अब तक सुरक्षित बिहार- झारखंड में ट्रेनों में भरकर आ सकती है कोरोना महामारी, क्या है तैयारी?

बेंगलुरू। भारत में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस संक्रमण अब तक सुरक्षित बिहार और झारखंड में भी दस्तक दे सकती है। ऐसा इसलिए संभव है, क्योंकि 31 मार्च महाराष्ट्र समेत कई बड़े शहरों में लॉक डाउन की स्थिति में बिहार और झारखंड राज्यों से मजदूरी कर रहे दोनों राज्यों के वाशिंदे अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। निर्णायक सवाल यहै कि बिहार की नीतीश सरकार और झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार आ रही आफत को लेकर कितने तैयार हैं।

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बड़ा सवाल यह है कि अगर महाराष्ट्र से बिहार, यूपी और झारखंड लौट रहे पैसेंजर में से अगर एक- दो फीसदी भी कोरोना वायरस के संक्रमित हुए तो ट्रेन में सहयात्री पैसेंजरों के साथ-साथ उनके गृहनगर में भी कोरोना वायरस आसानी से पहुंच सकते हैं। इसकी तस्दीक रेल मंत्रालय की है। गत 13 मार्च को दिल्ली से रामागुंडम जाने वाली आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से यात्रा करने वाले 8 यात्रियों को कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है।

अगर ऐसा हुआ तो भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में और वृद्धि होना स्वाभाविक है। फिलहाल, भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 334 में पहुंच चुकी है, जिनमें से 5 की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि अपुष्टि खबरों के मुताबिक भारत में संक्रमितों की संख्या 333 पहुंच चुकी हैं, लेकिन सरकारी वेबसाइट पर यह दर्ज नहीं हैं।

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दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए महाराष्ट्र के चार बड़े शहरों को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया है। इनमें मुंबई, पुणे, पिंपरी चिंचवाड़ और नागपुर शामिल हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार मुंबई, जिसमें मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और ठाणे जिला शामिल हैं, उनमें 1 करोड़ से अधिक बिहार, झारखंड और बंगाल से आए प्रवासी रहते हैं, जिनमें से 30 फीसदी प्रवासी मुंबई के विभिन्न उपनगरों में आजीविका कमाते हैं।

चूंकि महाराष्ट्र में दुकानों और विभिन्न संस्थानों 31 मार्च तक बंद करने के दिशा-निर्देश हैं तो अब वहां काम करने रहे यूपी, बिहार, बंगाल और झारखंड के प्रवासी वापस अपने घरों की ओर लौट रहे हैं, जिससे उल्लेखित चारो राज्यों में शामिल पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में कोरोना का खतरा जहां बढ़ेंगा, वहीं अब तक कोरोना वायरस से सुरक्षित बिहार और झारखंड में कोरोना के संक्रमित मरीज मिलने का खतरा बढ़ सकता है।

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गौरतलब है भारत सरकार की वेबसाइट covidout.in के अनुसार शनिवार 21 मार्च 2020 दोपहर 3 बजे तक देश में कोरोना वायरस (COVID-19) कुल 326 मामलों की पुष्टि हुई है। संक्रमित लोगों में से 299 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं जबकि 23 लोग ठीक हो गए हैं। भारत में संक्रमित मरीजों के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं, जहां कुल 64 लोगों कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं और वहां एक मरीज की मौत भी हुई है।

सुखद बात यह है कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के अनुसार ITBP छावला क्वारंटाइन फैसिलिटी में मिलान (इटली) से लाए गए 215 लोगों के 7 दिन बाद किए गए टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। इनमें से 151 लोग पुरुष और 64 महिलाएं हैं। इनमें अधिकतर लोग इटली में पढ़ाई करते थे। गुरूग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती किए 16 इटालियन मरीज को लेकर भारत में पाए गए कुल 326 पॉजिटिव मरीजों में 41 मरीज विदेशी हैं।

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उल्लेखनीय है महाराष्ट्र में अब तक सर्वाधिक 74 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। दूसरे नंबर केरल है, जहां अब तक कुल 52 संक्रमित मरीज पाए गए हैं। कोरोना से प्रभावित तीसरे और चौथे बड़े राज्य दिल्ली और उत्तर प्रदेश हैं, जहां अब तक 26-26 मामले सामने आए हैं जबकि राजस्थान में कुल 23 संक्रमित मरीजों के मामले पाए गए हैं।

जबकि तेलंगाना, कर्नाटक और हरियाणा में क्रमवार 21, 19 और 18 संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं, गुजरात में 14 मरीज, लद्दाख और पंजाब में 13-13, मध्य प्रदेश,प. बंगाल और जम्मू-कश्मीर में 4-4, उत्तराखंड, तमिलनाडु में 6 और आंध्र प्रदेश में 5 मरीज पाए गए हैं और उड़ीसा और हिमाचल प्रदेश में 2-2 मरीज संक्रमित हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ में 1 मरीज संक्रमित मिला है।

यह भी पढ़ें- सूरत में धारा-144 लागू, लॉकडाउन की ओर बढ़ा शहर, गुजरात से महाराष्ट्र तक की बस सेवाएं रोकी गईं

स्टेशनों पर जमा थी भीड़, कोरोना संक्रमण का बड़ा खतरा

स्टेशनों पर जमा थी भीड़, कोरोना संक्रमण का बड़ा खतरा

महाराष्ट्र बंद होने की वजह से 20 मार्च को महाराष्ट्र के रेलवे स्टेशनों पर भीड़ उमड़ गई थी। खतरा इसने भी बढ़ा दिया है। दरअसल, हेल्थ मिनिस्ट्री बार-बार दूरी बनाकर रहने को कह रही है, इससे ही संक्रमण से बचा जा सकता है। लेकिन रेलवे स्टेशनों पर खचाखच भीड़ रही। इस वायरस के लक्षण कई केसों में बाद में दिखे हैं, ऐसे में अगर वहां किसी को संक्रमण हुआ तो उससे फैलने के चांस बहुत ज्यादा है। फिर जब वह शख्स यूपी-बिहार में अपने घर जाएगा तो हालात बिगड़ सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सलाह दी थी कि लोग बेवजह यात्रा न करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सलाह दी थी कि लोग बेवजह यात्रा न करें

कोरोना वायरस के लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऐहतियात बरतना न भूले, पैनिक न हों। केवल घर में ही रहना नहीं, बल्कि जिस शहर में आप हैं, वहीं रहने की जरूरत है। बेवजह यात्रा करने से आपको या किसी अन्य को फायदा नहीं होगा। इस समय हमारे द्वारा उठाए गए छोटे- छोटे कदमों का भी बड़ा असर होगा।

संपर्क क्रांति ट्रेन में 8 यात्री कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए

संपर्क क्रांति ट्रेन में 8 यात्री कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए

रेल मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया है कि गत 13 मार्च को दिल्ली से रामागुंडम जाने वाली आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से यात्रा करने वाले 8 यात्रियों को कल कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है।

22 मार्च को मध्य रेलवे की लगभग 60% उपनगरीय ट्रेनें चलेंगी

22 मार्च को मध्य रेलवे की लगभग 60% उपनगरीय ट्रेनें चलेंगी

मध्य रेलवे मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) के अनुसार मध्य रेलवे 22 मार्च को लगभग 60% उपनगरीय ट्रेनें चलेंगी। मेन और एचबी लाइन पर 22 मार्च रविवार को मेगा ब्लॉक को रद कर दिया गया है। कल कोई मेगा ब्लॉक नहीं होगा।

दिल्ली-मुंबई मेट्रो की सेवाएं रविवार 22 मार्च को रद्द कर दिया गया

दिल्ली-मुंबई मेट्रो की सेवाएं रविवार 22 मार्च को रद्द कर दिया गया

मुंबई मेट्रो और दिल्ली मेट्रों की सेवाएं रविवार 22 मार्च को एक दिन के लिए रद्द रहेंगी। यह फैसला लोगों को घर में रहने के लिए प्रोत्साहित करने और जनता कर्फ्यू को सफल बनाने के लिए लिया गया है।

टेस्टिंग सेंटर बढ़ाने को लेेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

टेस्टिंग सेंटर बढ़ाने को लेेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

पत्रकार प्रशांत टंडन द्वारा आज सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें कोरोना वायरस के मद्देनजर टेस्टिंग सेंटर की संख्या को बढ़ने के ललिए तत्काल निर्देश देने की मांग की गई है। प्रवासी भारतीयों को देखते हुए इसकी जरूरत और बढ़ गई है।

सैनेटाइजर्स और मास्क जरूरी वस्तुओं की सूची में शामिल हुआ

सैनेटाइजर्स और मास्क जरूरी वस्तुओं की सूची में शामिल हुआ

कोरोना वायरस को देखते हुए सरकार ने एन95 सहित मास्क और हैंड सैनेटाइजर्स को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में ला दिया है. ये सामग्री जून मध्य तक आवश्यक वस्तु की श्रेणी में रहेंगी. इसका उद्देश्य इनका उचित मूल्य बरकरार रहना और कालाबाजारी एवं जमाखोरी करने वालों पर कार्रवाई करना है.

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