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वायु की दहशत के बीच गुजरातियों को याद आया 21 साल पहले का समुद्री तूफान, 10 हजार लोगों की गई थी जान

गांधीनगर। चक्रवात वायु की दहशत के चलते 13 जून की सुबह गुजरातियों को किसी ब्लैक डे की तरह लग रही थी, हालांकि उसकी दिशा ​बदल जाने की वजह से सभी ने चैन की सांस ली। इस मौके पर लोगों को 21 साल पहले कच्छ के कांडला में आया विनाशकारी तूफान याद आया। यह तूफान जून में ही आया था, जब तकरीबन 10 हजार लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। 30 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए। गुजरात के तटीय हिस्सों में 3 हजार करोड़ का नुकसान हुआ। 150 किलोमीटर की रफ्तार उसे चली हवाओं वाले उस तूफान से कांडला बंदरगाह तबाह हो गया। बंदरगाह पर लोहे की क्रेनें भी पलट गईं। तूफान की तीव्रता इतनी कि वहां काम कर रहे श्रमिक समुद्र की लहरों में न जाने कहां खो गए। कई महिलाओं की समुद्र में ही गर्भ गिर गए। कुछ की डिलीवरी हो गई और उनके बच्चे मृत पाए गए।

9 जून 1998 को गुजरात में आया था विनाशकारी चक्रवातीय भूकंप

9 जून 1998 को गुजरात में आया था विनाशकारी चक्रवातीय भूकंप

इस विनाशकारी तूफान के आने का दिन था 9 जून 1998, जिससे गुजरात की दशा बदल गई थी और सरकार भी हिलकर गिर गई थी। चक्रवातीय भूकंप की वजह से मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को इस्तीफा देना पड़ा। वह 1995 के बाद 1998 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे। बताया जाता है कि, कांडला पोर्ट पर तब अधिकारिक तौर पर ही 1 हजार लोग मारे गए थे, जबकि गैर-अधिकारिक तौर पर 10 हजार लोगों का कोई अता-पता नहीं चला। बाद में वे मृत माने गए।

तब नहीं थे लोगों को सतर्क करने के पर्याप्त साधन

तब नहीं थे लोगों को सतर्क करने के पर्याप्त साधन

21 साल पहले मौसम विभाग या सरकारी तंत्र के पास लोगों को अलर्ट करने की आधुनिक तकनीक नहीं थी, जिस तरह अब लोग मोबाइल फोन, इंटरनेट, टीवी और अन्य कई तरह के सुरक्षा उपकरणों से घिरे रहते हैं। जब वह तूफान आया था तो कहा जाता है कि संचार की कोई सुविधा नहीं थी। अर्थात् कोई पूर्वानुमानित जानकारी नहीं थी, इसलिये बड़े पैमाने पर तबाही हुई। उस तूफान के पीड़ितों से बड़े शहर भर गए थे। पूर्वोत्तर राज्यों से रोजगार के लिए कांडला आये मजदूरों और उनके परिवारजनों ने अहमदाबाद रेलवे स्टेशन को हाउसफुल कर दिया था।

तूफान की चौड़ाई 38 से 48 समुद्री मील थी

तूफान की चौड़ाई 38 से 48 समुद्री मील थी

कांडला त्रासदी के लिए समुद्र का पानी जिम्मेदार था। इस तूफान की चौड़ाई 38 से 48 समुद्री मील थी, लेकिन तूफान का असर 700 किलोमीटर के दायरे में हुआ। नवलवी और मुंद्रा के बीच उभरा हुआ स्टॉर्म जामनगर के गुजरने के बाद कांडला में फंस गया। कांडला में समुद्र का पानी भर गया। खाड़ी क्षेत्र में 18 फीट पानी भर गया। 15 फीट ऊंची लहरें उठने की वजह से बहुत से घर पानी में बह गए। तूफान ने कांडला को तीन घंटे तक अपनी चपेट में रखा, जिसके परिणामस्वरूप एक ही कंपनी फ्रेंड्स एंड फ्रेंड्स के 1300 कर्मचारियों एकसाथ की मौत हो गई।

नार्वे का 70 हजार टन का जहाज भी सोमनाथ के पास मिला

नार्वे का 70 हजार टन का जहाज भी सोमनाथ के पास मिला

उस तूफान से तबाह हुआ नार्वे का 70 हजार टन का जहाज भी सोमनाथ के पास मिला। स्टीमर, कंटेनर, जीप और मोटर वाहनों के टुकड़े हो गए। पांच बड़े जहाज कांडला के पानी में डूब गए। बड़ी संख्या में विदेशी भी फंस गए, जिनमें से कई की मौत हो गई।

फिर, भाजपा ने केशुभाई को हटाकर मोदी को सौंपी सत्ता

फिर, भाजपा ने केशुभाई को हटाकर मोदी को सौंपी सत्ता

भाजपा के केशुभाई पटेल के शासन के दिनों में, 1998 में पहली आपदा कांडला में ही आई, उसके बाद 26 जनवरी 2001 में कच्छ का बडा भूकंप आया। उस भूकंप में 22,000 से अधिक लोग मारे गए थे। तूफान और भूकंप के कारण केशुभाई की सरकार को हटा दिया गया औऱ उनके स्थान पर भाजपा ने नरेंद्र मोदी को शासन सौंपा।

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