15 जुलाई को लॉन्च होगा चंद्रयान-2, सितंबर में चंद्रमा पर करेगा लैंड

नई दिल्ली। चंद्रयान-1 की सफलता के बाद भारत अब इस मिशन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। केंद्रीय परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कहा है कि भारत अब चंद्रयान-2 की तैयारी में लगा हुआ है। चंद्रयान-2 को 15 जुलाई 2019 में लॉन्च किया जाएगा, जो कि सितंबर में लैंड करेगा। इस बार चंद्रयान के साथ एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर भी होगा। इस तरह से चंद्रयान-1 का विस्तार होगा।

चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से होगा

चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से होगा

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2022 में भारत की 75 वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर, इसरो ने अपना पहला मानव मिशन अंतरिक्ष में भेजने का संकल्प लिया है। यह 2022 से पहले हो सकता है। इसके लिए विशेष सेल बनाया गया है। जानकारी के मुताबिक चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से होगा। बताया जा रहा है कि यह मिशन ईसरो के लिए काफी अहम है क्योंकि अभी तक के सभी मिशनों की तुलना में यह जटिल है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रयान-2 मिशन पर लगभग एक हजार करोड़ रुपए का खर्च हो रहे हैं।

20 से 21 दिन में चंद्रमा की कक्षा में पहुंचेगा

20 से 21 दिन में चंद्रमा की कक्षा में पहुंचेगा

प्राप्त जानकारी के मुताबिक एक बार जब जीएसएलवीजियो ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंच जाएगा तो यह चंद्रयान को 170 km×20,000km में स्थापित करेगा। इसके बाद चंद्रयान आगे की दूरी तय करने के लिए आगे बढ़ेगा। करीब 20 से 21 दिन में यह लगभग 3,84,000 किलोमीटर की दूरी तय कर चंद्रमा की कक्षा में पहुंचगा। जैसे ही यह चंद्रमा की कक्षा में पहुंचेगा विक्रम नाम का लैंडर कक्षा से अलग हो जाएगा। जबकि ऑर्बिटर चांद की सतह से 100 किमी की दूरी पर चक्कर लगाता रहेगा।

चंद्रयान-2 मिशन में 30 प्रतिशत महिला वैज्ञानिक

इसरो के चेयरमैन डॉ के सिवन ने कहा कि चंद्रयान-2 मिशन में वैसे तो पूरी टीम काम कर रही है लेकिन इसमें 30 प्रतिशत महिला वैज्ञानिक हैं। सिवन ने कहा कि इसरो में हम पुरुष और महिला वैज्ञानिकों में अंतर नहीं समझते हैं। न ही यहां लिंगभेद हैं। जो सक्षम होता है उसे बेहतरीन काम करने का मौका मिला है। जानकारी के मुताबिक चंद्रयान-2 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर एम वनिता हैं। इसरो में इस स्तर का काम करने वाली पहली महिला वैज्ञानिक बतौर डिजाइन इंजीनियर वनिता को 2006 में बेस्ट वुमन सांइटिस्ट का अवार्ड भी मिल चुका है।

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