आत्मनिर्भर भारत के तहत तैयार हुई स्वदेशी वैक्सीन ZyCov-D, पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों की थपथपाई पीठ
नई दिल्ली, 20 अगस्त। कोरोना वायरस की संभावित तीसरी लहर की चिंता के बीच आज (शुक्रवार) सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने दुनिया में पहली डीएनए आधारित और सुई-मुक्त फार्मास्यूटिकल कंपनी जायडस कैडिला की वैक्सीन ZyCov-D के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी। 12 साल से अधिक उम्र के लोगों को ये वैक्सीन लगाई जा सकती है। वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर भारत के वैज्ञानिकों की प्रशंसा की है। पीएम मोदी ने इसे कोरोना के खिलाफ जंग में बड़ी उपलब्धि बताया है।

गुजरात के अहमदाबाद में स्वदेशी रूप से विकसित की गई कोरोना वायरस वैक्सीन ZyCov-D को भारतीय वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है। शोधकर्ताओं की पीठ थपथपाते हुए पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा,
भारत पूरे जोश के साथ कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। दुनिया के पहले डीएनए आधारित 'ZyCov-D' वैक्सीन जायडस कैडिला को मंजूरी भारतीय वैज्ञानिकों के अभिनव उत्साह का प्रमाण है। वास्वत में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
बता दें कि शुक्रवार को जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने जानकारी दी कि जायडस कैडिला टीके को 12 साल या इससे अधिक उम्र के लोगों को दिया जा सकता है। विभाग ने बताया कि डीएनए आधारित कोरोना वायरसरोधी दुनिया का पहला टीका है।
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आपको बता दें कि गुजरात के अहमदाबाद स्थित फार्मास्यूटिकल कंपनी जायडस कैडिला द्वारा विकसित वैक्सीन ZyCov-D डीएनए बेस्ड दुनिया का पहला टीका है। भारत में कोरोना के खिलाफ इस्तेमाल को मंजूरी पाने वाला यह छठा टीका है। तीन खुराक वाली ये वैक्सीन कोविड 19 से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ट्वीट कर कहा कि ZyCov-D भारत में अप्रूवल पाने वाली छठी वैक्सीन है, इसे स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। इससे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के विजन को बल मिलेगा।












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