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Abujhmad Encounter: मुठभेड़ नहीं, यह थी सर्जिकल स्ट्राइक, जवानों ने नक्सलियों को ट्रेनिंग कैंप में घुसकर मारा

Naxal Encounter: दंतेवाड़ा बॉर्डर में सुरक्षा बल के जवानों ने एक बड़ी सफलता अर्जित करते हुए 30 से अधिक नक्सलियों को मार गिराया है। इस एनकाउंटर की देशभर में चर्चा हो रही है। छत्तीसगढ़ की सरकार इसे माओवादियों के ऊपर हुई बड़ी चोट बता रही है। लेकिन इतनी बड़ी सफलता यूं ही नहीं मिली है।

दंतेवाड़ा में नक्सलियों पर सबसे बड़े प्रहार की पटकथा 24 अगस्त को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश के बाद बनानी शुरू कर दी गई थी। दंतेवाड़ा और बीजापुर की सीमाओं पर बसा अमुझमाड़ बेहद दुर्गम और पहुंचविहींन इलाका माना जाता है,लेकिन सुरक्षबालों के जवान इस इलाके बीते कुछ समय से लगातार सक्रीय हैं।

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दरअसल घना इलाका होने की वजह से नक्सलियों ने यहां अपना ट्रेनिंग कैंप स्थापित किया था। नक्सली संगठन में भर्ती होने वाले नए सदस्य और पुराने कमांडर यही अपना कैंप बनाकर सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश रच करते थे इसके अलावा। यहां हथियारों की ट्रेनिंग भी आयोजित की जाती थी।

25 अगस्त को अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित हुई गृह मंत्रालय की हाई लेवल मीटिंग में इस बात पर मुहर लग गई थी, उन सभी इलाकों में जाकर नक्सल विरोधी अभियान को तेज किया जाए, जहां नक्सलियों की मौजूदगी सतत बनी रहती है। इसमें माओवादियों के ट्रेनिंग कैंपों में घुसकर हमला करना भी शामिल था।

लंबी प्लानिंग, चारो तरफ से घेर कर मारा

वन इंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक इसी रणनीति के तहत जवानों ने नक्सलियों के ट्रेनिंग कैंप में घुसकर जवानों ने 30 नक्सलियों को मार है। इसके लिए बीते 2 दिनों से नक्सलियों को चारो तरफ से घेरा जा रहा था। जिन 30 नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं, उसमें नई भर्ती को गुरिल्ला वार तकनीक सिखाने वाले 2 बड़े नक्सली भी शामिल हैं। मारे गए नक्सलियों ने कमलेश और उर्मिला शामिल है। यह दोनो नक्सली हमले की प्लानिंग और युद्ध की ट्रेनिंग दिया करते थे।

क्या है गुरिल्ला वार? क्या हमारे जवान भी है वाकिफ?

छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने सुरक्षाबलों पर हमेशा घने जंगलों में छुपाकर हमला किया है। वह अपने सारे हमले पूर्व नियोजित तरीके से छुपाकर प्लान करते हैं। इनकी यही तकनीक गुरिल्ला वार से प्रेरित है।

जंगल और बीहड़ में रहकर वार करने के लिए गुरिल्लावार में महारथ हासिल होना जरूरी है। नक्सली इसकी ट्रेनिग करते हैं। वहीं सीआरपीएफ की गुरिल्ला और जंगल वॉरफेयर में महारत रखने वाली यूनिट हैं,इन्ही जवानों की मदद से नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है।

यह भी पढ़ें अमित शाह ने 25 अगस्त को बना लिया था छत्तीसगढ़ में बड़े एक्शन का प्लान, मार्च 2026 को नक्सल आतंक बन जाएगा अतीत

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