वैरिएंट पर आखिरकार कितनी असरदार है, इसको लेकर अभी भी रिसर्च चल रहे हैं। वैसे कुछ सकारात्मक रिपोर्ट भी सामने आ रही हैं। लेकिन, इसको लेकर चिंता है ज्यादा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन तो इस वैरिएंट को लेकर बहुत ही ज्यादा सतर्क है। उसके एक प्रतिनिधि ने दो टूक कह दिया है कि सिर्फ वैक्सीन के भरोसे ना रहें और डेल्टा प्लस वैरिएंट से सुरक्षित रहना है तो मास्क जैसे जरूरी एहतियात जरूर अपनाएं।

वैक्सीन के साथ मास्क ही डेल्टा प्लस से सुरक्षा- डब्ल्यूएचओ

वैक्सीन के साथ मास्क ही डेल्टा प्लस से सुरक्षा- डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक प्रतिनिधि ने कोरोना वायरस के डेल्टा प्लैस वैरिएंट का लेकर साफ कहा है कि सिर्फ वैक्सीनेशन से इसका बचाव संभव नहीं है, बल्कि बाकी एहतियाती उपाय भी अत्यंत जरूरी हैं। रूस में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि मेलिता वुजलोविक ने एक यू ट्यूब शो में कहा है कि 'वैक्सीनेशन के साथ मास्क जरूरी है, क्योंकि डेल्टा के लिए सिर्फ वैक्सीन काफी नहीं है। हमें थोड़े समय के लिए कोशिश करने की आवश्यकता है, नहीं तो लॉकडाउन लगाना पड़ेगा।' उनका कहना है कि 'वैक्सीनेशन तो जरूरी है, क्योंकि यह वायरस के संक्रमण की संभावना को कम करती है और बीमारी के गंभीर होने के खतरे को टालती है। लेकिन, इसके साथ ही बाकी उपायों को अपनाने की उतनी ही आवश्यकता है।' केंद्र सरकार के मुताबिक अमेरिका और इंग्लैंड समेत 12 और देशों में यह वैरिएंट पाया जा चुका है।

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    कई राज्यों में डेल्टा प्लस वैरिएंट दे चुका है दस्तक

    कई राज्यों में डेल्टा प्लस वैरिएंट दे चुका है दस्तक

    इसी महीने डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस की अपनी लिस्ट में डेल्टा वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ कंसर्न के रूप में शामिल किया है, जो कि कई दशों में कोविड-19 के नए मामलों के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। डेल्टा प्लस वैरिएंट कोविड-19 के डेल्टा स्ट्रेन का म्यूटेशन है, जो कि सबसे पहले महराष्ट्र में पाया गया था। हालांकि डेल्टा प्लस की गंभीरता के बारे में अभी तक बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। भारत में भी डेल्टा प्लस को वैरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित किया जा चुका है। भारत में अभी तक यह वैरिएंट महाराष्ट्र, केरल, मध्य प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, तमिलनाडु के अलावा पंजाब में मिल चुका है। पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश में इससे संक्रमित मरीज की मौत की पहली घटना सामने आई थी। लेकिन, उस मरीज को कोरोना का टीका नहीं लगा था। 25 जून को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि तबतक देश में डेल्टा प्लस वैरिएंट के 48 मरीजों का पता चला है।

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    वैक्सीन के असर को लेकर सकारात्मक नतीजे!

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    इस बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने शनिवार को कहा है कि मौजूदा वैक्सीन कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट पर कितनी प्रभावी है, इसपर शोध जारी है। हालांकि, एक रिपोर्ट के मुताबिक यूनाइटेड किंग्डम की पब्लिक हेल्थ संस्था ने दावा किया है कि भारत में मौजूदा वैक्सीन डेल्टा प्लस कोविड वैरिएंट के खिलाफ शुरआती जांच में कारगर पाई गई हैं। गौरतलब है कि कोविशील्ड समेत बाकी वैक्सीन को पहले ही डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी पाया गया था। हालांकि, यूके की संस्था के मुताबिक कोरोना के इलाज में काम आने वाली मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल को डेल्टा प्लस वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी नहीं पाया गया है।

    English summary
    Delta plus variant:To protect against Delta Plus, both the vaccine and the mask are necessary, the representative of the WHO told
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