राहुल-प्रियंका की जीत के पीछे चरमपंथी? माकपा नेता के बयान पर कांग्रेस बोली, 'BJP को खुश करने के लिए किया गया'
वायनाड लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की लोकसभा जीत को लेकर केरल की सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो के सदस्य ए. विजयराघवन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया था कि 'राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के जीत के पीछे चरमपंथी थे, उनकी सभाओं में चरमपंथी मौजूद थे।'
अब ए विजयराघवन की विवादास्पद टिप्पणी की कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और विभिन्न मुस्लिम समूह जैसे 'समस्था' और अन्य सुन्नी समूह भी सीपीआई (एम) ने तीखी आलोचना की है। इन लोगों ने वायनाड की जीत के खिलाफ इस बयान को अप्रिय और असंवेदनशील कहा है।

CPIM नेता ए. विजयराघवन ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ क्या कहा?
वायनाड में पार्टी की एक सभा में बोलते हुए विजयराघवन ने आरोप लगाया कि वायनाड निर्वाचन क्षेत्र में राहुल गांधी की चुनावी सफलता सांप्रदायिक समूहों के समर्थन के कारण थी। उन्होंने दावा किया कि प्रियंका गांधी के अभियान कार्यक्रमों में चरमपंथी गुट मौजूद थे। विजयराघवन ने एक फेसबुक पोस्ट में भी ये बात कही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने सांप्रदायिक ताकतों के समर्थन से दो बार इस सीट पर जीत हासिल की है।
केसी वेणुगोपाल बोले- RSS भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करेगा
विजयराघवन के बयान पर पलटवार करते हुए केसी वेणुगोपाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
''यहां तक कि संघ परिवार भी राहुल गांधी के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने से हिचकिचा सकता है। क्या सीपीएम आधिकारिक तौर पर इन विचारों का समर्थन करता है।''
वेणुगोपाल ने पूछा, ''सीपीएम का पोलित ब्यूरो सदस्य इस तरह की सांप्रदायिक भाषा में कैसे बोल सकता है? यह भाजपा को खुश करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। यह सिर्फ सीपीएम की टिप्पणी नहीं है, यह राहुल गांधी को सूली पर चढ़ाने के उद्देश्य से भाजपा की एक स्क्रिप्ट है।''
पीके कुन्हालीकुट्टी बोले- भाजपा पूरे देश में इसी तरह की रणनीति अपनाती है
आईयूएमएल नेता पीके कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की जीत अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता के कारण हुई है, ये बयान बहुसंख्यक सांप्रदायिकता को भड़काने की एक कोशिश है। भाजपा पूरे देश में इसी तरह की रणनीति अपनाती है। माकपा अब केरल में इसी तरह का प्रयोग कर रही है।












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