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अमित शाह ने 25 अगस्त को बना लिया था छत्तीसगढ़ में बड़े एक्शन का प्लान, मार्च 2026 को नक्सल आतंक बन जाएगा अतीत

Chhattisgarh Naxal News: छत्तीसगढ़ के माओवादी बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले में शुक्रवार को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 30 नक्सलियों के मारे गए है। इस सफलता को आमजनों तक पहुंचाने का उत्साह इतना अधिक था कि गृह विभाग लगातार आंकड़े पेश करता रहा। पहले 7 ,फिर 14, 28 , फिर 30 नक्सलियों के मारे जाने की खबर दी गई। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से मुठभेड़ से जुड़े आंकड़े पेश करते रहे।

किंतु सवाल यह है कि आखिर भाजपा सरकार के सत्ता संभालते ही ऐसा कौन सा फार्मूला काम कर गया है कि दशकों से नासूर बनकर छत्तीसगढ़ की धरती को रक्तरंजित कर रहा नक्सलवाद दम तोड़ने पर विवश है।

amit shah

विष्णुदेव साय सरकार का दावा है कि वह छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करके ही दम लेगी। उनका कहना है कि नक्सलवाद के खत में के लिए शुरू हुई हमारी लड़ाई अब अपने अंजाम तक पहुंच कर ही दम लेगी, इसके लिए डबल इंजन की सरकार दृढ़ संकल्पित है। प्रदेश से नक्सलवाद का खत्म ही हमारा लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इस आत्मविश्वास के पीछे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का समर्थन है। ज्ञात हो कि अमित शाह ने 23 से 25 अगस्त 2024 तक के दौरान नक्सल प्रभावित 7 राज्यों की अंतरराज्यीय समन्वय समिति की बैठक ली थी।

इसमें सातों माओवादी प्रभावित राज्यों के मुख्य सचिव, डीजीपी और अर्द्धसैनिक बलों के अधिकारी शामिल हुए थे। इस महत्त्वपूर्ण बैठक में नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल विरोधी अभियान की गति पर समीक्षा की गई थी। इसी बैठक में अमित शाह ने कहा था कि छ्त्तीसगढ़ में नक्सली मुख्यधारा में शामिल होने के लिए आत्मसमर्पण करें या फोर्स की कार्रवाई के लिए तैयार रहे।

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शाह ने अधिकारियों से साफ साफ कहा था कि देश में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अंतिम चरण में है। केंद्र सरकार मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह से नक्सल समस्या से मुक्त कर देगी। शाह का कहना है कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या पर एक मजबूती के साथ रुथलेस रणनीति के साथ आखरी प्रहार किया जाए। उग्रवाद भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बड़ा चैलेंज है।

छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, झारखंड, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में माओवाद की समस्या हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ सबसे अधिक प्रभावित है। देश के 38 नक्सल प्रभावित जिलों में से 15 छत्तीसगढ़ में हैं। बीजापुर, बस्तर, दंतेवाड़ा, धमतरी, गरियाबंद, कांकेर, कोंडागांव, महासमुंद, नारायणपुर, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़ छुई खदान गंडई, सुकमा, कबीरधाम और मुंगेली माओवादी समस्या से प्रभावित जिले हैं।

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